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Budget Expectations: देवघर चैंबर ने आम बजट से पहले वित्त मंत्री को लिखा - मुद्रा लोन पर कम करें ब्याज दर

Updated at : 30 Jan 2023 3:28 PM (IST)
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Budget Expectations: देवघर चैंबर ने आम बजट से पहले वित्त मंत्री को लिखा - मुद्रा लोन पर कम करें ब्याज दर

इस समय सबसे बुरा हाल मध्यमवर्ग का ही है. भारत की वित्त मंत्री को आर्थिक नीति में बदलाव करके रेपो रेट और खुदरा महंगाई दर को कम करना चाहिए. वित्तीय वर्ष 2022-23 में चौथी तिमाही में रेपो रेट में बढ़ोतरी नहीं हो, यह सुनिश्चित करना चाहिए.

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Budget Expectations: देवघर चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष रवि केसरी ने आम बजट (Union Budget) से पूर्व कुछ बिंदुओं पर केंद्र सरकार का ध्यान आकृष्ट कराया. श्री केशरी ने कहा कि केंद्र सरकार को मुद्रा लोन (Mudra Loan) पर ब्याज दर कम करना चाहिए. इस समय देश में सबसे ज्यादा ब्याज दर मुद्रा लोन में ही है. इस कारण जरूरतमंद व्यवसायी वर्ग और बेरोजगार युवक मुद्रा लोन लेने के प्रति उत्साहित नजर नहीं आ रहे हैं.

खुदरा महंगाई दर लगातार बढ़ना चिंता का विषय

उन्होंने कहा कि देश में बढ़ रही खुदरा महंगाई दर लगातार बढ़ना चिंता की विषय है. वित्तीय वर्ष 2022-2023 में लगातार तीन बार रेपो रेट बढ़ने से पहले ही मध्यमवर्गीय नौकरी पेशा और व्यवसायी वर्ग को पहले से ज्यादा बैंक के लोन में इएमआइ चुकाना पड़ रहा है.

रेपो रेट और खुदरा महंगाई दर को कम करे सरकार

इस समय सबसे बुरा हाल मध्यमवर्ग का ही है. भारत की वित्त मंत्री को आर्थिक नीति में बदलाव करके रेपो रेट और खुदरा महंगाई दर को कम करना चाहिए. वित्तीय वर्ष 2022-23 में चौथी तिमाही में रेपो रेट में बढ़ोतरी नहीं हो, यह सुनिश्चित करना चाहिए.

Also Read: Budget Expectations: टैक्स लिमिट को 2.5 लाख से बढ़ाकर 5 लाख किया जाए, आम बजट से ऐसी है लोगों की उम्मीदें

मुफ्त अनाज बांटने की बजाय लोगों को आत्मनिर्भर बनायें

देवघर चैंबर के अध्यक्ष ने कहा कि केंद्र सरकार टैक्स कलेक्शन में ज्यादा ध्यान लगा रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अध्यक्षता वाली आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति के द्वारा देश के 81.35 करोड़ लोगों को मुफ्त अनाज बांटने का फैसला स्वागत योग्य है.

81.35 करोड़ लोग आत्मनिर्भर होंगे तो सरकार के बचेंगे 2 लाख करोड़

चैंबर ने कहा कि 81.35 करोड़ लोगों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए भी सार्थक प्रयास होना चाहिए. 81.35 करोड़ लोगों को एक वर्ष मुफ्त राशन बांटने से सरकारी खजाने पर 2 लाख करोड़ रुपये का बोझ पड़ेगा. केंद्र सरकार दो वर्ष में इन्हें आत्मनिर्भर बना दे, तो यह रुपया देश की समृद्धि में काम आयेगा.

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