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RIL AGM 2023: स्टेडियम से डिजिटल प्लेटफॉर्म तक, जानें कैसे धीरुभाई ने रिलायंस की बैठक बनी सबसे पॉपुलर इवेंट

Updated at : 28 Aug 2023 1:31 PM (IST)
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RIL AGM 2023: स्टेडियम से डिजिटल प्लेटफॉर्म तक, जानें कैसे धीरुभाई ने रिलायंस की बैठक बनी सबसे पॉपुलर इवेंट

Reliance AGM 2023: रिलायंस इंडस्ट्रीज की एजीएम में कंपनी के चेयरमैन मुकेश अंबानी (Mukesh Ambani) संबोधित करने वाले हैं. समझा जा रहा है कि इस बैठक में स्टेकहोल्डर्स और इन्वेस्टर्स को काफी महत्वपूर्ण जानकारियां मिलने वाली है.

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Reliance AGM 2023: रिलायंस इंडस्ट्रीज का एजीएम आज आयोजित किया जा रहा है. कंपनी के 46वीं आम बैठक का आयोजन ऑनलाइन किया जा रहा है. इसके निवेशक और आमलोग अपने घरों में बैठकर देख सकते हैं. रिलायंस इंडस्ट्रीज की एजीएम में कंपनी के चेयरमैन मुकेश अंबानी (Mukesh Ambani) संबोधित करने वाले हैं. समझा जा रहा है कि इस बैठक में स्टेकहोल्डर्स और इन्वेस्टर्स को काफी महत्वपूर्ण जानकारियां मिलने वाली है. निवेशकों को उम्मीद है कि बैठक में अंबानी टेलीकॉम और रिटेल बिजनेस के आईपीओ की समय सीमा से जुड़े कई घोषणाएं कर सकते हैं. इसके साथ ही, 5जी से लेकर ग्रीन एनर्जी तक कई बड़ी घोषणाओं की उम्मीद की जा रही है. इसे लेकर पूरा बाजार इंतजार कर रहा है. रिलायंस उन कंपनियों में शामिल है जिसकी चर्चा देश ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में है. इस कंपनी की स्थापना मुकेश अंबानी के पिता धीरूभाई के द्वारा किया गया था.

कौन थे धीरूभाई अंबानी

धीरुभाई अंबानी ऐसे भारतीय उद्योगपतियों की लिस्ट में शामिल हैं जिनकी कहानी प्रेरणा के लिए लोगों को सुनाई जाती है. उन्होंने अकेले अपने बल पर रिलायंस इंडस्ट्रीज वर्ष 1966 में खड़ा किया. धीरुभाई अंबानी का जन्म 28 दिसम्बर, 1932 को गुजरात के छोर्वड़ा गांव में हुआ था. उन्होंने भले ही, इन बड़ी कंपनी की स्थापना की. मगर, उनका शुरूआती जीवन काफी संघर्ष से भरा रहा. उनके परिवार में वित्तीय संकट के कारण उन्होंने शिक्षा की पूरी नहीं की, लेकिन उन्होंने व्यापारिक कौशल प्राप्त किए और उन्होंने अपने जीवन में व्यवसायिक सफलता हासिल की. धीरुभाई अंबानी को विभिन्न पुरस्कार और सम्मान से सम्मानित किया गया, जैसे कि पद्मभूषण और भारत रत्न. उनकी मृत्यु 6 जुलाई, 2002 को हुई. आज रिलायंस ग्रुप विभिन्न क्षेत्रों में कारोबार करता है जैसे कि पेट्रोलियम, नेचुरल गैस, पेट्रोकेमिकल्स, टेलीकॉम, रिटेल, जीवन बीमा, NBFC इत्यादि.

