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चाईबासा के मंगलाहाट में 80 फीसदी जमीन पर अतिक्रमणकारियों का कब्जा, ग्रामीणों के लिए नहीं बची जगह

Updated at : 14 Jul 2021 8:17 PM (IST)
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चाईबासा के मंगलाहाट में 80 फीसदी जमीन पर अतिक्रमणकारियों का कब्जा, ग्रामीणों के लिए नहीं बची जगह

Jharkhand News (चाईबासा) : ब्रिटिश काल से पश्चिमी सिंहभूम जिले में ऐतिहासिक हाट के तौर पर चाईबासा बस स्टैंड के समीप 'मंगलाहाट' सजते आ रहा है. 9 एकड़ 58 डिसमिल सैरात की जमीन पर वर्ष 1962 से यह हाट संचालित है. यहां कोल्हान क्षेत्र से ग्रामीण खरीदारी के लिए पहुंचते हैं. दरअसल, ब्रिटिश काल से चाईबासा में लगने वाले उक्त मंगलाहाट की नींव साग-सब्जी, मांस-मछली समेत रोजमर्रा की अनेक चीजों को बेचने आने वाले जिले के ग्रामीणों को एक बाजार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से रखी गयी थी. तब हाट में प्रतिदिन लोग अपने सामान को बेचने के लिए हाट आते थे और सामान बेच कर शाम को अपने गांव लौट जाते थे. इसके बाद धीरे-धीरे सैरात की जमीन पर अतिक्रमण बढ़ता गया. अब हालात यह है कि हाट की 80 फीसदी भूमि पर अतिक्रमण धारियों ने कब्जा जमा लिया है. ऐसे में अब ग्रामीण क्षेत्र से अपने सामानों को बेचने आने वाले ग्रामीणों के लिए जगह नहीं बची है.

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Jharkhand News (अभिषेक पीयूष, चाईबासा) : ब्रिटिश काल से पश्चिमी सिंहभूम जिले में ऐतिहासिक हाट के तौर पर चाईबासा बस स्टैंड के समीप ‘मंगलाहाट’ सजते आ रहा है. 9 एकड़ 58 डिसमिल सैरात की जमीन पर वर्ष 1962 से यह हाट संचालित है. यहां कोल्हान क्षेत्र से ग्रामीण खरीदारी के लिए पहुंचते हैं. दरअसल, ब्रिटिश काल से चाईबासा में लगने वाले उक्त मंगलाहाट की नींव साग-सब्जी, मांस-मछली समेत रोजमर्रा की अनेक चीजों को बेचने आने वाले जिले के ग्रामीणों को एक बाजार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से रखी गयी थी. तब हाट में प्रतिदिन लोग अपने सामान को बेचने के लिए हाट आते थे और सामान बेच कर शाम को अपने गांव लौट जाते थे. इसके बाद धीरे-धीरे सैरात की जमीन पर अतिक्रमण बढ़ता गया. अब हालात यह है कि हाट की 80 फीसदी भूमि पर अतिक्रमण धारियों ने कब्जा जमा लिया है. ऐसे में अब ग्रामीण क्षेत्र से अपने सामानों को बेचने आने वाले ग्रामीणों के लिए जगह नहीं बची है.

नप को सलाना 18 लाख का राजस्व, ठेकेदार करते हैं महसूल वसूली

मंगलाहाट पूर्व में कृषि उत्पादन बाजार समिति के अधीन संचालित था. इसे वर्ष 2019-20 में बाजार समिति द्वारा चाईबासा नगर परिषद को हैंडओवर कर दिया गया. वर्तमान में हाट में पक्के की दुकानों के साथ-साथ टिन शेड और अस्थायी तौर पर लगने वाली तकरीबन 500 दुकानें प्रतिदिन सजती है. मंगलाहाट से चाईबासा नगर परिषद को सालाना डाक बंदोबस्ती के जरिये 18 लाख का राजस्व प्राप्त होता है. इसके बदले मंगलाहाट की दुकानों से ठेकेदार द्वारा मसहूल वसूला जाता है. वहीं, दूसरी ओर अस्थायी दुकान लगाने वाले ग्रामीणों के लिए कम जगह होने की वजह से मंगलाहाट के खाली बचे स्थान पर अब प्रतिदिन आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से ही काफी कम संख्या में ग्रामीण साग-सब्जी मात्र बेचने के लिए आते हैं.

मंगलाहाट में 254 दुकानों पर अवैध कब्जा

चाईबासा का मंगलाहाट दो भागों (दक्षिणी भाग व शेष भाग) में बंटा हुआ है. हाट का दक्षिणी भाग शुरू से नगर परिषद के अधीन संचालित है. जबकि, शेष भाग पूर्व में बाजार समिति के अधीन था. जिसे वर्ष 2019-20 में बाजार समिति ने नगर परिषद को हैंडओवर कर दिया था. यहां दक्षिणी भाग में 110 के करीब दुकानें (टिन शेड) है. वहीं, शेष भाग में 254 टीन शेड की दुकानें सजती है. नगर परिषद द्वारा हाल ही में कराये गये एक सर्वे के अनुसार उक्त सभी 254 दुकानों पर अतिक्रमणकारियों द्वारा अवैध रूप से कब्जा जमाया गया है. इसके अलावा नगर परिषद दक्षिणी भाग के दुकानों को भी अवैध मानती है. इन दुकानदारों से ठेकेदारों द्वारा महसूल वसूला जाता है.

