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LPG Price: 15 महीने से सस्ता गैस बेच रहीं कंपनियां घाटे में, सरकार देगी अरबों की मदद

Updated at : 10 Jul 2025 2:12 PM (IST)
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LPG Price: पिछले 15 महीनों से घरेलू एलपीजी को लागत से कम कीमत पर बेच रही तेल कंपनियां भारी घाटे में हैं. सरकार इन कंपनियों को राहत देने के लिए 30,000 से 35,000 करोड़ रुपये तक की सब्सिडी देने पर विचार कर रही है. निर्णय जल्द संभव है.

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LPG Price: केंद्र सरकार घरेलू एलपीजी सिलेंडर की लागत से कम कीमत पर बिक्री से हुए नुकसान की भरपाई के लिए सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों को बड़ी राहत देने की तैयारी में है. सरकारी सूत्रों के अनुसार, इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) को 30,000 से 35,000 करोड़ रुपये तक की सब्सिडी दिए जाने की संभावना है.

एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया कि वित्त मंत्रालय इस समय तेल कंपनियों को हुए वास्तविक घाटे और उसकी भरपाई के लिए उपयुक्त व्यवस्था पर काम कर रहा है. हालांकि, वित्त वर्ष 2025–26 के बजट में इस घाटे की भरपाई के लिए कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं किया गया है.

लेकिन सरकार अप्रैल में पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क बढ़ाकर करीब 32,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व पहले ही जुटा चुकी है. इस राजस्व का उपयोग एलपीजी से हुए घाटे की भरपाई में किया जा सकता है. अधिकारी के अनुसार, “तेल विपणन कंपनियां सरकार का ही हिस्सा हैं. नुकसान की भरपाई की जाएगी. इस पर मूल्यांकन जारी है कि कुल नुकसान कितना हुआ और इसे किस तंत्र से पूरा किया जाए.”

नियंत्रित कीमतों की वजह से नुकसान

भारत में घरेलू रसोई गैस (LPG) की कीमतें सरकार द्वारा नियंत्रित होती हैं ताकि आम जनता को अंतरराष्ट्रीय बाजार की महंगाई से राहत दी जा सके. लेकिन देश में रसोई गैस का उत्पादन स्थानीय मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है, जिसके कारण एलपीजी का आयात करना पड़ता है. यह आयात सऊदी अरब की कीमतों (Saudi CP) के आधार पर होता है, जो वैश्विक मानक हैं.

इसका परिणाम यह होता है कि तेल कंपनियों को लागत से कम दर पर घरेलू एलपीजी बेचनी पड़ती है, जिससे उन्हें बड़ा नुकसान उठाना पड़ता है.

2024-25 में 40,500 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान

वित्त वर्ष 2024–25 के लिए अनुमान लगाया गया है कि तेल कंपनियों को एलपीजी की बिक्री से लगभग 40,500 करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है. इस घाटे की भरपाई के लिए सरकार अब राहत पैकेज पर गंभीरता से विचार कर रही है.

एक बार जब यह सब्सिडी जारी हो जाती है, तो तेल कंपनियों को यह स्वतंत्रता होगी कि वे इस राशि का उपयोग पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) या अन्य व्यावसायिक आवश्यकताओं में किस प्रकार करें.

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Abhishek Pandey

लेखक के बारे में

By Abhishek Pandey

अभिषेक पाण्डेय पिछले 2 वर्षों से प्रभात खबर (Prabhat Khabar) में डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने पत्रकारिता के प्रतिष्ठित संस्थान 'दादा माखनलाल की बगिया' यानी माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल (MCU) से मीडिया की बारीकियां सीखीं और अपनी शैक्षणिक योग्यता पूरी की है। अभिषेक को वित्तीय जगत (Financial Sector) और बाजार की गहरी समझ है। वे नियमित रूप से स्टॉक मार्केट (Stock Market), पर्सनल फाइनेंस, बजट और बैंकिंग जैसे जटिल विषयों पर गहन शोध के साथ विश्लेषणात्मक लेख लिखते हैं। इसके अतिरिक्त, इंडस्ट्री न्यूज, MSME सेक्टर, एग्रीकल्चर (कृषि) और केंद्र व राज्य सरकार की सरकारी योजनाओं (Sarkari Yojana) का प्रभावी विश्लेषण उनके लेखन के मुख्य क्षेत्र हैं। आम जनमानस से जुड़ी यूटिलिटी (Utility) खबरों और प्रेरणादायक सक्सेस स्टोरीज को पाठकों तक पहुँचाने में उनकी विशेष रुचि है। तथ्यों की सटीकता और सरल भाषा अभिषेक के लेखन की पहचान है, जिसका उद्देश्य पाठकों को हर महत्वपूर्ण बदलाव के प्रति जागरूक और सशक्त बनाना है।

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