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E-KYC : घर बैठे केवाईसी अपडेशन के लिए UIDAI देता है ई-केवाईसी की सुविधा, ये हैं प्रक्रिया और फायदे

By Prabhat Khabar Digital Desk
Updated Date
ई-केवाईसी के कई फायदे.
ई-केवाईसी के कई फायदे.
प्रतीकात्मक फोटो.

E-KYC Aadhaar Verification: अगर आपने अभी तक अपने केवाईसी (KYC) का अपडेशन नहीं कराया है और आपको इसमें परेशानी हो रही है, तो अब आपको चिंता करने की जरूरत नहीं पड़ेगी. घर बैठे केवाईसी अपडेशन करने के लिए भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) आपको ई-केवाईसी (E-KYC) की भी सुविधा प्रदान करता है. इस ई-केवाईसी के एक नहीं अनेक फायदे हैं. खासकर वैसे निवेशकों को जो म्यूचुअल फंडों में निवेश करते हैं. मौजूदा व्यवस्था के तहत यूआईडीएआई आधार ऑथेंटिकेशन और पेपरलेस ऑफलाइन ई-केवाईसी दोनों की सुविधा प्रदान करता है. आइए, जानते हैं कि इसकी क्या है प्रक्रिया और कितने हैं फायदे?

क्या है ई-केवाईसी

दरअसल, ई-केवाईसी फुलफॉर्म इलेक्ट्रॉनिक नो योर कस्टमर (Electronic Know Your Customer) है यानी अपने ग्राहकों को इलेक्ट्रॉनिक तरीके से जानिए. यह पहले से जारी केवाईसी प्रक्रिया का डिजिटल स्वरूप है, जो कागजी दस्तावेजों की बजाय इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेज की मदद से पूरा होता है. भारत में आधार ईकेवाईसी (Aadhaar E-KYC) सबसे प्रचलित प्रक्रिया है.

आधार ई-केवाईसी

आधार ई-केवाईसी (Aadhaar E-KYC) एक कागज रहित केवाईसी प्रकिया होती है, जो आपके आईडी प्रूफ, पता और अन्य विवरणों का प्रमाण इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से प्रमाणित कर देती है. इसमें, किसी व्यक्ति के शारीरिक लक्षणों (बायोमेट्रिक्स) की मिलान उसके आधार डाटाबेस में मौजूद लक्षणों से की जाती है. उंगुलियों की छाप बायोमेट्रिक्स का सबसे प्रचलित और आसान तरीका है. तमाम सरकारी और प्राइवेट कंपनियां आधार ई-केवाईसी का प्रयोग भी करने लगे हैं.

ई-केवाईसी का कहां-कहां होता है इस्तेमाल

ई-केवाईसी का सबसे प्राथमिक स्तर का इस्तेमाल होता है. मोबाइल सिम या आरक्षित श्रेणी की रेल यात्रा में वास्तविक टिकटधारक की पहचान के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है. इसका मतलब यह कि आपने अपना और अपने पिता का जो नाम बताया है, वह सही है या नहीं. इसके साथ ही, ई-केवाईसी बैंक में खाता खुलवाने या लेन-देन के लिए, शेयर बाजार, ​म्यूचुअल फंड वगैरह में निवेश के लिए खाता खुलवाने में भी इसका इस्तेमाल किया जाता है. इन मामलों में केवाईसी इसलिए जरूरी होता है, ताकि कोई व्यक्ति सिर्फ अपने नाम से ही निवेश कर सके. इससे हर व्यक्ति का जवाबदेही तय होती है और काले धन पर रोक लगती है. इसके अलावा, अगर आपका बैंक खाता लेन-देन नहीं करने की वजह से बंद कर दिया गया है, तो उसे फिर से चालू कराने के लिए आपको फिर से केवाईसी प्रक्रिया से गुजरना होगा.

ऐसे कर सकते हैं ऑनलाइन ई-केवाईसी

  • ग्राहक बैंक अधिकारी को अपना आधार कार्ड देता है.

  • बायोमेट्रिक स्कैनर ग्राहक का फिंगरप्रिंट या रेटिनल इमेज स्कैन करता है.

  • इसके अलावा मोबाइल ओटीपी ऑथेंटिकेशन भी उपलब्ध हैं.

  • बायोमेट्रिक के बाद वैल्यू को UIDAI तक सर्वर द्वारा भेजा जाता है.

  • उसके बाद यह देखा जाता है कि बायोमेट्रिक की वैल्यू डेटाबेस में मौजूद आधार नंबर की जानकारी से मेल खाती है या नहीं.

  • अगर वैल्यू मेल खाती है, तो यह मान लिया जाता है कि व्यक्ति की पहचान में कुछ संदेह करने वाला नहीं है.

  • वेरिफिकेशन के बाद UIDAI उसकी सभी जानकारी बैंक या एजेंट को उपलब्ध कराता है.

क्या है ऑफलाइन ई-केवाईसी

आधार पेपरलेस ऑफलाइन ई-केवाईसी में कार्डधारक को अपने आधार की फोटोकॉपी देने की जरूरत नहीं है और उसकी जगह KYC XML फाइल को डाउनलोड करना होता है और उसे एजेंसी को अपने केवाईसी के लिए देना होता है. इस XML फाइल में यूआईडीएआई का डिजिटल हस्ताक्षर होता है, जिससे इसकी सत्यता को प्रमाणित किया जा सकता है और किसी छेड़छाड़ को भी पकड़ा जा सकता है. एजेंसी OTP या फेस ऑथेंटिकेशन के जरिए भी प्रमाणिकता की जांच कर सकती है. ऑफलाइन ई-केवाईसी डेटा में व्यक्ति का नाम, उसका डाउनलोड रेफरेंस नंबर, घर का पता, फोटो, लिंग, जन्म तिथि, मोबाइल नंबर, ई-मेल दिया होगा.

ऐसे करें ऑफलाइन ई-केवाईसी

  • मौजूदा आधार कार्डधारकों को पेपरलेस ई-केवाईसी के लिए सबसे पहले UIDAI की आधिकारिक वेबसाइट https://uidai.gov.in/ पर जाना होगा.

  • आधार पेपरलेस ऑफलाइन ई-केवाईसी फॉर्म को डाउनलोड करना होगा. फॉर्म को भरने के बाद उसे जमा करना होगा.

  • जानकारी को XML फाइल के तौर पर डाउनलोड के लिए उपलब्ध कराया जाएगा, जिस पर UIDAI के डिजिटल हस्ताक्षर होगा.

  • डाउनलोड करने के बाद ऑफलाइन ई-केवाईसी डेटा को आपको संबंधित एजेंसी के साथ शेयर करना होगा.

  • इसे फिजिकल फॉर्मेट या डिजिटल किसी भी रूप में शेयर किया जा सकता है.

Posted By : Vishwat Sen

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