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वन नेशन-वन राशन के ड्रीम प्रोजेक्ट को अमलीजामा पहनाने में रामविलास पासवान ने निभाई अहम भूमिका

By Prabhat Khabar Digital Desk
Updated Date
नहीं रहे गरीबों के मसीहा रामविलास.
नहीं रहे गरीबों के मसीहा रामविलास.
फाइल फोटो.

One Nation One Ration Dream Project : केंद्रीय खाद्य आपूर्ति मंत्री रामविलास पासवान का गुरुवार को निधन हो गया. उनके बेटे चिराग पासवान ने ट्वीट के जरिए यह जानकारी दी. लोक जनशक्ति पार्टी के 74 वर्षीय संरक्षक पासवान का कुछ दिन पहले एक अस्पताल में हृदय का ऑपरेशन हुआ था. वह पांच दशक से अधिक समय से सक्रिय राजनीति में थे और देश के जाने-माने दलित नेताओं में से एक थे.

मोदी सरकार में पासवान को उपभोक्ता, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मामलों के मंत्री की जिम्मेदारी दी गयी थी. अपने मंत्रालय की जिम्मेदारी संभालते हुए उन्होंने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत 'राशन कार्ड पोर्टेबिलिटी' या 'वन नेशन-वन राशन कार्ड योजना' को अमलीजामा पहनाने में अहम भूमिका निभाई. वन नेशन-वन राशन कार्ड योजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में से एक है.

क्या है वन नेशन वन राशन कार्ड योजना

वन नेशन-वन राशन कार्ड योजना के तहत किसी भी क्षेत्र के नागरिक नए राशन कार्ड के माध्यम से देश के किसी भी राज्य से पीडीएस राशन की दुकान से रियायती दरों राशन प्राप्त कर सकते हैं. केंद्रीय खाद्य मंत्री और सार्वजनिक वितरण मंत्री रामविलास पासवान ने इस योजना को लेकर कहा था कि इस योजना के तहत देश के लोग किसी भी राज्य की पीडीएस की दुकान से अपने हिस्से का राशन लेने में पूरी तरह से स्वतंत्र होंगे. इस नए तरीके के राशन कार्ड से देश के हर एक नागरिक को राहत पहुंचाएगी.

देश के 67 करोड़ लोगों को होगा लाभ

इस वन नेशन वन राशन कार्ड योजना के अंतर्गत देश के 23 राज्यों को 67 करोड़ लोगों को फायदा मिलेगा. पीडीएस योजना के 83 फीसदी लाभार्थी इससे जोड़े जाएंगे. इस योजना के तहत मार्च 2021 तक इसमें 100 फीसदी लाभार्थी जुड़ जाएंगे. देश के नागरिक देश के किसी भी कोने से अपने राशन कार्ड के माध्यम से उचित मूल्य पर राशन की दुकान से अनाज ले सकते हैं.

1 अक्टूबर से मिलने लगी मनमाफिक राशन दुकानों से खाद्यान्न प्राप्त करने की सुविधा

सार्वजनिक वितरण प्रणाली-पीडीएस के लाभार्थी 01 अक्टूबर 2020 से अपनी इच्छानुसार पीडीएस की दुकान से सस्ते मूल्य पर सब्सिडी वाले खाद्यान प्राप्त करने लगे हैं. वन नेशन वन राशन कार्ड का लाभ राशन कार्ड रखने वाले प्राय: सभी नागरिकों को मिलने लगा है. राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के मुताबिक, देश के 81 करोड़ लोग जन वितरण प्रणाली (पीडीएस) के जरिए राशन की दुकान से 3 रुपए प्रति किलोग्राम की दर से चावल और 2 रुपए प्रति किलो की दर से गेहूं और एक रुपए प्रति किलोग्राम की दर से मोटा अनाज खरीद सकते हैं.

कोरोना फैलने से पहले पासवान ने वन नेशन वन राशन कार्ड योजना की दी थी जानकारी

देश में कोरोना संक्रमण को महामारी बनकर उभरने से पहले इसी साल 21 जनवरी को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में रामविलास पासवान ने वन नेशन वन राशन कार्ड योजना के बारे में जानकारी दी थी. उन्होंने कहा था कि इस योजना के तहत उपभोक्ता एक ही राशन कार्ड का इस्तेमाल देश में कहीं भी कर सकेंगे.

