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कॉल ड्रॉप में दूरसंचार कं‍पनियों को जेल भेजने का अधिकार चाहता है ट्राई

Updated at : 09 Jun 2016 12:09 PM (IST)
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कॉल ड्रॉप में दूरसंचार कं‍पनियों को जेल भेजने का अधिकार चाहता है ट्राई

नयी दिल्ली : कॉल ड्रॉप पर लगाम के लिए भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने सरकार से उसे अधिक अधिकार दिए जाने की मांग की है. नियामक ने सरकार से कानून में संशोधन कर उसे नियामकीय व्यवस्थाओं के उल्लंघन के मामले में मोबाइल ऑपरेटरों पर 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाने तथा कंपनी के […]

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नयी दिल्ली : कॉल ड्रॉप पर लगाम के लिए भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने सरकार से उसे अधिक अधिकार दिए जाने की मांग की है. नियामक ने सरकार से कानून में संशोधन कर उसे नियामकीय व्यवस्थाओं के उल्लंघन के मामले में मोबाइल ऑपरेटरों पर 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाने तथा कंपनी के कार्यकारियों को दो साल तक की जेल की सजा दिलाने का अधिकार दिए जाने की अपील की है. उच्चतम न्यायालय ने ट्राई के उस आदेश को रद्द कर दिया था जिसमें कॉल ड्रॉप के लिए ग्राहकों को मुआवजा दिए जाने का प्रावधान किया गया था. ट्राई ने दूरसंचार विभाग को ट्राई कानून, 1997 के विभिन्न प्रावधानों में संशोधन का सुझाव दिया है जिससे क्षेत्र को एक प्रभावी नियामक मिल सके.

जानें ट्राई कितना जुर्माना लगाना चाहता है

दूरसंचार विभाग को भेजे पत्र में ट्राई ने कहा है कि यदि सेवाप्रदाता कानून या लाइसेंस के नियम और शर्तों के तहत किसी निर्देश, आदेश या नियमनों का उल्लंघन करता है तो उस पर 10 करोड रुपये तक का जुर्माना लगाया जाना चाहिए. ट्राई ने प्रत्येक कॉल ड्रॉप पर उपभोक्ताओं को एक रुपये प्रति कॉल और एक दिन में अधिकतम तीन रुपये तक जुर्माना दिए जाने का आदेश दिया था. लेकिन उच्चतम न्यायालय ने उसके इस आदेश को रद्द कर दिया था. नियामक ने कहा कि आदेश की व्यापक समीक्षा के बाद उपभोक्ताओं के हितों के संरक्षण के लिए अधिक स्पष्टता की जरुरत महसूस हुई है. नियामक ने ट्राई कानून, 1997 की धारा 29 में संशोधन का प्रस्ताव किया है. यह धारा उसके निर्देशों के उल्लंघन पर जुर्माना लगाने के बारे में है. फिलहाल ट्राई के पास किसी उल्लंघन पर दो लाख रुपये तक का जुर्माना लगाने का अधिकार है. यदि यह उल्लंघन जारी रहता है तो वह आगे और दो लाख रुपये का जुर्माना लगा सकता है.

यह मामला फिलहाल अदालत में है

फिलहाल उपभोक्ता और दूरसंचार आपरेटर के बीच विवाद उपभोक्ता अदालत में नहीं जाता, क्योंकि उच्चतम न्यायालय के 2009 के फैसले में उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत ऐसी किसी राहत पर रोक लगाई गई है.

हैदराबाद में आरएलटी प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल कर रही हैं दूरसंचार कंपनियां : ट्राई

दूरसंचार नियामक ट्राई ने पाया है कि एयरटेल, वोडाफोन व बीएसएनएल सहित प्रमुख मोबाइल कंपनियां हैदराबाद में रेडियो लिंक टाइमआउट (आरएलटी) प्रौद्योगिकी का उच्च स्तर पर इस्तेमाल कर रही हैं. इस प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल कथित तौर पर कालड्राप पर पर्दा डालने के लिए किया जाता है. ट्राई ने हैदराबाद में नेटवर्क ड्राइव टेस्ट पर अपनी रपट में यह जानकारी दी है. इसमें कहा गया है कि ‘जांच किए गए 14 में से 11 नेटवर्क’ सेवा गुणवत्ता नियमों के तहत तय काल ड्राप मानकों पर खरा नहीं उतरे हैं. रपट में कहा गया है कि भारती एयरटेल, वोेडाफोन, बीएसएनएल, टाटा दोकोमो व टेलीनोर के 2जी नेटवर्कों में आरएलटी को अन्य कंपनियों की तुलना में उंचा रखा गया है. आधिकारिक सूत्रों ने दावा किया कि ये कंपनियां काल ड्राप पर पर्दा डालने के लिए इस प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल कर रही हैं.

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