coronavirus: बियर से सस्ता पेट्रोल-डीजल, जानिए कोरोना के खेल में कैसे बिगड़ गया तेल बाजार
Author : Utpal Kant Published by : Prabhat Khabar Updated At : 01 Apr 2020 10:00 AM
कोरोना वायरस से लड़ने के लिए दुनिया भर में सरकारें लॉकडाउन का सहारा ले रही हैं. ऐसे में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार क्रूड ऑयल के दाम घटने पर भी भारत में कोई खास असर नहीं दिखाई दे रहा है. मगर कई ऐसे देश भी हैं जहां पेट्रोल-डीजल का दाम बियर से भी कम है.
दुनियाभर में कोरोना वायरस की वजह से आवाजाही पर सख्त पाबंदियों के चलते कच्चे तेल की मांग में भारी कमी आई है, जबकि इसका भंडार काफी बढ़ गया है. इधर, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार क्रूड ऑयल के दाम घटने पर भी भारत में कोई खास असर नहीं दिखाई दे रहा है. मगर कई ऐसे देश भी हैं जहां पेट्रोल-डीजल का दाम बियर से भी कम है. हम बात कर रहे हैं अमेरिकी देश कनाडा की जहां बियर से सस्ता पेट्रोल-डीजल मिल रहा है. ब्लूमबर्ग के मुताबिक, एक बैरल कच्चे तेल का दाम 20 डॉलर से भी कम है. कनाडा में अच्छी क्वालिटी का बियर के लिए पांच डॉलर मिल रहा है मगर एक बैरल तेल इससे भी कम दाम में.
ट्रेडर्स वेस्टर्न कनाडा सेलेक्ट( WCS) ने एक बैरल तेल का दाम 4.8 डॉलर तय किया है. यह विश्वास करने लायक बात तो नहीं है मगर सच यही है. ट्रेडर्स के मुताबिक, दामों में गिरावट की वजह का सबसे बड़ा कारण चीन के बंद बाजार है. चीनी बाजार बंद होने से एशिया में तेलों की मांग काफी कम हुई है. तेल उत्पादक देश अपनी लागत निकालने के चक्कर में कच्चे तेलों को औने-पौने दाम में बेच रहे हैं. जैसे ही बाजार खुलेंगे वैसे ही तेलों की मांग बढ़ेगी और फिर सबकुछ वैसा ही होगा जैसा पहले था. बता दें कि कोरोना वायरस के चलते दुनिया भर में 33,000 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और यूरोप तथा अमेरिका इससे सबसे अधिक प्रभावित हैं. कोरोना वायरस से लड़ने के लिए दुनिया भर में सरकारें लॉकडाउन का सहारा ले रही हैं और यात्रा प्रतिबंध लागू किए गए हैं, जिसके चलते कच्चे तेल पर भारी दबाव है.
मांग में गिरावट के विपरीत कच्चे तेल की आपूर्ति में नाटकीय रूप से बढ़ोतरी हुई है और शीर्ष उत्पादक सऊदी अरब तथा रूस के बीच कीमत युद्ध चल रहा है. रियाद ने पिछले सप्ताह कहा था कि वह उत्पादन में किसी कटौती के लिए मास्को के संपर्क में नहीं है, दूसरी ओर रूस के उप ऊर्जा मंत्री ने कहा था कि तेल की कीमत 25 डॉलर प्रति बैरल तक रूस के उत्पादों के लिए बुरी नहीं है. इससे यह संकेत मिला कि अभी दोनों पक्ष किसी सहमति से दूर हैं.
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से एक तरफ भारत को कम विदेशी मुद्रा खर्च करनी पड़ रही है. वहीं दूसरी ओर वह कच्चे तेल के दाम में गिरावट के बाद पेट्रोल-डीजल का दाम घटाने की बजाय उत्पाद शुल्क बढ़ाकर सरकारी खजाना भर रहा है. एक अनुमान के मुताबिक, उत्पाद शुल्क एक रुपया बढ़ने पर सरकार को 13 हजार करोड़ का लाभ होता है.
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