अप्रत्यक्ष कर संग्रह में 36.5 प्रतिशत वृद्धि : जेटली

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 04 Nov 2015 3:13 PM

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नयी दिल्ली : अर्थव्यवस्था को आगे बढाने में मुख्य भूमिका निभाने वाले विनिर्माण क्षेत्र में गतिविधियां बढ रही हैं, अप्रत्यक्ष कर संग्रह में तीव्र वृद्धि यह दर्शाती है. यह बात आज वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कही. उन्‍होंने विश्व आर्थिक मंच और सीआईआई द्वारा आयोजित ‘नैशनल स्ट्रैटेजी डे ऑन इंडिया’ में कहा ‘मुझे अर्थव्यवस्था में […]

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नयी दिल्ली : अर्थव्यवस्था को आगे बढाने में मुख्य भूमिका निभाने वाले विनिर्माण क्षेत्र में गतिविधियां बढ रही हैं, अप्रत्यक्ष कर संग्रह में तीव्र वृद्धि यह दर्शाती है. यह बात आज वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कही. उन्‍होंने विश्व आर्थिक मंच और सीआईआई द्वारा आयोजित ‘नैशनल स्ट्रैटेजी डे ऑन इंडिया’ में कहा ‘मुझे अर्थव्यवस्था में वृद्धि नजर आ रही है. मुझे सबसे सकारात्मक बात यह दिख रही है कि अप्रत्यक्ष कर राजस्व में भारी बढोतरी हुई है. इसमें 31 अक्तूबर तक वास्तविक बढोतरी 36.5 प्रतिशत रही.’ उन्होंने कहा कि अप्रत्यक्ष कर संग्रह में 36.5 प्रतिशत की बढोतरी बड़ी दिखती है, हालांकि इसमें पिछले साल नवंबर में राजस्व जुटाने के मोर्चे पर की गयी अतिरिक्त पहलों का भी योगदान है. सरकार ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमत में नरमी के बीच राजस्व संग्रह के लिये पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क बढाया था.

उन्होंने कहा ‘इसलिए राजस्व संबंधी उन अतिरिक्त पहलों का इसमें योगदान है, लेकिन यदि इन अतिरिक्त उपायों के बिना इसकी तुलना पिछले साल के आंकडों के साथ करें तो इसमें 13.5 प्रतिशत की बढोतरी हुई है. इसलिए उत्पाद शुल्‍क के साथ सीमाशुल्क और सेवा कर प्राप्ति में सालाना आधार पर यह वृद्धि 13.5 प्रतिशत है और राजस्व की अतिरिक्त पहलों के साथ यह यह काफी अधिक है.’ जेटली ने कहा कि यह वास्तविक बढोतरी है. इससे दरअसल यह संकेत मिलता है कि विनिर्माण क्षेत्र में गतिविधियां बढ रही है.

उन्होंने ने कहा कि किसी तरह की आर्थिक वृद्धि के लिए जमीन की उपलब्धता पूर्व शर्त है. बुनियादी ढांचा तैयार करने, शहरीकरण, ग्रामीण विकास, सिंचाई और आवास योजनाओं के लिए भूमि की जरुरत है. उन्होंने कहा ‘यदि आप जमीन उपलब्ध नहीं कराते तो वृद्धि की प्रक्रिया खत्म हो जाएगी. निश्चित तौर पर जिस व्यक्ति से जमीन ली जाती है उसे भुगतान किया जाए और पर्याप्त मात्रा से अधिक मुआवजा दिया जाना चाहिए.

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