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H1B Visa फीस बढ़ने से भारतीय IT पेशेवरों का अमेरिका जाने का सपना प्रभावित, कंपनियों की हायरिंग और करियर विकल्प बदले

Updated at : 27 Sep 2025 12:47 PM (IST)
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US President Donald Trump

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H1B Visa फीस में भारी बढ़ोतरी भारतीय IT पेशेवरों और कंपनियों के लिए चुनौती बन रही है. 1 अक्टूबर से लागू नई फीस से अमेरिका जाने के सपने प्रभावित होंगे, कई टैलेंट अब भारत में करियर बनाने की ओर आकर्षित हो रहे हैं.

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H1B Visa: अमेरिकी प्रशासन की H1B वीजा फीस बढ़ाने की घोषणा के बाद भारतीय IT पेशेवरों और कंपनियों में चिंता बढ़ गई है. VDart ग्रुप के सीईओ और फाउंडर सिद्द अहमद ने ANI से बातचीत में कहा कि बढ़ती लागत न केवल कंपनियों के लिए टैलेंट हायर करना कठिन बना रही है, बल्कि भारतीय पेशेवरों की अमेरिका में करियर बनाने की आकांक्षाओं को भी बदल रही है.

अमेरिका जाने के सपनों पर असर

सिद्द अहमद ने कहा, “इसका असर उन 65,000 लोगों पर भी पड़ता है, जिन्होंने अमेरिका जाकर अपना करियर बनाने का सपना देखा था. अब यह सपना भारत में ही पूरा हो रहा है, क्योंकि कई ग्लोबल कैपिटल ग्रुप्स (GCCs) भारत में आ रहे हैं. वास्तव में, बहुत से टैलेंट अब भारत लौटकर यहां जॉब करने में रुचि ले रहे हैं.” अहमद ने बताया कि H1B प्रोग्राम शुरू में कंपनियों के लिए महज कुछ सौ डॉलर का था. “1990 के दशक में, जब मैंने रिक्रूटिंग शुरू की थी, उस समय H1B की फीस लगभग 110 डॉलर थी. उस समय यह प्रोग्राम मुख्य रूप से जूनियर-लेवल टैलेंट को अमेरिका लाने के लिए था.”

हालांकि,आईटी कौशल की बढ़ती मांग ने अमेरिका में हायरिंग की प्रक्रिया को बदल दिया. भारतीय सिस्टम इंटीग्रेटर्स ने अमेरिका में अपनी उपस्थिति बढ़ाई और ऑफशोरिंग का चलन तेजी से बढ़ा. अहमद ने कहा, “जूनियर-लेवल टैलेंट अमेरिका लाने से मिड-लेवल पेशेवरों के लिए चुनौती पैदा हुई, क्योंकि भारतीय वर्कफोर्स कई जॉब्स संभाल रही थी.”

फीस बढ़कर हजारों डॉलर तक

समय के साथ, अमेरिकी नागरिकता और इमिग्रेशन सर्विसेज (USCIS) ने H1B फीस लगातार बढ़ाई. अहमद के अनुसार, “1990 के दशक में 110 डॉलर थी, जो अब लगभग 5,000 से 7,500 डॉलर तक पहुंच गई है.”

ट्रंप प्रशासन की नई घोषणा

पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप के प्रशासन ने H1B वीज़ा पर भारी वृद्धि की घोषणा की थी, जिसमें वार्षिक 100,000 डॉलर शुल्क शामिल है. यह फीस मौजूदा H1B प्रोसेसिंग लागत (कुछ हजार डॉलर) से बहुत अधिक है. इसके अलावा, कंपनियों को अब इस शुल्क के अलावा और वेरिफिकेशन चार्ज भी देना होगा. प्रशासन अभी तय कर रहा है कि पूरी राशि एक बार में ली जाएगी या वार्षिक आधार पर. अहमद ने कहा कि इससे अमेरिकी कंपनियों के लिए विदेशी कुशल श्रमिकों को हायर करना और महंगा और कठिन हो जाएगा, खासकर भारतीय IT पेशेवरों के लिए, जो H1B प्रोग्राम के सबसे बड़े लाभार्थी हैं.

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Abhishek Pandey

लेखक के बारे में

By Abhishek Pandey

अभिषेक पाण्डेय पिछले 2 वर्षों से प्रभात खबर (Prabhat Khabar) में डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने पत्रकारिता के प्रतिष्ठित संस्थान 'दादा माखनलाल की बगिया' यानी माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल (MCU) से मीडिया की बारीकियां सीखीं और अपनी शैक्षणिक योग्यता पूरी की है। अभिषेक को वित्तीय जगत (Financial Sector) और बाजार की गहरी समझ है। वे नियमित रूप से स्टॉक मार्केट (Stock Market), पर्सनल फाइनेंस, बजट और बैंकिंग जैसे जटिल विषयों पर गहन शोध के साथ विश्लेषणात्मक लेख लिखते हैं। इसके अतिरिक्त, इंडस्ट्री न्यूज, MSME सेक्टर, एग्रीकल्चर (कृषि) और केंद्र व राज्य सरकार की सरकारी योजनाओं (Sarkari Yojana) का प्रभावी विश्लेषण उनके लेखन के मुख्य क्षेत्र हैं। आम जनमानस से जुड़ी यूटिलिटी (Utility) खबरों और प्रेरणादायक सक्सेस स्टोरीज को पाठकों तक पहुँचाने में उनकी विशेष रुचि है। तथ्यों की सटीकता और सरल भाषा अभिषेक के लेखन की पहचान है, जिसका उद्देश्य पाठकों को हर महत्वपूर्ण बदलाव के प्रति जागरूक और सशक्त बनाना है।

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