World Costlier Countries: इन देशों में आपकी आमदनी खर्चे के मुकाबले पड़ जाएगी 'अठन्नी'

Published by : Pritish Sahay Updated At : 16 May 2023 7:19 AM

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बरमूडा की कॉस्ट ऑफ लिविंग भारत से कितनी महंगी है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जो चीज आप भारत में 100 रुपये में खरीदते हैं बरमूडा में उसके लिए करीब 83 फीसदी ज्यादा देना होगा. कॉस्ट ऑफ लिविंग की तर्ज पर धरती का स्वर्ग कहा जाने वाला स्विट्जरलैंड इस लिस्ट में दूसरे नंबर पर पहुंच गया है.

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World Costlier Countries: कोरोना महामारी और यूक्रेन-रूस के युद्ध ने दुनिया भर में महंगाई को काफी बढ़ा दिया है. दैनिक जरूरत की चीजों के साथ बढ़ी हुई महंगाई से घर का मंथली बजट भी बिगड़ गया है. लेकिन क्या आप जानते हैं दुनिया कई ऐसे महंगा शहर भी हैं जहां रहने की आम आदमी सोच भी नहीं सकते. World of statistics की सर्वे रिपोर्ट की मानें तो बरमूडा, स्विट्जरलैंड, केमैन आइलैंड्स बहामास, बारबाडोस, नॉर्वे सिंगापुर, आइसलैंड समेत कई ऐसे देश हैं जो इतने महंगे है कि आपकी पूरी सैलरी कम पड़ जाएगी, लेकिन खर्च पूरा नहीं होगा.  

खूबसूरत, लेकिन हद से ज्यादा महंगा शहर बरमूडा: World of statistics ने जो महंगे देशों की लिस्ट जारी की है उसमें सबसे पहला नाम बरमूडा का है. यहां समुद्री बीच की खूबसूरती लोगों को अपनी ओर खींचती है. बरमूडा की कॉस्ट ऑफ लिविंग अमेरिका-ब्रिटेन के किसी भी शहर से काफी ज्यादा है. अगर बरमूडा की कॉस्ट ऑफ लिविंग की भारत से तुलना की जाए तो यह भारत से करीब 83 फीसदी महंगा है.

बरमूडा की कॉस्ट ऑफ लिविंग भारत से कितनी महंगी है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जो चीज आप भारत में 100 रुपये में खरीदते हैं बरमूडा में उसके लिए करीब 83 फीसदी ज्यादा देना होगा. क्योंकि बरमूडा भारत से 82.8 फीसदी महंगा है. कॉस्ट ऑफ लिविंग की तर्ज पर धरती का स्वर्ग कहा जाने वाला स्विट्जरलैंड इस लिस्ट में दूसरे नंबर पर पहुंच गया है. खर्चे के हिसाब से भारत से स्विट्जरलैंड की तुलना की जाए तो यह भारत से 81.3 फीसदी महंगा है.

यानी अगर एक मिडिल क्लास भारतीय को जितनी सैलरी मिलती है अगर उसे बरमूडा या स्विट्जरलैंड में रहना पड़े तो खर्च के हिसाब से वो अपनी औसत जरूरत भी पूरी नहीं कर पाएगा. अगर किसी की सैलरी 30 हजार रुपये है और भारत में उसका घरेलू खर्च 25 हजार रूपये तक में पूरा हो जाता है, लेकिन बरमूडा में उसके खर्च में करीब 21000 रुपये का इजाफा हो जाएगा. यानी भारत में जो खर्च 25 हजार रुपये में चल जाता था बरमूडा में उतने ही खर्च के लिए करीब 46 हजार देने होंगे. जबकि स्विट्जरलैंड में उसे करीब 45 हजार रुपये घरेलू चीजों पर खर्च करने होंगे.

