भारतीय शेयर बाजार बढ़त के साथ खुला, सेंसेक्स 175 अंक चढ़ा, निवेशकों के लिए क्या है संकेत?

Stock Market : भारतीय शेयर बाजार सोमवार को बढ़त के साथ खुला. सेंसेक्स 175 अंक और निफ्टी 24,300 के ऊपर. जानिए बाजार में तेजी की वजह, किन सेक्टर्स पर रहेगी नजर और निवेशकों के लिए क्या हैं संकेत.
Stock Market : सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार ने सकारात्मक शुरुआत की. शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स करीब 177 अंक की बढ़त के साथ 77,940 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 50 भी 24,300 के ऊपर कारोबार करता दिखा.
एशियाई बाजारों से मिले मिले-जुले संकेतों के बावजूद घरेलू बाजार में खरीदारी का माहौल देखने को मिला. विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय बाजार फिलहाल “Buy on Dips” की रणनीति पर चल रहा है. यानी गिरावट आने पर निवेशक खरीदारी का अवसर तलाश रहे हैं.
एशियाई बाजारों का क्या रहा हाल?
एशिया के बाजारों में मिला-जुला रुख देखने को मिला.
बढ़त वाले बाजार.
- हैंग सेंग.
- शंघाई कंपोजिट.
- थाईलैंड SET इंडेक्स.
- GIFT Nifty.
गिरावट वाले बाजार.
- दक्षिण कोरिया का KOSPI.
- जापान का Nikkei 225.
- ताइवान वेटेड इंडेक्स.
- सिंगापुर Straits Times.
- जकार्ता कंपोजिट.
इससे संकेत मिलता है कि वैश्विक बाजारों में अभी भी निवेशकों का रुख पूरी तरह स्पष्ट नहीं है.
किन सेक्टर्स में दिख सकती है मजबूती?
बैंकिंग और बाजार विशेषज्ञ अजय बग्गा के अनुसार, भारतीय बाजार में गिरावट पर खरीदारी की रणनीति फिलहाल प्रभावी बनी हुई है. उनके अनुसार आने वाले समय में इन सेक्टर्स पर नजर रखी जा सकती है.
- बैंकिंग और फाइनेंशियल सर्विसेज.
- फार्मा.
- टेलीकॉम.
- रियल एस्टेट.
- डिफेंस.
यदि निफ्टी अपने प्रमुख तकनीकी प्रतिरोध स्तर को पार कर लेता है, तो बाजार में लंबी अवधि की तेजी देखने को मिल सकती है.
कमोडिटी बाजार में क्या हो रहा है?
शेयर बाजार में तेजी के बीच कमोडिटी बाजार में हल्की कमजोरी देखी गई.
- ब्रेंट क्रूड लगभग 71.74 डॉलर प्रति बैरल.
- WTI क्रूड लगभग 68.44 डॉलर प्रति बैरल.
- सोने की कीमत में भी मामूली गिरावट.
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि तेल और सोने की कीमतें आने वाले दिनों में वैश्विक घटनाओं के आधार पर तेजी से बदल सकती हैं.
OPEC+ का फैसला क्यों महत्वपूर्ण है?
सऊदी अरब और रूस समेत OPEC+ देशों ने उत्पादन को बढ़ाने का फैसला किया है. यदि आने वाले समय में तेल की सप्लाई बढ़ती है और वैश्विक शिपिंग सामान्य रहती है, तो कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव कम हो सकता है भारत जैसे तेल आयात करने वाले देशों के लिए यह सकारात्मक संकेत माना जाता है.
सोने की कीमतों पर क्या असर पड़ सकता है?
कमजोर अमेरिकी डॉलर और उम्मीद से कमजोर रोजगार आंकड़ों के बाद निवेशकों ने माना कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व इस साल ब्याज दरों में आक्रामक बढ़ोतरी नहीं करेगा. इससे सोने को कुछ समर्थन मिला है. हालांकि महंगाई अभी भी फेड के लक्ष्य से ऊपर बनी हुई है. इसलिए सोने की कीमतों में बहुत बड़ी तेजी की संभावना फिलहाल सीमित मानी जा रही है.
इस सप्ताह निवेशकों की नजर किन बातों पर रहेगी?
इस सप्ताह बाजार की दिशा तय करने में कई वैश्विक घटनाएं अहम भूमिका निभा सकती हैं.
- अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक के मिनट्स.
- अमेरिका के महंगाई से जुड़े आंकड़े.
- फेड अधिकारियों के बयान.
- कच्चे तेल की कीमतें.
- डॉलर इंडेक्स.
- विदेशी निवेशकों की गतिविधियां.
इन घटनाओं के चलते बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है.
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
यदि आप लंबी अवधि के निवेशक हैं, तो बाजार विशेषज्ञों के अनुसार मजबूत कंपनियों में गिरावट पर निवेश का अवसर मिल सकता है. वहीं शॉर्ट टर्म ट्रेडर्स को इस सप्ताह वैश्विक आर्थिक आंकड़ों और विदेशी बाजारों पर विशेष नजर रखनी चाहिए, क्योंकि इनके आधार पर बाजार में तेजी या मुनाफावसूली दोनों देखने को मिल सकती हैं.
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By Abhishek Pandey
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