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छोटी अवधि की डाकघर बचत योजनाओं पर ब्याज 0.25 प्रतिशत घटा

Updated at : 16 Feb 2016 10:06 PM (IST)
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छोटी अवधि की डाकघर बचत योजनाओं पर ब्याज 0.25 प्रतिशत घटा

नयी दिल्ली/ चेन्नई: लघु बचत योजनाओं पर ब्याज दर को बाजार दर से जोडने के प्रयासस्वरुप सरकार ने आज अल्पावधि डाकघर बचत जमाओं पर ब्याज दर में 0.25 प्रतिशत कटौती कर दी. वहीं दूसरी तरफ कर्मचारी भविष्य निधि पर ब्याज दर मामूली बढाकर 8.8 प्रतिशत कर दी गई है. वित्त मंत्रालय ने एक, दो व […]

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नयी दिल्ली/ चेन्नई: लघु बचत योजनाओं पर ब्याज दर को बाजार दर से जोडने के प्रयासस्वरुप सरकार ने आज अल्पावधि डाकघर बचत जमाओं पर ब्याज दर में 0.25 प्रतिशत कटौती कर दी. वहीं दूसरी तरफ कर्मचारी भविष्य निधि पर ब्याज दर मामूली बढाकर 8.8 प्रतिशत कर दी गई है. वित्त मंत्रालय ने एक, दो व तीन साल की डाकघर सावधि बचत जमाओं, किसान विकास पत्र तथा पांच साल की आवृत्ति जमाओं पर ब्याज दर में 0.25 प्रतिशत कटौती की है लेकिन मासिक आय योजना, लोक भविष्य निधि, वरिष्ठ नागरिक तथा शिशु कन्या योजना जैसी लंबी अवधि की जमा योजनाओं की ब्याज दर में कोई छेडछाड नहीं की गई है.

उधर, चेन्नई में श्रम मंत्री बंडार दत्तात्रेय ने वर्ष 2015-16 के लिये कर्मचारी भविष्य निधि :पीएफ: पर ब्याज दर को मामूली बढाकर अंतरिम रुप से 8.8 प्रतिशत करने की घोषणा की। वर्तमान में पीएफ पर 8.75 प्रतिशत की दर से ब्याज दिया जाता है. वित्त मंत्रालय के बयान में कहा गया है कि लघु बचत योजनाओं की ब्याज दर में किया गया बदलाव एक अप्रैल 2016 से प्रभावी होगा.इसके बाद ब्याज दरों को हर तिमाही तय किया जायेगा. सुकन्या समृद्धि योजना, वरिष्ठ नागरिक बचत योजना व मासिक आय योजना (एमआईएस) की ब्याज दर इस समय सरकारी प्रतिभूतियों पर मिल रहे ब्याज की तुलना में 0.75 प्रतिशत, एक प्रतिशत व 0.25 प्रतिशत अधिक है. इनकी ब्याज दर में कोई बदलाव नहीं किया गया है क्योंकि वे सामाजिक सुरक्षा लक्ष्यों से सम्बद्ध हैं.
इसी तरह लंबी अवधि के पत्रों ..जैसे कि पांच साल की सावधि जमा, इसी अवधि के राष्ट्रीय बचत प्रमाणपत्र व लोक भविष्य निधि (पीपीएफ)को नहीं छेडा गया है.पीएफ पर ब्याज दर बढाने की घोषणा कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के केंद्रीय न्यासी बोर्ड की चेन्नई में हुई 211वीं बैठक के बाद की गयी.
हालांकि, कर्मचारी संगठन ब्याज दर को बढाकर 8.9 प्रतिशत करने की मांग कर रहे हैं. लघु बचत योजनाओं पर दी जाने वाली ब्याज दरों को बैंकों की दर के साथ जोडने की दिशा में कदम उठाते हुये वित्त मंत्रालय ने कहा है कि डाकघर की एक, दो और तीन साल की सावधि जमाओं, किसान विकास पत्र और पांच साल की आवृति जमा योजना पर इतनी ही अवधि की सरकारी प्रतिभूतियों की तुलना में मिलने वाला 0.25 प्रतिशत अधिक ब्याज अब एक अप्रैल से वापस ले लिया जायेगा. मंत्रालय ने यह भी कहा है कि अब से हर तिमाही लघु बचत योजनाओं पर ब्याज दरों को संशोधित किया जायेगा.
फिलहाल पीपीएफ पर 8.7 प्रतिशत, सुकन्या समृद्धि योजना पर 9.2 प्रतिशत तथा एमआईएस पर 8.4 प्रतिशत ब्याज मिलता है. इनमें कोई बदलाव नहीं किया गया है. डाकघर में एक, दो व तीन साल की सावधि जमाओं पर फिलहाल 8.4 प्रतिशत सालाना ब्याज दिया जाता है. किसान विकास पत्र की मूल राशि फिलहाल 100 महीनों :8 साल व चार महीनों: में दोगुनी हो जाती है.
बयान में कहा गया है कि इस कदम से अर्थव्यवस्था धीरे धीरे कुल मिलाकर निम्न ब्याज दर प्रणाली की ओर बढेगी तथा अंतत: कम आय वाले व वेतनभोगी श्रेणी को मदद मिलेगी.सरकार ने गंभीर बीमारी, बच्चों की उच्च शिक्षा जैसे वास्तविक और गंभीर मामलों में पीपीएफ खातों को समय से पहले बंद करने की भी अनुमति दे दी है.
इसमें कहा गया है, ‘‘यह अनुमति समूची जमा पर देय ब्याज दर में जुर्माने स्वरुप एक प्रतिशत कटौती, और खाता खोलने के दिन से पांच साल पूरा करने वाले खातों के लिये ही होगी।’ वित्त मंत्रालय ने कहा है कि हर तिमाही के लिये ब्याज दर की घोषणा तिमाही शुरु होने से पिछले महीने की 15 तारीख को कर दी जायेगी. उदाहरण के तौर पर अप्रैल-जून तिमाही के लिये 15 मार्च को ब्याज दर की घोषणा कर दी जायेगी जो कि सरकारी प्रतिभूतियों के अनुरुप होगी.
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