बरमूडा और स्विट्जरलैंड ही इतने महंगे देश नहीं है जहां घरेलू खर्च डेढ़ से दो गुना ज्यादा हैं. केमैन आइलैंड्स, बहामास, बारबाडोस, नॉर्वे सिंगापुर, आइसलैंड समेत कई और ऐसे देश हैं जहां का कॉस्ट ऑफ लिविंग भारत की तुलना में काफी ज्यादा है. World of statistics के मुताबिक, सिंगापुर भारत से 76.0 फीसदी महंगा है. वहीं ऑस्ट्रेलिया भारत से 72.3 फीसदी महंगा हैं. जबकि, अमेरिका भारत से 70.6 फीसदी महंगा है. एक औसत भारतीय इन देशों में अपनी घरेलू खर्चे की जरूरत भी पूरी नहीं कर पाएगा.

प्रति व्यक्ति आय: दरअसल भारत की अपेक्षा इन देशों की प्रति व्यक्ति आय काफी ज्यादा है इस कारण यहां कॉस्ट ऑफ लिविंग काफी हाई है. उदाहरण के लिए वर्ल्ड बैंक के आंकड़ों के मुताबिक, 2021 में बरमुडा की प्रति व्यक्ति आय 88,185.5 डॉलर थी. वहीं, ऑस्ट्रेलिया की 55,947.1. अमेरिकी की प्रति व्यक्ति आय 69,287.5,  सिंगापुर की 116,486.5 जबकि साल 2021 में भारत की पर कैपिटा इनकम महज  7,242.0 रुपये थी. 

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By Pritish Sahay

प्रीतीश सहाय, इन्हें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में 12 वर्षों से अधिक का अनुभव है. ये वर्तमान में प्रभात खबर डॉट कॉम के साथ डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया जगत में अपने अनुभव के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण विषयों पर काम किया है और डिजिटल पत्रकारिता की बदलती दुनिया के साथ खुद को लगातार अपडेट रखा है. इनकी शिक्षा-दीक्षा झारखंड की राजधानी रांची में हुई है. संत जेवियर कॉलेज से ग्रेजुएट होने के बाद रांची यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. इसके बाद लगातार मीडिया संस्थान से जुड़े रहे हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जी न्यूज से की थी. इसके बाद आजाद न्यूज, ईटीवी बिहार-झारखंड और न्यूज 11 में काम किया. साल 2018 से प्रभात खबर के साथ जुड़कर काम कर रहे हैं. प्रीतीश सहाय की रुचि मुख्य रूप से राजनीतिक खबरों, नेशनल और इंटरनेशनल इश्यू, स्पेस, साइंस और मौसम जैसे विषयों में रही है. समसामयिक घटनाओं को समझकर उसे सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की इनकी हमेशा कोशिश रहती है. वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन करते रहे हैं. इसके साथ ही विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े विषयों पर भी लिखते हैं. डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने कंटेंट प्लानिंग, न्यूज प्रोडक्शन, ट्रेंडिंग टॉपिक्स जैसे कई क्षेत्रों में काम किया है. तेजी से बदलते डिजिटल दौर में खबरों को सटीक, विश्वसनीय और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करना पत्रकारों के लिए चुनौती भी है और पेशा भी, इनकी कोशिश इन दोनों में तालमेल बनाते हुए बेहतर और सही आलेख प्रस्तुत करना है. वे सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जरूरतों को समझते हुए कंटेंट तैयार करते हैं, जिससे पाठकों तक खबरें प्रभावी ढंग से पहुंच सकें. इंटरनेशनल विषयों में रुचि होने कारण देशों के आपसी संबंध, वार अफेयर जैसे मुद्दों पर लिखना पसंद है. इनकी लेखन शैली तथ्यों पर आधारित होने के साथ-साथ पाठकों को विषय की गहराई तक ले जाने का प्रयास करती है. वे हमेशा ऐसी खबरों और विषयों को प्राथमिकता देते हैं जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लिहाज से महत्वपूर्ण हों. रूस यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट संकट जैसे विषयों से लेकर देश की राजनीतिक हालात और चुनाव के दौरान अलग-अलग तरह से खबरों को पेश करते आए हैं.

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