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वंदे भारत स्लीपर ट्रेन में लगेगा झांसी का ट्रांफॉर्मर, सेमी-हाईस्पीड तकनीक को मिलेगी नई ताकत

Vande Bharat Sleeper Train: वंदे भारत स्लीपर ट्रेन परियोजना को बड़ी मजबूती मिली है. बीएचईएल ने अपने झांसी संयंत्र से ‘अंडरस्लंग ट्रैक्शन ट्रांसफॉर्मर’ की आपूर्ति शुरू कर दी है, जो ‘मेक इन इंडिया’ पहल की दिशा में अहम कदम है. यह परियोजना बीएचईएल के नेतृत्व वाले कंसोर्टियम द्वारा चलाई जा रही है. वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों की परिचालन गति 160 किमी प्रति घंटा और डिजाइन गति 180 किमी प्रति घंटा होगी, जिससे लंबी दूरी की यात्रा और अधिक तेज व आरामदायक बनेगी.

Vande Bharat Sleeper Train: भारत की अगली पीढ़ी की रेल परियोजनाओं में वंदे भारत स्लीपर ट्रेन एक बड़ा नाम बनकर उभर रही है. अब इस महत्वाकांक्षी परियोजना को मजबूती देने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र की दिग्गज कंपनी भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (बीएचईएल) ने अपने झांसी संयंत्र से ‘अंडरस्लंग ट्रैक्शन ट्रांसफॉर्मर’ की आपूर्ति शुरू कर दी है. इसे ‘मेक इन इंडिया’ पहल की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है.

झांसी कारखाने से शुरू हुई अहम आपूर्ति

बीएचईएल ने गुरुवार को जारी बयान में कहा कि वंदे भारत स्लीपर ट्रेन परियोजना के लिए झांसी इकाई में तैयार किए गए अंडरस्लंग ट्रैक्शन ट्रांसफॉर्मर की पहली खेप रवाना कर दी गई है. इस अवसर पर झांसी संयंत्र में एक विशेष समारोह का आयोजन किया गया, जहां इस खेप को हरी झंडी दिखाकर भेजा गया. ये ट्रांसफॉर्मर आधुनिक सेमी-हाई-स्पीड ट्रेनों के लिए बेहद अहम माने जाते हैं, क्योंकि ये बिजली आपूर्ति को नियंत्रित कर ट्रेनों को तेज, सुरक्षित और ऊर्जा-कुशल संचालन में मदद करते हैं.

बीएचईएल के नेतृत्व में चल रही है परियोजना

वंदे भारत स्लीपर ट्रेन परियोजना का क्रियान्वयन बीएचईएल के नेतृत्व वाले एक कंसोर्टियम द्वारा किया जा रहा है, जिसमें टीटागढ़ रेल सिस्टम्स लिमिटेड (टीआरएसएल) भी शामिल है. इससे पहले इसी परियोजना के तहत बीएचईएल के बेंगलुरु संयंत्र से ‘ट्रैक्शन कन्वर्टर्स’ की आपूर्ति शुरू की जा चुकी है. इस तरह झांसी और बेंगलुरु दोनों इकाइयों की भागीदारी से यह स्पष्ट है कि वंदे भारत स्लीपर ट्रेन पूरी तरह स्वदेशी तकनीक और निर्माण क्षमता पर आधारित परियोजना बनती जा रही है.

सेमी-हाई-स्पीड तकनीक में मजबूत होगी भारत की पकड़

बीएचईएल के अनुसार, इस कदम से ‘सेमी-हाई-स्पीड प्रोपल्शन’ क्षेत्र में कंपनी की रणनीतिक स्थिति और मजबूत होगी. वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों की परिचालन गति 160 किलोमीटर प्रति घंटा और डिजाइन गति 180 किलोमीटर प्रति घंटा तय की गई है. इस तकनीक के जरिए न केवल लंबी दूरी की यात्रा तेज होगी, बल्कि यात्रियों को रात में आरामदायक, सुरक्षित और आधुनिक सफर का अनुभव भी मिलेगा.

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रेलवे मेंटेनेंस सेगमेंट में भी बढ़ा बीएचईएल का दायरा

बीएचईएल ने यह भी जानकारी दी कि उसकी झांसी इकाई को हाल ही में ‘रेल बोर्न मेंटेनेंस व्हीकल’ के निर्माण का ऑर्डर मिला है. इन विशेष वाहनों का इस्तेमाल रेलवे पटरियों के निर्माण, निरीक्षण, मरम्मत और रखरखाव में किया जाता है. यह ऑर्डर इस बात का संकेत है कि बीएचईएल अब केवल ट्रेनों तक सीमित नहीं, बल्कि रेलवे के संपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर और मेंटेनेंस सिस्टम में भी अपनी मजबूत भूमिका स्थापित कर रहा है.

भाषा इनपुट के साथ

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KumarVishwat Sen
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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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