विश्व बैंक ने भारत के शहरीकरण को अव्यवस्थित बताया
Updated at : 24 Sep 2015 7:11 PM (IST)
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नयी दिल्ली: भारत के शहरीकरण को अव्यवस्थित और अस्पष्ट करार देते हुए विश्व बैंक ने आज इससे जुडी आर्थिक संभावना के दोहन के लिए नीतिगत और संस्थागत स्तर पर पहल करने के लिए कहा. दक्षिण एशिया में शहरीकरण का इस्तेमाल शीर्षक की एक रिपोर्ट में बैंक ने कहा है हालांकि उन्होंने प्रगति की है लेकिन […]
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नयी दिल्ली: भारत के शहरीकरण को अव्यवस्थित और अस्पष्ट करार देते हुए विश्व बैंक ने आज इससे जुडी आर्थिक संभावना के दोहन के लिए नीतिगत और संस्थागत स्तर पर पहल करने के लिए कहा.
दक्षिण एशिया में शहरीकरण का इस्तेमाल शीर्षक की एक रिपोर्ट में बैंक ने कहा है हालांकि उन्होंने प्रगति की है लेकिन भारत और अन्य दक्षिण एशियाई देश अमीर राष्ट्रों की श्रेणी में शामिल होने और अपनी-अपनी अर्थव्यवस्थाओं को बदलने के लिए शहरीकरण से मिले अवसरों को बेहतर तरीके से भुना सकते हैं.
विश्व बैंक ने कहा है कि बढी हुई शहरी जनसंख्या के कारण दबाव से निपटने में दिक्कत आ रही है क्योंकि बुनियादी सेवाओं, अवसंरचना, भूमि, आवास और पर्यावरण पर अपर्याप्त ध्यान के कारण अव्यवस्थित और अस्पष्ट शहरीकरण को बढावा मिला है. इसमें कहा गया है कि इससे शहरीकरण की पूर्ण समृद्धि और लाभ प्रभावित हुआ है. इसमें साथ ही इस बात का जिक्र किया गया है कि संस्थागत स्तर पर शहरों में शासन और वित्त पोषण में सुधार से लाभ होगा.
विश्व बैंक प्रबंध निदेशक और मुख्य परिचालन अधिकारी मुल्यानी इंद्रावती ने कहा कि पूर्ण निर्धनता में कमी आयी है लेकिन दक्षिण एशिया ने शहरीकरण की संभाव्यता का पूरा दोहन नही किया है.
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