15.1 C
Ranchi
Thursday, February 29, 2024

BREAKING NEWS

Trending Tags:

ऑक्सफैम की रिपोर्ट: 13 साल में दुनिया के 5 अरब लोगों की संपत्ति घटी, 229 सालों तक दुनिया से नहीं मिटेगी गरीबी

Oxfam Inequality Report 2024: रिपोर्ट के अनुसार, साल 2020 में शीर्ष पांच अमीर व्यक्तियों की संयुक्त संपत्ति 405 बिलियन डॉलर से बढ़कर पिछले साल 869 बिलियन डॉलर हो गई है.

Oxfam Inequality Report 2024: दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की बैठक का आयोजन आज से किया जा रहा है. बैठक में, ऑक्सफैम की इकोनॉमिक सर्वे रिपोर्ट में बताया गया है कि पूरी दुनिया में आर्थिक असमानता तेजी से बढ़ी है. दुनिया के पांच सबसे अमीर व्यक्तियों की संयुक्त संपत्ति 13 वर्षों में दोगुनी बढ़ी है. जो चार साल में कई बड़े देश के जीडीपी ग्रोथ से ज्यादा है. रिपोर्ट के अनुसार, साल 2020 में शीर्ष पांच अमीर व्यक्तियों की संयुक्त संपत्ति 405 बिलियन डॉलर से बढ़कर पिछले साल 869 बिलियन डॉलर हो गई है. हालांकि, इस बीच में दुनिया के करीब पांच अरब लोगों की संपत्ति में गिरावट देखने को मिली है. ‘Inequality Inc.’ के नाम से पब्लिश इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 2020 के बाद से अरबपति सामूहिक रूप से 3.3 बिलियन डॉलर अधिक अमीर हो गए हैं. साथ ही, कोविड महामारी के बाद सहित व्यापक आर्थिक चुनौतियों के बीच धन एकाग्रता में वृद्धि की चिंताजनक प्रवृत्ति पर प्रकाश डालती है. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अगर हालात ऐसे रही तो जल्दी ही दुनिया को एक ट्रिलियन डॉलर की नेटवर्थ वाला पहला बिलेनियर मिल जाएगा. हालांकि, अगले 229 साल तक दुनिया से गरीबी नहीं मिटाई जा सकेगी.

Also Read: मुकेश अंबानी की बड़ी छलांग, 100 बिलियन क्लब में हुए शामिल, रिलायंस ग्रुप के शेयर में फिर दिखी तेजी

क्या कहते हैं ऑक्सफैम के अधिकारी

ऑक्सफैम इंटरनेशनल के कार्यकारी निदेशक अमिताभ बेहार ने कहा कि हम विभाजन के एक दशक की शुरुआत देख रहे हैं, जिसमें अरबों लोग महामारी, मुद्रास्फीति और युद्ध के आर्थिक झटकों का सामना कर रहे हैं. जबकि, अरबपतियों की किस्मत में उछाल आ रहा है. यह असमानता कोई दुर्घटना नहीं है. अरबपति वर्ग यह सुनिश्चित कर रहा है कि निगम बाकी सभी की कीमत पर उन्हें अधिक धन मुहैया कराएं. उन्होंने कहा कि ये यह अनुमान लगाया गया है कि 148 शीर्ष निगमों ने 1.8 ट्रिलियन डॉलर का मुनाफा कमाया, जो 3 साल के औसत से 52 प्रतिशत अधिक है, जिससे शेयरधारकों को भारी भुगतान की अनुमति मिली. जबकि लाखों श्रमिकों को जीवनयापन संकट का सामना करना पड़ा क्योंकि मुद्रास्फीति के कारण वास्तविक रूप से वेतन में कटौती हुई. रिपोर्ट में टेस्ला के सीईओ एलन मस्क, एलवीएमएच के प्रमुख बर्नार्ड अरनॉल्ट, अमेजॉन के जेफ बेजोस, ओरेकल के सह-संस्थापक लैरी एलिसन और निवेशक वॉरेन बफेट जैसे व्यक्तियों की महत्वपूर्ण संपत्ति वृद्धि पर प्रकाश डाला गया है. इसके विपरीत, दुनिया के 1,600 सबसे बड़े कॉर्परेशन में से केवल 0.4% ने श्रमिकों को जीवित वेतन देने और अपनी संपूर्ण मूल्य श्रृंखला में इसका समर्थन करने के लिए प्रतिबद्ध किया है.

मुद्रास्फीति का वेतन स्थिरता पर प्रभाव

रिपोर्ट में मुद्रास्फीति और वेतन स्थिरता के अनुपातहीन प्रभाव के बारे में भी चर्चा की गयी है. इसके बारे में कहा गया है कि दुनिया भर में लगभग 800 मिलियन श्रमिकों के वास्तविक वेतन में गिरावट का अनुभव करना पड़ा है. ये नुकसान, प्रति कर्मचारी 25 दिनों की वार्षिक आय के औसत नुकसान के बराबर है. इसके बावजूद, शीर्ष 148 कॉर्पोरेशन के मुनाफे में तीन साल के औसत से 52 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है, जिससे शेयरधारकों को पर्याप्त भुगतान मिला है.

रिपोर्ट में बताया गया समाधान

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में पेश की गयी ऑक्सफैम इंटरनेशनल की रिपोर्ट में समस्या के साथ उसके समाधान पर भी बात की गयी है. ऑक्सफैम करोड़पतियों और अरबपतियों पर संपत्ति कर लागू करने की वकालत करता है, जो संभावित रूप से सालाना 1.8 ट्रिलियन डॉलर उत्पन्न कर सकता है. इसके अतिरिक्त, चैरिटी सीईओ के वेतन की सीमा तय करने और निजी एकाधिकार को खत्म करने का आह्वान करती है. रिपोर्ट में एकाधिकार को तोड़ने, अतिरिक्त लाभ और धन पर कर लगाने और कर्मचारी स्वामित्व जैसे शेयरधारक नियंत्रण के विकल्प तलाशने के चैरिटी के प्रस्ताव को शामिल किया गया है.

You May Like

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

अन्य खबरें