गूगल को तगड़ा झटका! NCLAT ने CCI के फैसले को बरकरार रखा, लेकिन जुर्माने में की भारी कटौती

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Google News: एनसीएलएटी ने गूगल पर प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) के फैसले को बरकरार रखते हुए कहा कि कंपनी की प्ले स्टोर नीतियां डेवलपरों के लिए अनुचित हैं. हालांकि, 936.44 करोड़ रुपये के जुर्माने को घटाकर 216 करोड़ रुपये कर दिया गया. न्यायाधिकरण ने गूगल को थर्ड-पार्टी बिलिंग की अनुमति देने और यूपीआई भुगतान में भेदभाव न करने का आदेश दिया. यह फैसला भारत में डिजिटल बाजार और प्रतिस्पर्धा कानून के लिए अहम माना जा रहा है.
Google News: दिग्गज टेक कंपनी गूगल (Google) को भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) के खिलाफ अपील में राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLAT) से तगड़ा झटका लगा है. NCLAT ने शुक्रवार को CCI के उस फैसले को बरकरार रखा, जिसमें गूगल की प्ले स्टोर नीति को ऐप डेवलपर्स के लिए अनुचित और प्रतिबंधात्मक बताया गया था. हालांकि, NCLAT ने CCI की ओर से लगाए गए 936.44 करोड़ रुपये के जुर्माने को घटाकर 216.69 करोड़ रुपये कर दिया है.
गूगल पर क्या हैं आरोप?
CCI ने 25 अक्टूबर 2022 को गूगल पर अपने प्ले स्टोर (Google Play Store) की नीतियों का दुरुपयोग करने और बाजार में अपनी मजबूत स्थिति का अनुचित लाभ उठाने का आरोप लगाते हुए 936.44 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था. गूगल ने इस फैसले को NCLAT में चुनौती दी थी.
NCLAT का फैसला
NCLAT की दो-सदस्यीय पीठ (न्यायमूर्ति अशोक भूषण और तकनीकी सदस्य बरुण मित्रा) ने 104 पेज के फैसले में कहा कि गूगल ने प्रतिस्पर्धा कानून का उल्लंघन किया है और बाजार में अपनी प्रमुख स्थिति का दुरुपयोग किया है. हालांकि, NCLAT ने जुर्माने की राशि में बड़ी कटौती करते हुए इसे 216.69 करोड़ रुपये कर दिया.
NCLAT के फैसले के प्रमुख बिंदु
- CCI के आदेश को बरकरार रखा: गूगल की प्ले स्टोर नीति डेवलपर्स के लिए अनुचित और प्रतिबंधात्मक है.
- जुर्माने में कटौती: 936.44 करोड़ रुपये से घटाकर 216.69 करोड़ रुपये किया गया.
डेवलपर्स को राहत
- ऐप डेवलपर्स को थर्ड पार्टी की बिलिंग और पेमेंट सर्विसेज का इस्तेमाल करने की अनुमति मिलेगी.
- गूगल डेवलपर्स पर कोई एंटी-स्टीयरिंग प्रतिबंध नहीं लगाएगा और वे अपने ऐप्स को प्रमोट कर सकते हैं.
- गूगल UPI भुगतान सेवाओं में किसी भी ऐप के साथ भेदभाव नहीं करेगा.
- एक्स से CCI के कुछ निर्देश हटाए गए.
- गूगल को अपने डेटा संग्रह, उपयोग और साझाकरण पर स्पष्ट नीति लागू करने की आवश्यकता नहीं होगी.
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गूगल को क्या करना होगा?
- चूंकि गूगल पहले ही अपील के दौरान 10% जुर्माना जमा कर चुका है, अब उसे शेष राशि 30 दिनों के भीतर जमा करनी होगी.
- उसे प्ले स्टोर से संबंधित अपनी नीतियों में बदलाव करने होंगे.
- इस फैसले के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि गूगल इस निर्णय को स्वीकार करता है या सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देता है.
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By KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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