कपास पर 11% आयात शुल्क हटाने की तैयारी में सरकार, कपड़ा उद्योग को मिल सकती है बड़ी राहत
Published by : Abhishek Pandey Updated At : 24 May 2026 12:24 PM
Import Duty On Raw Cotton : कपड़ा उद्योग को बड़ी राहत देने के लिए सरकार कच्चे कपास पर लगने वाले 11% आयात शुल्क को हटाने पर गंभीरता से विचार कर रही है. जानिए क्या है पूरी योजना और इससे कपड़ों की कीमतों पर क्या असर पड़ेगा.
Import Duty On Raw Cotton : देश के कपड़ा उद्योग (Textile Industry) के लिए एक बड़ी और अच्छी खबर आ रही है. सरकार कच्चे कपास (Raw Cotton) के आयात पर लगने वाले 11 प्रतिशत सीमा शुल्क (Import Duty) को पूरी तरह से हटाने की मांग पर गंभीरता से विचार कर रही है.
एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, इस फैसले को लेकर अलग-अलग मंत्रालयों के बीच बातचीत आखिरी दौर में पहुंच चुकी है और जल्द ही इस पर अंतिम मुहर लग सकती है. घरेलू कपड़ा उद्योग काफी समय से इस टैक्स को हटाने की मांग कर रहा था, ताकि बाजार में कपास की बढ़ती कीमतों और उत्पादन लागत (Production Cost) के बोझ को कम किया जा सके.
मंत्रालयों के बीच बातचीत अंतिम दौर में
इस फैसले को हरी झंडी देने के लिए वित्त मंत्रालय (Finance Ministry), कपड़ा मंत्रालय (Textile Ministry) और कृषि मंत्रालय (Agriculture Ministry) आपस में मिलकर लगातार चर्चा कर रहे हैं. अधिकारी ने बताया, “हम वित्त और कृषि दोनों मंत्रालयों के साथ लगातार संपर्क में हैं.
विचार-विमर्श की प्रक्रिया काफी आगे बढ़ चुकी है और उम्मीद है कि बहुत जल्द इस पर आखिरी फैसला आ जाएगा.” हाल ही में कपड़ा उद्योग और निर्यातकों (Exporters) के एक ग्रुप ने उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन और कई केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात कर इस मांग को पुरजोर तरीके से उठाया था.
क्यों पड़ी आयात शुल्क हटाने की जरूरत ?
कपड़ा उद्योग के सामने इस समय कच्चे माल (कपास) की भारी कमी और बढ़ती कीमतों का संकट खड़ा हो गया है. आंकड़ों के जरिए समझिए कि समस्या कितनी बड़ी है. चालू वर्ष में देश के कपड़ा उद्योग को लगभग 337 लाख गांठ कपास की जरूरत होने का अनुमान है (बता दें कि कपास की एक गांठ 170 किलोग्राम की होती है). इसके मुकाबले साल 2025-26 के सीजन में देश में सिर्फ 292.15 लाख गांठ कपास आने की ही संभावना है. इस तरह मांग और सप्लाई के बीच करीब 45 लाख गांठ का बड़ा अंतर (कमी) पैदा हो रहा है.
स्पिनिंग मिलों और कपड़ा निर्माताओं पर बढ़ा दबाव
कपास की इस कमी के कारण धागा बनाने वाली स्पिनिंग मिलों और कपड़ा निर्माताओं पर भारी दबाव है. बाजार में अच्छी क्वालिटी वाले कच्चे माल की कमी हो गई है, जिससे फैक्ट्रियों की उत्पादन लागत (लागत खर्च) लगातार बढ़ रही है. यदि सरकार 11% का आयात शुल्क हटा देती है, तो विदेशों से अच्छी क्वालिटी का कच्चा कपास सस्ते दामों पर भारत आ सकेगा. इससे न सिर्फ कपड़ा मिलों को राहत मिलेगी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय कपड़ों का दबदबा और निर्यात (Export) भी बढ़ेगा.
Also Read : आधार कार्ड धारकों के लिए राहत! जून 2027 तक मुफ्त में करें ऑनलाइन अपडेट, जानिए पूरा तरीका
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Abhishek Pandey
अभिषेक पाण्डेय पिछले 2 वर्षों से प्रभात खबर (Prabhat Khabar) में डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने पत्रकारिता के प्रतिष्ठित संस्थान 'दादा माखनलाल की बगिया' यानी माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल (MCU) से मीडिया की बारीकियां सीखीं और अपनी शैक्षणिक योग्यता पूरी की है। अभिषेक को वित्तीय जगत (Financial Sector) और बाजार की गहरी समझ है। वे नियमित रूप से स्टॉक मार्केट (Stock Market), पर्सनल फाइनेंस, बजट और बैंकिंग जैसे जटिल विषयों पर गहन शोध के साथ विश्लेषणात्मक लेख लिखते हैं। इसके अतिरिक्त, इंडस्ट्री न्यूज, MSME सेक्टर, एग्रीकल्चर (कृषि) और केंद्र व राज्य सरकार की सरकारी योजनाओं (Sarkari Yojana) का प्रभावी विश्लेषण उनके लेखन के मुख्य क्षेत्र हैं। आम जनमानस से जुड़ी यूटिलिटी (Utility) खबरों और प्रेरणादायक सक्सेस स्टोरीज को पाठकों तक पहुँचाने में उनकी विशेष रुचि है। तथ्यों की सटीकता और सरल भाषा अभिषेक के लेखन की पहचान है, जिसका उद्देश्य पाठकों को हर महत्वपूर्ण बदलाव के प्रति जागरूक और सशक्त बनाना है।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










