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Anti Dumping Duty: चीन का माल होगा महंगा, मोदी सरकार ने लगाई लगाम

Updated at : 24 Mar 2025 8:50 AM (IST)
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Anti Dumping Duty: एक विशेष प्रकार का टैक्स है जो सरकार उस स्थिति में लगाती है जब किसी विदेशी देश की कंपनियां अपने उत्पादों को भारतीय बाजार में बहुत ही कम कीमत पर बेचती हैं, जिससे देश के घरेलू उत्पादकों को नुकसान पहुंच सकता है.

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Anti Dumping Duty:भारत ने अपने घरेलू उद्योगों को सस्ते चीनी आयात के प्रभाव से बचाने के लिए पांच चीनी उत्पादों पर एंटी-डंपिंग शुल्क (Anti-Dumping Duty) लगाया है. यह कदम वाणिज्य मंत्रालय की जांच इकाई DGTR (Directorate General of Trade Remedies) की सिफारिश के आधार पर उठाया गया है.

Anti-Dumping Duty क्या है?

एक विशेष प्रकार का टैक्स है जो सरकार उस स्थिति में लगाती है जब किसी विदेशी देश की कंपनियां अपने उत्पादों को भारतीय बाजार में बहुत ही कम कीमत पर बेचती हैं, जिससे देश के घरेलू उत्पादकों को नुकसान पहुंच सकता है.

आसान भाषा में समझें

मान लीजिए, चीन की एक कंपनी स्टील प्रोड्यूस करती है और इसे भारत में बहुत ही सस्ते दाम पर बेचती है. इतना सस्ता कि भारतीय स्टील कंपनियां उनकी कीमतों का मुकाबला नहीं कर पातीं. इसका नतीजा ये होता है कि भारतीय स्टील कंपनियों को बड़ा नुकसान होने लगता है और वे धीरे-धीरे बंद होने की कगार पर आ जाती हैं. ऐसी स्थिति में, भारत सरकार Anti-Dumping Duty लगाती है ताकि चीन की कंपनी अपने स्टील को भारत में सस्ते दाम पर न बेच सके और घरेलू बाजार को नुकसान से बचाया जा सके.

किन उत्पादों पर लगाया गया शुल्क?

भारत ने इन पांच चीनी उत्पादों पर एंटी-डंपिंग शुल्क लगाया है.

  • एल्यूमिनियम फॉइल (Aluminium Foil): इस पर प्रति टन अधिकतम 873 अमेरिकी डॉलर का अस्थायी शुल्क लगाया गया है.
  • ट्राइक्लोरो आइसोस्यान्यूरिक एसिड (Trichloro Isocyanuric Acid): यह जल शोधन (water treatment) के लिए उपयोग किया जाता है और इस पर 276 अमेरिकी डॉलर से 986 अमेरिकी डॉलर प्रति टन का शुल्क लगाया गया है.
  • सॉफ्ट फेराइट कोर (Soft Ferrite Cores): इलेक्ट्रिक वाहनों, चार्जर और टेलीकॉम डिवाइस में उपयोग होने वाले इस उत्पाद पर CIF (Cost, Insurance, Freight) मूल्य का 35% तक शुल्क लगाया गया है.
  • वैक्यूम इंसुलेटेड फ्लास्क (Vacuum Insulated Flask): इस पर प्रति टन 1,732 अमेरिकी डॉलर का एंटी-डंपिंग शुल्क लगाया गया है.
  • पॉली विनाइल क्लोराइड पेस्ट रेजिन (Poly Vinyl Chloride Paste Resin): चीन के अलावा, कोरिया RP, मलेशिया, नॉर्वे, ताइवान और थाईलैंड से आयातित इस उत्पाद पर 89 अमेरिकी डॉलर से 707 अमेरिकी डॉलर प्रति टन का शुल्क लगाया गया है.

एंटी-डंपिंग शुल्क लगाने की प्रक्रिया

एंटी-डंपिंग जांच के दौरान यह मूल्यांकन किया जाता है कि क्या किसी उत्पाद को उसकी घरेलू बाजार कीमत से कम पर निर्यात किया गया है और क्या इससे आयातक देश के उद्योगों को नुकसान हुआ है. भारत ने वाणिज्य मंत्रालय की DGTR इकाई की सिफारिश के बाद इन उत्पादों पर शुल्क लगाने का निर्णय लिया.

क्या एंटी-डंपिंग शुल्क WTO नियमों का उल्लंघन करता है?

नहीं, एंटी-डंपिंग शुल्क WTO के नियमों के तहत वैध है. सामान्यतः WTO के तहत किसी देश को अपने शुल्क दरें तय करने और व्यापार भागीदारों के साथ भेदभाव न करने का प्रावधान है. लेकिन WTO के GATT (General Agreement on Tariffs and Trade) के अनुच्छेद 6 के तहत, किसी देश को डंपिंग के खिलाफ कार्रवाई करने की अनुमति दी गई है. इसके तहत आयातित उत्पाद पर अतिरिक्त शुल्क लगाया जाता है ताकि उसका मूल्य “सामान्य मूल्य” के बराबर हो सके या घरेलू उद्योग को हुए नुकसान की भरपाई हो सके.

भारत-चीन व्यापारिक संबंध

चीन भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापार भागीदार है. हालांकि, नई दिल्ली ने चीन के साथ बढ़ते व्यापार घाटे को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है, जो 2023-24 में 85 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया था.

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Abhishek Pandey

लेखक के बारे में

By Abhishek Pandey

अभिषेक पाण्डेय पिछले 2 वर्षों से प्रभात खबर (Prabhat Khabar) में डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने पत्रकारिता के प्रतिष्ठित संस्थान 'दादा माखनलाल की बगिया' यानी माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल (MCU) से मीडिया की बारीकियां सीखीं और अपनी शैक्षणिक योग्यता पूरी की है। अभिषेक को वित्तीय जगत (Financial Sector) और बाजार की गहरी समझ है। वे नियमित रूप से स्टॉक मार्केट (Stock Market), पर्सनल फाइनेंस, बजट और बैंकिंग जैसे जटिल विषयों पर गहन शोध के साथ विश्लेषणात्मक लेख लिखते हैं। इसके अतिरिक्त, इंडस्ट्री न्यूज, MSME सेक्टर, एग्रीकल्चर (कृषि) और केंद्र व राज्य सरकार की सरकारी योजनाओं (Sarkari Yojana) का प्रभावी विश्लेषण उनके लेखन के मुख्य क्षेत्र हैं। आम जनमानस से जुड़ी यूटिलिटी (Utility) खबरों और प्रेरणादायक सक्सेस स्टोरीज को पाठकों तक पहुँचाने में उनकी विशेष रुचि है। तथ्यों की सटीकता और सरल भाषा अभिषेक के लेखन की पहचान है, जिसका उद्देश्य पाठकों को हर महत्वपूर्ण बदलाव के प्रति जागरूक और सशक्त बनाना है।

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