कभी दिवालिया होने की कगार पर था ये देश, अब बना Upper-Middle Income Economy, भारत अभी भी इस लिस्ट में पीछे

World Bank: अगर आपको याद हो तो साल 2022 में श्रीलंका की तस्वीर पूरी दुनिया ने देखी थी. पेट्रोल पंपों पर लंबी लाइनें, खाने-पीने की चीजों की कमी, विदेशी मुद्रा का संकट और सरकार के खिलाफ बड़े प्रदर्शन. लेकिन अब उसी श्रीलंका से एक अच्छी खबर आई है.
World Bank: विश्व बैंक (World Bank) ने अपनी नई Income Classification में श्रीलंका को फिर से Upper-Middle Income Economy का दर्जा दे दिया है. यह नई सूची 1 जुलाई 2026 से लागू हो चुकी है और 30 जून 2027 तक प्रभावी रहेगी.
इस बार विश्व बैंक ने 218 देशों और अर्थव्यवस्थाओं का आकलन किया. इनमें 6 देशों को ऊंची आय वाली श्रेणी में जगह मिली. श्रीलंका के साथ वियतनाम, फिलीपींस, जॉर्डन और फेडरेटेड स्टेट्स ऑफ माइक्रोनेशिया भी Lower-Middle Income से Upper-Middle Income में पहुंच गए, जबकि मायोटे अब High Income Economy बन गया.
आखिर श्रीलंका ने इतनी जल्दी वापसी कैसे की?
2022 का आर्थिक संकट श्रीलंका के इतिहास के सबसे कठिन दौरों में से एक था. देश कर्ज नहीं चुका पाया, विदेशी मुद्रा लगभग खत्म हो गई, ईंधन और खाने की भारी कमी हो गई थी. लेकिन पिछले कुछ समय में हालात धीरे-धीरे बदलने लगे. विश्व बैंक के मुताबिक—
- 2025 में श्रीलंका की Real GDP Growth 5% रही.
- Atlas GNI per capita में 11.2% की बढ़ोतरी हुई.
- महंगाई कम हुई.
- Exchange Rate पहले के मुकाबले स्थिर रही.
- आर्थिक गतिविधियां तेज हुई.
- कर्ज पुनर्गठन (Debt Restructuring), अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की मदद और अर्थव्यवस्था में सुधार का असर दिखा.
इन्हीं वजहों से श्रीलंका की प्रति व्यक्ति राष्ट्रीय आय (Atlas GNI per capita) Upper-Middle Income की तय सीमा से ऊपर पहुंच गई और उसे फिर से यह दर्जा मिल गया. हालांकि, इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि देश का हर नागरिक रातों-रात अमीर हो गया है. यह केवल पूरे देश की औसत प्रति व्यक्ति आय के आधार पर किया गया वर्गीकरण है.
World Bank आखिर तय कैसे करता है कि कौन-सा देश अमीर है और कौन नहीं?
विश्व बैंक देशों को उनकी Atlas Gross National Income (GNI) per capita यानी प्रति व्यक्ति राष्ट्रीय आय के आधार पर चार हिस्सों में बांटता है. हर साल वैश्विक महंगाई को देखते हुए इनकी सीमा बदली जाती है.
| आय वर्ग | प्रति व्यक्ति Atlas GNI (FY2027) |
| Low Income | 1,185 अमेरिकी डॉलर तक |
| Lower-Middle Income | 1,186 से 4,695 अमेरिकी डॉलर |
| Upper-Middle Income | 4,696 से 14,575 अमेरिकी डॉलर |
| High Income | 14,575 अमेरिकी डॉलर से अधिक |
विश्व बैंक Atlas Method का इस्तेमाल करता है ताकि कुछ समय के लिए Exchange Rate में होने वाले उतार-चढ़ाव का ज्यादा असर न पड़े. इसके लिए कई वर्षों की औसत विनिमय दर और महंगाई को भी शामिल किया जाता है. किसी देश की श्रेणी सिर्फ आय बढ़ने से नहीं बदलती. इन वजहों से भी बदलाव हो सकता है—
- आबादी के अनुमान में बदलाव
- राष्ट्रीय खातों (National Accounts) में संशोधन
- Exchange Rate में बदलाव
- आर्थिक आंकड़ों का अपडेट
- वास्तविक आय (Real Income) में बढ़ोतरी या गिरावट
भारत अभी भी इस सूची में कहां है?
भारत अभी भी Lower-Middle Income Economy की श्रेणी में है. यह सुनकर कई लोगों को हैरानी हो सकती है, क्योंकि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है. लेकिन विश्व बैंक कुल GDP नहीं बल्कि प्रति व्यक्ति GNI को आधार मानता है. भारत की अर्थव्यवस्था भले ही बहुत बड़ी हो, लेकिन 140 करोड़ से ज्यादा आबादी होने की वजह से प्रति व्यक्ति औसत आय अभी Upper-Middle Income की तय सीमा तक नहीं पहुंची है. इसके अलावा राज्यों के बीच आय और उत्पादकता में बड़ा अंतर भी राष्ट्रीय औसत को प्रभावित करता है. अर्थशास्त्रियों (Economists) का मानना है कि अगर भारत की आर्थिक विकास दर मजबूत बनी रही, आबादी की तुलना में प्रति व्यक्ति आय लगातार बढ़ती रही और विकास की रफ्तार कायम रही, तो आने वाले दशक में भारत भी Upper-Middle Income Economy बन सकता है.
इस रैंकिंग का आम लोगों से क्या मतलब है?
कई लोग इसे किसी देश के अमीर बनने का प्रमाण मान लेते हैं, लेकिन विश्व बैंक ऐसा नहीं मानता. उसके मुताबिक यह वर्गीकरण मुख्य रूप से विश्लेषण और तुलना के लिए बनाया गया है. इसका इस्तेमाल—
- सरकारें अपनी आर्थिक स्थिति समझने और दूसरे देशों से तुलना करने के लिए करती हैं.
- अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं और शोधकर्ता देशों का अध्ययन करने के लिए करते हैं.
- विकास एजेंसियां यह तय करने के लिए करती हैं कि किस देश को रियायती वित्तीय सहायता या विशेष योजनाओं का लाभ मिल सकता है.
- निवेशक किसी देश की लंबी अवधि की आर्थिक दिशा का अंदाजा लगाने के लिए इसे देखते हैं.
विश्व बैंक यह भी साफ कहता है कि सिर्फ GNI per capita किसी देश की पूरी तस्वीर नहीं दिखाता. गरीबी, असमानता, स्वास्थ्य, शिक्षा और संस्थागत व्यवस्था जैसे कई अहम पहलू इससे बाहर रहते हैं.
दुनिया की तस्वीर भी बदल रही है
विश्व बैंक की रिपोर्ट बताती है कि पिछले चार दशकों में दुनिया की आय संरचना काफी बदली है. 1987 में दुनिया के करीब 30% देश Low Income श्रेणी में थे. अब 2026 तक यह हिस्सा घटकर सिर्फ 11% रह गया है. हालांकि सभी देशों की रफ्तार एक जैसी नहीं रही. कई देश तेजी से आगे बढ़े, जबकि कुछ देश संघर्ष, आर्थिक अस्थिरता और धीमी विकास दर की वजह से अब भी निचली आय वाली श्रेणियों में ही बने हुए हैं.
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By Soumya Shahdeo
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