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जीएसटी वसूली के तरीकों पर सुप्रीम कोर्ट नाराज, सरकार को दिया सख्त निर्देश, देखें VIDEO

Updated at : 11 May 2024 10:06 AM (IST)
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Supreme Court Hearing on GST Collection: सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जाहिर करते हुए केंद्र सरकार को आगाह किया है कि कारोबारियों से जीएसटी की वूसली के लिए जोर-जबरदस्ती और धमकी देने के तरीकों का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए.

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Supreme Court Hearing on GST Collection: जीएसटी यानी वस्तु एवं सेवाकर. देशभर के कारोबारियों से टैक्स की वसूली के लिए केंद्र सरकार ने 1 जुलाई 2017 को जीएसटी कानून लागू किया गया. लेकिन, जीएसटी वसूली के लिए सरकार की ओर से अपनाए जाने वाले तरीकों पर सुप्रीम कोर्ट नाराज है. कारोबारियों से जोर-जबरदस्ती जीएसटी वसूली, धमकी देने और जीएसटी भुगतान करने में देर होने पर की जाने वाली गिरफ्तारी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है.

जीएसटी वसूली के लिए न दी जाए धमकी

इस याचिका पर 8 और 9 मई 2024 को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जाहिर करते हुए केंद्र सरकार को आगाह किया है कि कारोबारियों से जीएसटी की वूसली के लिए जोर-जबरदस्ती और धमकी देने के तरीकों का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए. इसके अलावा, 9 मई 2024 को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू को यहां तक कह दिया कि जीएसटी कानून के तहत सिर्फ संदेह के आधार पर किसी को गिरफ्तार नहीं किया जाना चाहिए. कारोबारियों की गिरफ्तारी तब तक नहीं होनी चाहिए, जब तक कि संबंधित विभाग और अधिकारी के पास कोई पुख्ता सबूत न हो.

गिरफ्तारी के तथ्यों को मजिस्ट्रेट करेंगे सत्यापित

सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति संजीव खन्ना, न्यायमूर्ति एम. एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी की पीठ कर रही है. पीठ ने कहा कि जिन तथ्यों के आधार पर गिरफ्तारी की गई है, उन्हें एक मजिस्ट्रेट द्वारा सत्यापित किया जाना चाहिए.

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साक्ष्य के आधार पर हो गिरफ्तारी

केंद्र की ओर से सर्वोच्च अदालत में पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसीटर जनरल (एएसजी) एसवी राजू से पीठ ने कहा कि इस अधिनियम के तहत गिरफ्तारी केवल संदेह के आधार पर नहीं की जा सकती, बल्कि उपयुक्त जांच-पड़ताल और कानून के तहत निर्धारित प्रक्रिया के पालन के बाद की जा सकती है. यह (गिरफ्तारी) ऐसे साक्ष्य पर आधारित होनी चाहिए, जो मजिस्ट्रेट की ओर से सत्यापित और आयुक्त की ओर से प्रमाणित किये जाने योग्य हो. एएसजी ने जवाब दिया कि हां, कोई भी गिरफ्तारी उपयुक्त तथ्यों के आधार पर हुई. हम बिना ठोस साक्ष्य के किसी को गिरफ्तार नहीं करते.

14 मई को फिर होगी सुनवाई

सर्वोच्च अदालत 281 याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है, जिनमें दंडात्मक प्रावधानों के दुरुपयोग के आरोपों के बीच सीमा शुल्क अधिनियम, जीएसटी अधिनियम और धन शोधन निवारण अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों को चुनौती दी गई है. सुनवाई 14 मई को जारी रहेगी, जब राजू जीएसटी प्रावधानों पर दलील पेश करेंगे.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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