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धीरुभाई ने जीता निवेशकों का भरोसा

धीरूभाई अंबानी ने रिलायंस के माध्यम से एक निवेशक पंथ का निर्माण किया. साथ ही, उन्हें भारत में इक्विटी संस्कृति को लोकप्रिय बनाने का श्रेय दिया जाता है. समय के साथ, रिलायंस की निरंतर प्रगति को देखते हुए वह अपने शेयरधारकों को कभी निराश नहीं करने के लिए जाने जाते थे. 1977 में रिलायंस टेक्सटाइल इंडस्ट्रीज के आईपीओ ने निवेशकों के बीच नया इतिहास रच दिया. यह इश्यू सात गुना ओवरसब्सक्राइब हुआ था. उसके बाद, धीरूभाई एक निवेशक के प्रतीक बन गए, जो एक रॉक स्टार के उत्साह के साथ रिलायंस एजीएम में हजारों शेयरधारकों को संबोधित करते थे, वह रॉकस्टार जो गाने नहीं गाता था लेकिन लाभांश देता था. लोग स्टेडियम में जमीन पर बैठकर धीरुभाई को सुनने के लिए जमा होते थे.

पेट्रोल पंप पर किया काम

बिजनेस की दुनिया के आईकन कहे जाने वाले धीरूभाई अंबानी पहले धीरुभाई के पास न तो बड़ा नाम था, न पैसे और न ही सही राह दिखाने वाला कोई. उनके घर की आर्थिक स्थिति काफी खराब थी. इसलिए 1949 में वो अपने भाई रमणिकलाल के पास केवल 17 साल की उम्र में यमन चले गए. वहां उन्होंने ए बस्सी एंड कंपनी के एक पेट्रोल पंप पर नौकरी की. वहां हर महीने उन्हें तीन सौ रुपये मिलता था. उनके तेज दिमाग के कारण उन्हें जल्द ही, पेट्रोल पंप का मैनेजर बना दिया गया. करीब पांच साल वहां नौकरी करने के बाद वो 1954 में भारत आए. वापस आने के बाद धीरुभाई नौकरी नहीं करना चाहते थे. उन्हें अपने व्यापार करने का मन बना लिया. फिर, अपनी मेहनत और लगन से 62,000 करोड़ रुपये की संपत्ति के मालिक बन गए.

ऐसे हुई रिलायंस की शुरूआत

भारत आने के बाद धीरुभाई ने भारतीय बाजार के बारे में जानकारी जुटानी शुरू कर दी. उन्होंने पाया कि भारत में सबसे ज्यादा मांग पोलिस्टर की थी. जबकि, विदेशों में भारतीय मसालों की मांग थी. फिर, धीरुभाई ने अपने चचेरे भाई चंपकलाल दिमानी की मदद से रिलायंस कमर्शियल कॉरपोरेशन कंपनी बनाई. मुंबई में एक छोटे जगह पर एक मेज, तीन कुर्सी, एक टेलीफोन और दो सहयोगियों के साथ काम शुरू किया. कंपनी के माध्यम से विदेश में मसाला बेचा जाता और वहां से भारत पोलिस्टर लाया जाता. मसाले के निर्यात में मुनाफा होने के बाद उन्होंने अपने व्यापार को और बढ़ाने की कोशिश की. उन्होंने अपना ध्यान सिंथेटिक कपड़ों की ओर लगाया. इसके बाद 1966 में धीरुभाई ने रिलायंस टेक्सटाइल के नाम से गुजरात के अहमदाबाद में एक कपड़ा मिल की शुरुआत की. जिसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर कभी नहीं देखा.

