Windfall Tax: सरकार ने महीने के पहले दिन बढ़ाया घरेलू कच्चे तेल पर विंडफॉल टैक्स, डीजल पर मिलेगी राहत

Published by : Madhuresh Narayan Updated At : 01 Mar 2024 9:29 AM

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Windfall Tax: अंतर्राष्ट्रीय कच्चे तेल और उत्पाद की कीमतों में उतार-चढ़ाव के आधार पर विंडफॉल टैक्स में हर 15 दिनों में संशोधन होता है.

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Windfall Tax: केंद्र सरकार के द्वारा महीने के पहले दिन विंडफॉल टैक्स में बड़ा बदलाव किया गया है. इसके कारण घरेलू कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोत्तरी हो की गयी है. सरकार के द्वारा जारी एक नोटिफिकेशन में कहा गया है कि घरेलू कच्चे तेल पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स में 1300 रुपये प्रति मैट्रिक टन का इजाफा किया गया है. इससे पहले सरकार के द्वारा प्रति मैट्रिक टन तीन हजार रुपये विंडफॉल टैक्स वसूला जाता था. जबकि, अब ये 4600 रुपये कर दिया गया है. हालांकि, सरकार ने डीजल की कीमतों में राहत देते हुए डीजल के निर्यात पर लगने वाले स्पेशल ड्यूटी टैक्स में कटौती की है. इसे 1.50 रुपये प्रतिलीटर से कम करके शून्य कर दिया है. हालांकि, पहले पेट्रोल और एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) पर ये टैक्स नहीं लिया जाता है.

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15 दिनों में होता है अपडेट

अंतर्राष्ट्रीय कच्चे तेल और उत्पाद की कीमतों में उतार-चढ़ाव के आधार पर विंडफॉल टैक्स में हर 15 दिनों में संशोधन होता है. इससे पहले, 1 दिसंबर को सरकार ने कच्चे पेट्रोलियम पर अप्रत्याशित कर को ₹6,300 प्रति टन से घटाकर ₹5,000 प्रति टन करने की घोषणा की थी. जबकि, जनवरी में सरकार ने राहत देते हुए, विंडफॉल टैक्स को 2300 रुपये प्रति टन से घटाकर 1700 रुपये प्रति टन कर दिया है. वहीं, 15 फरवरी को समीक्षा में सरकार ने घरेलू कच्चे तेल पर विंडफॉल टैक्स में बढ़ोतरी की थी. पिछले महीने 100 रुपये प्रति मैट्रिक टन का इजाफा किया गया था.

क्या है विंडफॉल टैक्स

कच्चे तेल की बढ़ती कीमत के जवाब में भारत ने शुरुआत में जुलाई 2022 में विंडफॉल टैक्स लगाया. यह कर सरकारों द्वारा तब लगाया जाता है जब कोई उद्योग अप्रत्याशित रूप से पर्याप्त मुनाफा कमाता है, जिसका श्रेय आमतौर पर किसी अभूतपूर्व घटना को दिया जाता है. जब वैश्विक बेंचमार्क की दरें 75 डॉलर प्रति बैरल से अधिक हो जाती हैं तो घरेलू स्तर पर उत्पादित कच्चे तेल पर अप्रत्याशित कर लगाया जाता है. डीजल, एटीएफ और पेट्रोल के निर्यात के लिए, लेवी तब लागू होती है जब उत्पाद में दरार आती है, या मार्जिन 20 डॉलर प्रति बैरल से अधिक हो जाता है. उत्पाद में दरारें या मार्जिन कच्चे तेल (कच्चे माल) की लागत और तैयार पेट्रोलियम उत्पादों के मूल्य के बीच अंतर को दर्शाते हैं. भारत में ईंधन निर्यात में प्रमुख खिलाड़ियों में गुजरात के जामनगर में दुनिया के सबसे बड़े एकल-स्थान तेल रिफाइनरी कॉम्प्लेक्स का संचालन करने वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड और रोसनेफ्ट द्वारा समर्थित नायरा एनर्जी शामिल हैं.

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