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घट गयी झारखंड समेत इन राज्यों के अन्नदाता की कमाई, उस पर महंगाई ने पीड़ा बढ़ायी

Updated at : 16 Feb 2023 5:43 PM (IST)
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घट गयी झारखंड समेत इन राज्यों के अन्नदाता की कमाई, उस पर महंगाई ने पीड़ा बढ़ायी

गांवों में मजदूरी महंगाई के हिसाब से नहीं बढ़ रही है. इसीलिए नीतिगत स्तर पर हस्तक्षेप की जरूरत है. रिपोर्ट में कहा गया है, ‘महंगाई बढ़ने से, गांवों में वास्तविक मजदूरी घटी है और मांग सुस्त हुई है. ऐसे में सरकार और नीति निर्माताओं के लिए जरूरी है कि वे ग्रामीण क्षेत्रों में समर्थन देना जारी रखें.’

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झारखंड समेत देश के कई राज्यों में किसानों की आय में गिरावट आयी है. दूसरी तरफ, गांवों में श्रमिकों की मजदूरी भी नहीं बढ़ रही है. इसलिए ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों की मदद के लिए नीतिगत समर्थन जारी रखने की सिफारिश की गयी है. साख के बारे में सूचना देने वाली कंपनी क्रिफ हाई मार्क की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि गांवों में मजदूरी में वृद्धि की दर बढ़ती महंगाई की तुलना में कम है. इसलिए सरकार को छोटे कस्बों तथा ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों की मदद के लिए नीतिगत समर्थन जारी रखना चाहिए.

महंगाई के हिसाब से नहीं बढ़ रही मजदूरी

क्रिफ हाई मार्क ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि गांवों में मजदूरी महंगाई के हिसाब से नहीं बढ़ रही है. इसीलिए नीतिगत स्तर पर हस्तक्षेप की जरूरत है. रिपोर्ट में कहा गया है, ‘महंगाई बढ़ने से, गांवों में वास्तविक मजदूरी घटी है और मांग सुस्त हुई है. ऐसे में सरकार और नीति निर्माताओं के लिए जरूरी है कि वे ग्रामीण क्षेत्रों में समर्थन देना जारी रखें.’

गांवों में व्यापार विश्वास सूचकांक 10 अंक बढ़ा

रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2022 की पहली छमाही में ग्रामीण मुद्रास्फीति शहरों की महंगाई की तुलना में अधिक रही. गांवों में खपत कम हुई, जबकि औसत ग्रामीण बेरोजगारी घटी. वृहत आर्थिक सूचकांक, क्रेडिट ब्यूरो का आंकड़ा और ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने वाली कंपनियों के सर्वे से मिली जानकारी के अनुसार, गांवों में व्यापार विश्वास सूचकांक वर्ष 2022 में 10 अंक बढ़कर 73.5 रहा.

Also Read: झारखंड के किसानों की आय में आयी 30.7 फीसदी की गिरावट, संसदीय समिति की रिपोर्ट से खुलासा
सरकार ने छोटे कारोबारियों की मदद की

क्रिफ हाई मार्क की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सरकार ने महामारी से प्रभावित छोटे कारोबारियों और अन्य क्षेत्रों को राहत और कर्ज उपलब्ध कराने पर ध्यान केंद्रित किया है. इससे ग्रामीण क्षेत्र में विभिन्न उद्योगों में वृहत आर्थिक परिदृश्य सकारात्मक हुआ है. बता दें कि संसदीय समिति की एक रिपोर्ट हाल ही में आयी है, जिसमें बताया गया है कि झारखंड समेत 5 राज्यों के किसानों की कमाई में 50 फीसदी तक की कमी आयी है.

झारखंड के किसानों की कमाई 7068 रुपये से घटकर 4895 रुपये

यहां बताना प्रासंगिक होगा कि सरकारें किसानों की आय डबल करने पर जोर दे रही हैं, जबकि हकीकत इससे अलग है. झारखंड में किसानों की आय में 4 साल में 30.7 फीसदी की गिरावट दर्ज की गयी है. वर्ष 2015-16 में 7,068 रुपये कमाते थे, जो वर्ष 2018-19 में घटकर 4,895 रुपये रह गयी. इस तरह चार साल में यहां के किसानों की आय 2,173 रुपये घट गयी. संसदीय समिति की 46वीं रिपोर्ट से यह खुलासा हुआ.

इन राज्यों में भी घटी है किसानों की कमाई

संसदीय समिति की रिपोर्ट में झारखंड इकलौता राज्य नहीं है, जहां किसानों की आय में कमी आयी है. पड़ोसी राज्य ओड़िशा के अलावा मध्य प्रदेश और नगालैंड के किसानों की भी कमाई इस दौरान घटी है. हालांकि, किसानों की कमाई अगर सबसे ज्यादा कहीं घटी है, तो वह प्रदेश है झारखंड.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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