घट गयी झारखंड समेत इन राज्यों के अन्नदाता की कमाई, उस पर महंगाई ने पीड़ा बढ़ायी

गांवों में मजदूरी महंगाई के हिसाब से नहीं बढ़ रही है. इसीलिए नीतिगत स्तर पर हस्तक्षेप की जरूरत है. रिपोर्ट में कहा गया है, ‘महंगाई बढ़ने से, गांवों में वास्तविक मजदूरी घटी है और मांग सुस्त हुई है. ऐसे में सरकार और नीति निर्माताओं के लिए जरूरी है कि वे ग्रामीण क्षेत्रों में समर्थन देना जारी रखें.’
झारखंड समेत देश के कई राज्यों में किसानों की आय में गिरावट आयी है. दूसरी तरफ, गांवों में श्रमिकों की मजदूरी भी नहीं बढ़ रही है. इसलिए ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों की मदद के लिए नीतिगत समर्थन जारी रखने की सिफारिश की गयी है. साख के बारे में सूचना देने वाली कंपनी क्रिफ हाई मार्क की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि गांवों में मजदूरी में वृद्धि की दर बढ़ती महंगाई की तुलना में कम है. इसलिए सरकार को छोटे कस्बों तथा ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों की मदद के लिए नीतिगत समर्थन जारी रखना चाहिए.
क्रिफ हाई मार्क ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि गांवों में मजदूरी महंगाई के हिसाब से नहीं बढ़ रही है. इसीलिए नीतिगत स्तर पर हस्तक्षेप की जरूरत है. रिपोर्ट में कहा गया है, ‘महंगाई बढ़ने से, गांवों में वास्तविक मजदूरी घटी है और मांग सुस्त हुई है. ऐसे में सरकार और नीति निर्माताओं के लिए जरूरी है कि वे ग्रामीण क्षेत्रों में समर्थन देना जारी रखें.’
रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2022 की पहली छमाही में ग्रामीण मुद्रास्फीति शहरों की महंगाई की तुलना में अधिक रही. गांवों में खपत कम हुई, जबकि औसत ग्रामीण बेरोजगारी घटी. वृहत आर्थिक सूचकांक, क्रेडिट ब्यूरो का आंकड़ा और ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने वाली कंपनियों के सर्वे से मिली जानकारी के अनुसार, गांवों में व्यापार विश्वास सूचकांक वर्ष 2022 में 10 अंक बढ़कर 73.5 रहा.
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क्रिफ हाई मार्क की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सरकार ने महामारी से प्रभावित छोटे कारोबारियों और अन्य क्षेत्रों को राहत और कर्ज उपलब्ध कराने पर ध्यान केंद्रित किया है. इससे ग्रामीण क्षेत्र में विभिन्न उद्योगों में वृहत आर्थिक परिदृश्य सकारात्मक हुआ है. बता दें कि संसदीय समिति की एक रिपोर्ट हाल ही में आयी है, जिसमें बताया गया है कि झारखंड समेत 5 राज्यों के किसानों की कमाई में 50 फीसदी तक की कमी आयी है.
यहां बताना प्रासंगिक होगा कि सरकारें किसानों की आय डबल करने पर जोर दे रही हैं, जबकि हकीकत इससे अलग है. झारखंड में किसानों की आय में 4 साल में 30.7 फीसदी की गिरावट दर्ज की गयी है. वर्ष 2015-16 में 7,068 रुपये कमाते थे, जो वर्ष 2018-19 में घटकर 4,895 रुपये रह गयी. इस तरह चार साल में यहां के किसानों की आय 2,173 रुपये घट गयी. संसदीय समिति की 46वीं रिपोर्ट से यह खुलासा हुआ.
संसदीय समिति की रिपोर्ट में झारखंड इकलौता राज्य नहीं है, जहां किसानों की आय में कमी आयी है. पड़ोसी राज्य ओड़िशा के अलावा मध्य प्रदेश और नगालैंड के किसानों की भी कमाई इस दौरान घटी है. हालांकि, किसानों की कमाई अगर सबसे ज्यादा कहीं घटी है, तो वह प्रदेश है झारखंड.
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By Mithilesh Jha
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