CAS सिस्टम आने से इंट्रा डे ट्रेडर्स परेशान, इसे लेकर छिड़ी हैं जोरदार बहस, पढ़िए आखिर क्यों?
CAS सिस्टम लागू होने से शेयर बाजार में डेली ट्रेडिंग पर असर पड़ा है. जानिए CAS क्या है, ट्रेडर्स को परेशानी क्यों हो रही है और सेबी का क्या कहना है.
लेखक- शिवपूजन सिंह
शेयर बाजार में पैसा कमाना तो वैसे ही मुश्किल है. इसकी छवि पहले से ही पैसा गंवाने की आसान जगह और जुआ-सट्टा माना जाता रहा है. लोग इसे अमीरों का जुआ अड्डा तक से नवाजते हैं. सबसे ज्यादा नुकसान तो रोजाना ट्रेडिंग यानी इंट्राडे ट्रेडिंग में होती है.
भारतीय शेयर बाजार ने तो समय के साथ बेहतरीन प्रदर्शन किया है, इसके साथ ही कोरोना महामारी के बाद लोगों का रुझान भी ज्यादा बढ़ा और डीमैट अकाउंट भी बहुतायत खुले. ट्रेडिंग करने वालों की तादाद में भी इजाफा हुआ.
सबसे दिलचस्प बात ये रही कि इस दौरान सबसे जोखिम माने जाने वाले फ्यूचर और ऑप्शन ट्रेडिंग में भी लोगों ने खूब हाथ आजमाया. जिसमें 90% से ज्यादा ट्रेडर्स नुकसान ही झेले. लेकिन पैसे की ख्वाहिश और बड़े सपने पूरे करने की तड़प ने आज भी ट्रेडिंग लोग कर रहे हैं और सीख रहे हैं. क्योंकि एक आदत और नशा सा बन गया है. इस सनक से ज्यादातर लोग अपना पैसा लुटाया ही हैं, लेकिन खोये पैसों को वापस हासिल करने की जिद, एक जुनून, तमन्ना और कोशिश कइयों अभी भी पूरे भरोसे से कर रहे हैं.
शेयर बाजार में CAS का आगमन
अभी ये रफ्तार और सनक परवान पर थी कि इंट्राडे ट्रेडर्स के लिए बाजार की नियामक संस्था सेबी के लाये CAS सिस्टम ने रोजाना ट्रेडिंग को ही हिला कर रख दिया. 3 अगस्त से शुरू हुए इस सिस्टम से काफ़ी डे ट्रेडर्स को नुकसान हुआ और काफी संख्या में लोगों ने ट्रेडिंग से दूरी बना ली. यह CAS सिस्टम नीम पर करेला चढ़ने वाली बात बन गई है. 12 अगस्त को भारतीय ट्रेडर्स ने विरोध में ट्रेडिंग नहीं करने का भी फैसला लिया था. सेबी के इस कदम से रोजाना ट्रेडिंग में जबरदस्त गिरावट देखने को मिली, ऑप्शन ट्रेड करने वाले बायर्स और सेलर्स ने काफी नाराजगी जताई और काफी नुकसान होने की बात बताई. इसके लिए जिम्मेदार सेबी के लाये नये CAS सिस्टम को जिम्मेदार ठहराया.
आखिर क्या हैं CAS सिस्टम ?
CAS का मतलब या फिर विस्तृत इसे जानें तो इसका पूरा नाम Closing Auction Session है. यह एक नीलामी आधारित प्रक्रिया है जो क्लोजिंग प्राइस पर आधारित है. जिसमें बाजार के अंतिम चरण में खरीद और बिक्री के ऑर्डरों के आधार पर ऐसा मूल्य खोजा जाता है जिस पर अधिकतम संभव मात्रा में ट्रेड का मिलान संभव हो सके.
इसके लागू होने से पहले एक reference price निर्धारित की जाती थी. इस दौरान शेयर्स में हुए ट्रेड का VWAP यानी Volume Weighted Average Price के जरिये reference price ली जाती थी, जो CAS के लागू होने के बाद बिल्कुल बदल गया. अगर इसे सीधे समझा जाए तो CAS कोई buy और sell की स्ट्रेटेजी नहीं है बल्कि यह क्लोजिंग प्राइस को ढूंढने का नया तरीका है.
सेबी का क्या कहना हैं?
CAS के आने से रिटेल ट्रेडर्स काफी परेशान हैं और इंटरनेट पर कई तरह की तोहमतें सेबी पर लगा रहे हैं. उनका आरोप है कि इसके जरिये इंस्टीट्यूशनल यानी बड़े कारोबारियों को लाभ पहुंचाया जा रहा है. इधर सेबी का इसे लागू करने का मकसद और कहना यह है कि क्लोजिंग प्राइस को अब और पारदर्शिता से ढूंढा जाए जिससे सबकुछ साफ हो और कोई गड़बड़ी न हो. इसीलिए CAS को लाया गया है. इससे रिटेल ट्रेडर्स को नुकसान न हो बल्कि एक पारदर्शिता बने.
कई देशों में CAS पहले से है लागू
भारत में CAS सिस्टम अभी लागू किया गया है, लेकिन दुनिया के कई देशों के शेयर बाजार में यह पहले से ही काम कर रहा है. जिनमें यूके के लंदन स्टॉक एक्सचेंज, जर्मनी, फ्रांस, इटली, जापान, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया जैसे बड़े देशों के स्टॉक एक्सचेंज शामिल हैं.
CAS के आने से डेली ट्रेडर्स के बीच एक कोहराम की स्थिति है साथ ही इस पर चर्चा और बहस तेज बनी हुई है. ट्रेडर्स को वॉल्यूम नहीं होने से ट्रेड में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. ऑप्शन के प्रीमियम भी स्थिर हो जा रहे हैं. नुकसान के चलते ट्रेडर्स ट्रेडिंग छोड़ रहे हैं. इसके साथ ही इसके लागू होने से डे ट्रेडिंग की कई स्ट्रेटेजी भी काम नहीं कर रही हैं. ऐसी हालत में परेशानी तो हो रही है, जिससे इंकार तो नहीं किया जा सकता है. अब देखना यही दिलचस्प होगा कि बाजार की नियामक संस्था सेबी इसे लेकर क्या कदम उठाती है.
ये भी पढ़ें: Parle Agro के वेयरहाउस में मिला एक्सपायर्ड Frooti और Appy Fizz, FDA ने लाइसेंस किया सस्पेंड
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By सौम्या शाहदेव
सौम्या शाहदेव प्रभात खबर डिजिटल में बिजनेस कंटेंट राइटर हैं. वह शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, टैक्स, सरकारी योजनाओं, बैंकिंग और रोजमर्रा की आर्थिक खबरों को सरल और सटीक भाषा में पाठकों तक पहुंचाती हैं. उनका फोकस ऐसी खबरें लिखने पर रहता है जो सीधे आम लोगों की जिंदगी और जेब पर असर डालती हैं.
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










