India us trade deal: खेती और डेयरी पर कोई समझौता नहीं, पुराने रुख पर कायम रहेगा भारत

India us trade deal: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा 2 फरवरी को 'ट्रुथ सोशल' पर दिए गए बयान के बाद से ही दोनों देशों के वार्ताकार सक्रिय हैं. ट्रम्प ने दावा किया था कि यह समझौता 2025 के मध्य से लागू 'पारस्परिक शुल्क' (Reciprocal Tariffs) को काफी हद तक कम कर देगा.
India us trade deal: अमेरिका के साथ होने वाले ऐतिहासिक व्यापार समझौते की सुगबुगाहट के बीच, भारत सरकार ने एक बार फिर अपना स्टैंड साफ कर दिया है. आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, भारत अपनी लंबी अवधि की नीति पर कायम रहते हुए कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को विदेशी बाजार पहुंच (Market Access) से बाहर रख सकता है.
संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा सर्वोपरि
एक सरकारी अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि व्यापार वार्ता में भारत का जो रुख पहले था, वही अब भी बना हुआ है. भारत के लिए खेती और डेयरी केवल व्यापार नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आजीविका का साधन है. यही कारण है कि भारत ने हाल ही में ब्रिटेन (UK), न्यूजीलैंड और यूरोपीय संघ (EU) के साथ हुई व्यापार वार्ताओं में भी इन क्षेत्रों को किसी भी बड़ी रियायत से दूर रखा था.
समझौते की वर्तमान स्थिति
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा 2 फरवरी को ‘ट्रुथ सोशल’ पर दिए गए बयान के बाद से ही दोनों देशों के वार्ताकार सक्रिय हैं. ट्रम्प ने दावा किया था कि यह समझौता 2025 के मध्य से लागू ‘पारस्परिक शुल्क’ (Reciprocal Tariffs) को काफी हद तक कम कर देगा.
- दस्तावेजीकरण जारी: वर्तमान में दोनों देशों के अधिकारी समझौते के कानूनी दस्तावेजों और तकनीकी पहलुओं पर चर्चा कर रहे हैं.
- BTA का सस्पेंस: अभी यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं है कि यह डील पूर्ण ‘द्विपक्षीय व्यापार समझौते’ (Bilateral Trade Agreement – BTA) का हिस्सा है या यह केवल पहले चरण (Tranche) की एक सीमित डील है. बता दें कि दोनों देशों ने फरवरी 2025 में पूर्ण बीटीए (BTA) के लिए बातचीत शुरू करने का निर्णय लिया था.
क्या बदलेगा और क्या नहीं?
| श्रेणी | संभावित स्थिति |
| औद्योगिक सामान | टैरिफ में भारी कटौती की संभावना। |
| कृषि उत्पाद | भारत के कड़े रुख के कारण रियायतें मिलना मुश्किल। |
| डेयरी क्षेत्र | घरेलू किसानों के हितों की रक्षा के लिए बाजार खोलना चुनौतीपूर्ण। |
| Reciprocal Tariffs | 50% से घटकर 18% होने की उम्मीद। |
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लेखक के बारे में
By Abhishek Pandey
अभिषेक पाण्डेय पिछले 2 वर्षों से प्रभात खबर (Prabhat Khabar) में डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने पत्रकारिता के प्रतिष्ठित संस्थान 'दादा माखनलाल की बगिया' यानी माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल (MCU) से मीडिया की बारीकियां सीखीं और अपनी शैक्षणिक योग्यता पूरी की है। अभिषेक को वित्तीय जगत (Financial Sector) और बाजार की गहरी समझ है। वे नियमित रूप से स्टॉक मार्केट (Stock Market), पर्सनल फाइनेंस, बजट और बैंकिंग जैसे जटिल विषयों पर गहन शोध के साथ विश्लेषणात्मक लेख लिखते हैं। इसके अतिरिक्त, इंडस्ट्री न्यूज, MSME सेक्टर, एग्रीकल्चर (कृषि) और केंद्र व राज्य सरकार की सरकारी योजनाओं (Sarkari Yojana) का प्रभावी विश्लेषण उनके लेखन के मुख्य क्षेत्र हैं। आम जनमानस से जुड़ी यूटिलिटी (Utility) खबरों और प्रेरणादायक सक्सेस स्टोरीज को पाठकों तक पहुँचाने में उनकी विशेष रुचि है। तथ्यों की सटीकता और सरल भाषा अभिषेक के लेखन की पहचान है, जिसका उद्देश्य पाठकों को हर महत्वपूर्ण बदलाव के प्रति जागरूक और सशक्त बनाना है।
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