रेटिंग एजेंसी फिच का अनुमान, तेल कंपनियों का विलय कठिन काम लेकिन फायदेमंद

नयी दिल्ली: सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों का प्रस्तावित विलय इस क्षेत्र में व्याप्त अक्षमताओं को कम कर सकता है और एक ऐसी नई कंपनी खडी हो सकती है जो कि संसाधनों के लिहाज से वैश्विक स्तर पर बेहतर प्रतिस्पर्धा कर सकती है. वैश्विक रेटिंग एजेंसी फिच ने आज यह कहा है. रेटिंग एजेंसी ने […]
नयी दिल्ली: सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों का प्रस्तावित विलय इस क्षेत्र में व्याप्त अक्षमताओं को कम कर सकता है और एक ऐसी नई कंपनी खडी हो सकती है जो कि संसाधनों के लिहाज से वैश्विक स्तर पर बेहतर प्रतिस्पर्धा कर सकती है. वैश्विक रेटिंग एजेंसी फिच ने आज यह कहा है. रेटिंग एजेंसी ने एक वक्तव्य में कहा है, ‘‘इस विलय को अमल में लाना काफी चुनौतीपूर्ण है, खासतौर से एकजुट कर्मचारियों का प्रबंधन करना, विलय के बाद बनने वाली कंपनी में अधिक क्षमता की समस्या का समाधान और निजी क्षेत्र के शेयरधारकों से विलय के लिये समर्थन हासिल करना मुख्य चुनौतियां हैं.”
एजेंसी के मुताबिक 12 साल से अधिक समय पहले तत्कालीन पेट्रोलियम मंत्री मणिशंकर अय्यर ने सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों के विलय का प्रस्ताव किया था। अब वित्त मंत्री अरण जेटली ने अपने 2017-18 के बजट में एक एकीकृत सार्वजनिक तेल कंपनी बनाने का प्रस्ताव शामिल किया है. ऐसी तेल कंपनी जो कि अंतरराष्ट्रीय और घरेलू स्तर पर तेल और गैस क्षेत्र की कंपनियों से कड़ी प्रतिस्पर्धा कर सके.
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By Prabhat Khabar Digital Desk
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