2019 में पासवान ने चार राज्यों में लागू कराया था पायलट प्रोजेक्ट

इससे पहले पिछले साल केंद्रीय मंत्री ने 'वन नेशन, वन राशन कार्ड' योजना का पायलट प्रॉजेक्ट चार राज्यों में लागू किया था. इसके तहत आंध्रप्रदेश, तेलंगाना और गुजरात, महाराष्ट्र के बीच कार्ड पोर्टेबिलिटी की सुविधा दी गई थी, जिसका उद्घाटन पासवान ने ऑनलाइन किया था. तब उन्होंने कहा था कि पायलट प्रॉजेक्ट के सफल रहने पर इसे पूरे देश में लागू किया जाएगा. इस योजना के तहत राशन कार्ड पूरे देश में मान्य हो जाएंगे.

भ्रष्टाचार पर लगेगी लगाम

तब केंद्रीय मंत्री ने ऐलान किया था कि इस साल की पहली जून से वह इस योजना को देशभर में लागू करेंगे. इससे किसी भी राज्य का राशन कार्डधारक किसी भी अन्य राज्य में राशन की दुकानों से सस्ती कीमतों में चावल और गेहूं खरीद सकेगा. सरकार को उम्मीद है कि इससे ना केवल भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगा, बल्कि रोजगार या अन्य वजहों से एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने वाले गरीबों को सब्सिडी वाले राशन से वंचित नहीं होना पड़ेगा. इस बदलाव से एक से अधिक कार्ड रखने की संभावना भी खत्म हो जाएगी.

लॉकडाउन के दौरान गरीबों का जीवन रक्षक बनी योजना

देश में कोरोना वायरस संक्रमण के बढ़ते मामलों के बाद जब पूरी तरह लॉकडाउन लगा दिया गया, तब गरीबों के सामने खाने के लाले पड़ने लगे. किसी के घर में अनाज है, तो किसी के घर में नहीं. ऐसे संकट की घड़ी में वन नेशन वन राशन कार्ड योजना लोगों के लिए मसीहा बनकर उभरी और इसी योजना के तहत सरकार ने गरीबों को फ्री में राशन देना शुरू कर दिया. महीने में गरीब परिवार के हर सदस्य को पांच किलो चावल, पांच किलो गेहूं और दो किलो दाल फ्री में मिलने लगे. लॉकडाउन के दौरान गरीबों को फ्री में भोजन उपलब्ध कराने के लिए राज्यों की ओर से कोताही बरते जाने पर कई दफा रामविलास पासवान ने सार्वजनिक तौर पर कहा कि राज्य अपने हिस्से के खाद्यान्न और दाल का उठाव नहीं कर रहे हैं, उन्हें समय से उठाव कर लेना चाहिए.

छठ तक वन नेशन वन राशन कार्ड योजना के तहत मिलेगा फ्री में अनाज

यह केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान का गरीबों के प्रति प्रेम का ही नतीजा है कि देश में कोरोना महामारी फैलने के बाद लागू लॉकडाउन में तो उन्होंने गरीबों को फ्री में खाद्यान्न की व्यवस्था कर दी, लेकिन उन्हें इस बात का इल्म पहले से ही था कि लॉकडाउन जैसे ही समाप्त होगा देश में धनरोपनी शुरू हो जाएगी. मॉनसून में गरीबों को आमतौर पर आमदनी नहीं होती है. जब तक धान रोपने का काम चलता है, तभी तक पेट भरता है.

उसके बाद उन्हें संभ्रांत किसानों की देहरी पर बाट जोहना पड़ता है या फिर कर्ज लेकर काम चलाना पड़ता है. इस कोरोना महामारी के दौर में पासवान ने लॉकडाउन के दौरान गरीबों को भरपेट भोजन तो उपलब्ध करवाया ही, लेकिन उसके बाद भी उन्होंने 30 नवंबर यानी छठ तक फ्री में भोजन की व्यवस्था कर दी. वजह ये कि उन्हें यह पता था कि अक्सरहां, धान की कटनी छठ के बाद ही होती है और गरीबों को भरपेट भोजन तभी मिलता है, जब धनकटनी शुरू हो जाती है. इसीलिए उन्होंने वन नेशन वन राशन कार्ड योजना के तहत ही छठ तक देश के 80 करोड़ लोगों को फ्री में राशन उपलब्ध कराने का इंतजाम कर दिया, जिसका ऐलान पीएम मोदी ने 1 जून से पहले ही कर दिया था.

Posted By : Vishwat Sen

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