धीरूभाई अंबानी के निधन के बाद बने कंपनी के चेयरमैन

अंबानी रिलायंस के निदेशक मंडल में 1977 से हैं और जुलाई, 2002 में अपने पिता और समूह के संस्थापक धीरूभाई अंबानी के निधन के बाद कंपनी के चेयरमैन बन गए थे. शेयरधारकों को भेजे गए विशेष प्रस्ताव में रिलायंस ने कहा कि उसके निदेशक मंडल ने 21 जुलाई, 2023 को मुकेश अंबानी को प्रबंध निदेशक के तौर पर आगे पांच साल के लिए नियुक्ति करने को मंजूरी दे दी है. प्रस्ताव में कहा गया कि अंबानी ने वित्त वर्ष 2008-09 से वित्त वर्ष 2019-20 तक अपना वार्षिक पारिश्रमिक 15 करोड़ रुपये तय किया था. इसके बाद वित्त वर्ष 2020-21 के बाद से उन्होंने कोविड-19 महामारी के कारण अपना वेतन छोड़ने का विकल्प चुना. वित्त वर्ष 2020-21 से लगातार तीन वर्षों तक उन्हें कोई वेतन और लाभ-आधारित कमीशन का भुगतान नहीं किया गया है. प्रस्ताव में कहा गया कि अंबानी के अनुरोध पर बोर्ड ने सिफारिश की है कि 19 अप्रैल, 2024 से 18 अप्रैल, 2029 तक प्रस्तावित अवधि के लिए उन्हें कोई वेतन या लाभ-आधारित कमीशन का भुगतान नहीं किया जाएगा.

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रिलायंस रिटेल ने बीते वित्त वर्ष में एक अरब लेनदेन का आंकड़ा किया पार

रिलायंस रिटेल ने वित्त वर्ष 2022-23 में एक अरब लेनदेन का आंकड़ा पार कर लिया। रिलायंस इंडस्ट्रीज की वार्षिक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई. वित्त वर्ष 2022-23 में रिलायंस रिटेल के डिजिटल कॉमर्स व नए कॉमर्स व्यवसायों ने इसके 2.60 लाख करोड़ रुपये के राजस्व में 18 प्रतिशत का योगदान दिया. कंपनी ने समीक्षाधीन अवधि में 3,300 नई दकुानें खोलीं। अब उसकी कुल 18,040 दुकानें हैं. रिलायंस इंडस्ट्रीज की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार कि वित्त वर्ष 2022-23 में कारोबार सालाना आधार पर 42 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ एक अरब के लेनदेन के आंकड़े को पार कर गया. दुकानों में 78 करोड़ से अधिक ग्राहक आए, जो सालाना आधार पर 50 प्रतिशत अधिक है.

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टाइमलाइन में रिलायंस इंडस्ट्रीज का सफर

1960s: रिलायंस का संवाद सरकारी उपकरणों के साथ बिजनेस शुरू हुआ, जिसमें विलियम्स सोल्वेंट और पेट्रोलियम रिफाइनरी का काम शामिल था.

1970s: दीरुभाई अंबानी के बेटे मुकेश अंबानी और आनिल अंबानी के साथ, रिलायंस ने पेट्रोलियम रिफाइनिंग में नये क्षेत्रों में विस्तार किया.

1980s: रिलायंस ने पेट्रोकेमिकल उत्पादन में भी कदम रखा और अन्य उद्योगों में विस्तार किया। 1986 में रिलायंस का पहला पब्लिक ऑफर (IPO) हुआ.

1990s: रिलायंस ने टेलीकॉम सेक्टर में प्रवेश किया और अपनी कंपनी “रिलायंस कम्युनिकेशन्स” की स्थापना की.

2000s: मुकेश अंबानी ने अनिल अंबानी के साथ विभाजन किया और रिलायंस इंडस्ट्रीज़ का संचालन मुकेश अंबानी के हाथ में आया। उन्होंने तब से ही विभिन्न क्षेत्रों में मजबूती के साथ काम किया, जैसे कि पेट्रोलियम, पेट्रोकेमिकल्स, रिटेल, जीवन बीमा आदि.

2010s: रिलायंस ने जिओ (Jio) नामक एक टेलीकॉम कंपनी की स्थापना की, जिसने भारतीय टेलीकॉम बाजार में क्रांतिकारी परिवर्तन किया। जिओ ने तेजी से बढ़ते हुए अपने सेवाएँ प्रदान की और दर्शकों को डिजिटल मनोरंजन की विभिन्न सेवाएं प्रदान की.

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