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बाजार समिति द्वारा बनायी गयी 80 दुकानें ही वैध

मंगलाहाट में लगभग 80 के करीब पक्के की दुकानें है. उक्त सभी दुकानों को बाजार उत्पादन समिति के द्वारा बनाया गया था. इन दुकानों को बाजार समिति द्वारा पूर्व में जिन्हें अलोर्ट किया गया है. उनके नाम से बकायदा रजिस्ट्रेशन बाजार समिति में किया गया था. इस कारण नगर परिषद पक्के की उक्त दुकानों को वैध मानती है. पक्के के मकान में संचालित होने वाले उक्त दुकानों के एवज में दुकानदार द्वारा किराया शुल्क का भुगतान बाजार समिति को ही किया जाता है. इसमें से वर्तमान में 32 दुकानें अब भी बाजार समिति के अधीन संचालित है. जिसे बाजार समिति द्वारा नगर परिषद को हैंडओवर नहीं किया गया है.

आग से जलने के बाद दुकान में लगाया जा रहा शटर

मंगलाहाट में 30 मई, 2021 की देर रात आग लगने से कपड़ा, जूता-चप्पल समेत छाता आदि की तकरीबन 9 दुकानें जल गयी थी. आग लगने के बाद वर्तमान में कई पीड़ित दुकानदारों द्वारा दुकान का निर्माण करा लिया गया है. वहीं कुछेक दुकानदार द्वारा निर्माण अब भी कराया जा रहा है. उक्त दुकानों में अब टीन शेड के साथ ही शटर भी लगाया जा रहा है. नये निर्माण को लेकर दुकानदारों ने नगर परिषद कार्यालय से कोई आदेश नहीं लिया है, बावजूद कार्य प्रगति पर है.

साप्ताहिक हाट में पहले आओ-पहले पाओ की तर्ज पर मिलती है जगह

सप्ताह में एक दिन मंगलवार को मंगलाहाट में साप्ताहिक हाट लगता है. इस दिन स्थायी तौर पर कब्जाधारियों को अपना दुकान छोड़ना पड़ता है. आम तौर पर इस दिन मंगलाहाट में ग्रामीण क्षेत्र से आने वाले दुकानदारों की संख्या रोज के मुकाबलें तीगुनी हो जाती है. ऐसे में पहले आओ-पहले पाओ की तर्ज पर ग्रामीणों को अपने सामानों को बेचने के लिए स्थान मिलता है. इसके एवज में दुकान के साइज के हिसाब से ग्रामीणों से ठेकेदार द्वारा महसूल की वसूली की जाती है.

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मंगलाहाट में 250 के करीब दुकानों पर है अवैध कब्जा : एग्जीक्यूटिव इंजीनियर

इस संबंध में चाईबासा नगर परिषद के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर अभय कुमार झा ने कहा कि मंगलाहाट में 250 के करीब दुकानों पर अवैध कब्जा है. इसके विरूद्ध अभियान चलना था, लेकिन कोविड के कारण अभियान टल गया. बोर्ड के साथ बैठक करके विकल्प की खोज की जायेगी. मंगलाहाट में मॉर्केट कॉम्प्लेक्स बनना है. विभाग से डीपीआर अप्रूव होने के बाद अतिक्रमण हटेगा. इसके लिए सीओ-एसडीओ अधीकृत पदाधिकारी है.

यह भी जानें

चाईबासा मंगलाहाट का क्षेत्रफल : 9 एकड़ 58 डिसमिल
सब्जी के थोक विक्रेता : 50 के करीब
सब्जी के खुदरा विक्रेता : 100 के करीब
किसानों की फैजा दुकानें : 150 के करीब
कपड़े के छोटे व्यापारी : 70 के करीब
कपड़े के बड़े व्यापारी : 50 के करीब
शृंगार (मनिहारी दुकान) : 20 के करीब
हड़िया पट्टी में लगने वाली दुकानें : 80 के करीब
मोबाइल दुकान : 20 के करीब
फल दुकान : 30 के करीब
गोदाम : 25 के करीब
गद्दीदार : 30 के करीब
मीट-मछली की दुकान : 20 के करीब

रोजाना महसूल वसूली

सब्जी बेचने वाले ग्रामीणों से : 10 रुपये
सब्जी बेचने वाले स्थानीय से : 20 रुपये
छोटी दुकान : 20 रुपये
मध्यम दुकान : 30 रुपये
बड़ी दुकान : 50 रुपये
गोदाम : 600 रुपये प्रतिमाह
सड़क किनारे की दुकान : 300 रुपये प्रतिमाह

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Posted By : Samir Ranjan.

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