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Coronavirus in Jharkhand : कोरोना की दूसरी लहर गयी नहीं, लापरवाही पड़ सकती है भारी, इन तरीकों को जरूर अपनायें

Updated at : 17 May 2021 3:23 PM (IST)
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Coronavirus in Jharkhand : कोरोना की दूसरी लहर गयी नहीं, लापरवाही पड़ सकती है भारी, इन तरीकों को जरूर अपनायें

Coronavirus in Jharkhand (धनबाद) : कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर अभी थोड़ी कम जरूर हुई है, लेकिन खत्म नहीं हुई. अगले 6 माह से अधिक समय तक इसको लेकर सतर्कता की जरूरत है. थोड़ी सी लापरवाही भी भारी पड़ सकती है. साथ ही बुखार, बदन दर्द या किसी तरह के कोरोना के लक्षण दिखने पर खुद से पारासिटामॉल या एंटी बॉयोटिक नहीं लें. डॉक्टर से दिखा कर ही दवाएं लें. साथ ही 5 दिन तक समस्या रहे, तो बल्ड टेस्ट एवं HRCT करायें. HRCT में कम स्कोर आने पर अस्पताल में भर्ती होने या नहीं होने का फैसला स्वयं नहीं करें. यह कहना है शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष सह कैथ लैब के प्रभारी डॉ यूके ओझा का.

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Coronavirus in Jharkhand (संजीव झा, धनबाद) : कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर अभी थोड़ी कम जरूर हुई है, लेकिन खत्म नहीं हुई. अगले 6 माह से अधिक समय तक इसको लेकर सतर्कता की जरूरत है. थोड़ी सी लापरवाही भी भारी पड़ सकती है. साथ ही बुखार, बदन दर्द या किसी तरह के कोरोना के लक्षण दिखने पर खुद से पारासिटामॉल या एंटी बॉयोटिक नहीं लें. डॉक्टर से दिखा कर ही दवाएं लें. साथ ही 5 दिन तक समस्या रहे, तो बल्ड टेस्ट एवं HRCT करायें. HRCT में कम स्कोर आने पर अस्पताल में भर्ती होने या नहीं होने का फैसला स्वयं नहीं करें. यह कहना है शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष सह कैथ लैब के प्रभारी डॉ यूके ओझा का.

क्या है शुरुआती लक्षण

रविवार को प्रभात खबर से बातचीत में डॉ यूके ओझा ने कहा कि कोरोना की दूसरी लहर पहले की तुलना में काफी खतरनाक है. यह युवाओं को ज्यादा शिकार बना रही है. 25 से 50 वर्ष आयु वर्ग के लोग तेजी से इस बीमारी की चपेट में आ रहे हैं. बहुत लोगों को पहले बदन दर्द, सुस्ती लगने की समस्या आती है. इसके बाद हल्की बुखार आती है. तीन-चार दिन बाद बुखार 102 डिग्री तक चली जाती है. जैसे ही पारा 100 के पार जाये पीड़ित लोग तथा उनके परिजन सतर्क हो जायें. खुद से खरीद कर या किसी दवा दुकानदार से पूछ कर लोग पारासिटामॉल ले लेते हैं. इससे बीमारी कम होने की बजाय और बढ़ जाती है. पांचवें दिन के बाद का दो-तीन दिन खतरनाक हो जाता है. ऑक्सीजन सेचुरेशन प्वाइंट 95-96 से घट कर 90 या उससे भी कम आने लगता है.

ऐसे नापें ऑक्सीजन सेचुरेशन प्वाइंट

डॉ ओझा ने कहा कि अगर किसी को सर्दी, खांसी, बुखार होता है, तो अपना ऑक्सीजन सेचुरेशन प्वाइंट जरूर जांचनी चाहिए. इसके लिए पहले ऑक्सीमीटर से अपना सेचुरेशन प्वाइंट जांच कर लें. फिर 2 मिनट तेज पैदल चलें. उसके बाद फिर सैचुरेशन प्वाइंट चेक करें. मान लें कि चलने से पहले सेचुरेशन प्वाइंट 96-97 है तथा 2 से 4 मिनट चलने के बाद 90-91 आ जाता है. तब सचेत हो जायें. इससे साफ है कि आपके लंग्स में इंफेक्शन आना शुरू हो गया है. अगर 6 मिनट चलने के बाद भी सेचुरेशन प्वाइंट में कोई गिरावट नहीं आती है तब रिलेक्स रह सकते हैं.

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स्वस्थ रहने के लिए रोज 30 मिनट चलें पैदल

उन्होंने कहा कि खुद को स्वस्थ रखने के लिए कम से कम 30 मिनट लगातार पैदल चलना चाहिए. साथ ही घर के अंदर भी योगासान, प्राणायाम करते रहें. घर से बाहर निकलने पर मॉस्क जरूर लगायें तथा दो गज की दूरी भी मेंटेन करें. डबल मॉस्क लगाने से डबल सुरक्षा मिलने का कोई मेडिकल साक्ष्य नहीं है. फिर भी अगर दो सर्जिकल मॉस्क लगाते हैं, तो बेहतर है. आमजनों के लिए सर्जिकल मॉस्क का उपयोग ही काफी है. मानसिक रूप से स्वस्थ रहने के लिए 7 से 8 घंटे नींद लेना भी जरूरी है. इससे आदमी को ताजगी मिलती है. टेंशन दूर करने के लिए भी अपनों के साथ कुछ समय जरूर बितायें.

कोविड वैक्सीन रामबाण की तरह

एक सवाल के जवाब में डॉ ओझा ने कहा कि कोरोना से बचने के लिए टीका जरूर लेना चाहिए. इसको लेकर कोई भ्रम नहीं है. इतना तय मानिये कि अगर किसी ने वैक्सीन का दोनों डोज ले लिया है, तो उसकी मौत कोरोना से नहीं होगी. संक्रमित हो सकते हैं, लेकिन यह बीमारी गंभीर नहीं होगी. इसको लेकर फैलाये जा रहे अफवाह पर ध्यान नहीं दें.

रोज एक अंडा या 100 ग्राम छेना इम्युनिटी के लिए लें

डॉ ओझा ने कहा कि कोरोना काल में खुद को स्वस्थ रखने के लिए प्रोटीन युक्त खाना पर जोर दें. अगर मांसाहारी हैं, तो रोज एक अंडा उबाल कर खायें. चिकेन या मछली भी खा सकते हैं. अगर बीपी वगैरह की समस्या हो, तो अंडा का पीला वाला भाग जरूर निकाल दें. शाकाहारी लोग भोजन में छेना, पनीर, दाल का प्रयोग करें. कोई भी दाल लाभदायक होता है.

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शुगर लेवल बढ़ने से घबराये नहीं

कोरोना से ग्रसित होने वाले मरीजों में शुगर लेवल बढ़ने के सवाल पर कहा कि यह बहुत चिंता की बात नहीं है. एस्टोरॉयड के इस्तेमाल से खून में शुगर लेवल बढ़ता है. कोरोना से जंग जीतने के बाद मरीजों को शुगर लेवल कम करने के लिए दवाई दी जाती है. बहुत सारे मरीज बीच में ही दवाइयां खास कर स्टेरॉयड बंद कर देते हैं जो गलत है. डॉक्टर के कहने पर ही दवाइयों को डोज लें.

Posted By : Samir Ranjan.

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