ब्याज दर में कटौती कोई लोक लुभावन ''सौगात'' नहीं, महंगाई दर से होती है तय : रघुराम राजन

मुंबई : भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राज ने आज यह स्पष्ट किया कि भविष्य में नीतिगत ब्याज दर में कटौती निम्न मुद्रास्फीति से ही तय होगी और इसे ‘जनता की मांग’ पर बांटी गयी ‘सौगात’ के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए. राजन का यह बयान इस लिहाज से भी महत्वपूर्ण है क्योंकि […]
मुंबई : भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राज ने आज यह स्पष्ट किया कि भविष्य में नीतिगत ब्याज दर में कटौती निम्न मुद्रास्फीति से ही तय होगी और इसे ‘जनता की मांग’ पर बांटी गयी ‘सौगात’ के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए. राजन का यह बयान इस लिहाज से भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सरकार व उद्योग जगत उससे ब्याज दर में और कटौती की लगातार मांग कर रहे हैं. हालांकि 2015 में अब तक वह नीतिगत ब्याज दर में तीन बार 0.25-0.25 प्रतिशत की कटौती कर चुका है.
राजन ने यहां बैंकिंग सम्मेलन में कहा, ‘दरों में कटौती को रिजर्व बैंक से ऐसे उपहार के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए जो उसने जनता की मांग पर बांट दिया हो. ब्याज दरों में कटौती तो (निम्न मुद्रास्फीति) का स्वाभाविक परिणाम है जिसे देने में केंद्रीय बैंक को कोई झिझक नहीं है.’
राजन ने वैश्विक बाजारों में उठापटक के लिए प्रमुख केंद्रीय बैंकों के प्रोत्साहन उपायों को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक बाजार में उठा पटक को काबू में करने के लिए विदेशी मुद्रा भंडार के इस्तेमाल को तैयार है लेकिन उन्होंने इस तरह के ‘मौद्रिक समर्थनवाद’ के प्रति आगाह किया. उन्होंने आगाह किया कि बाजारों को भारतीय रिजर्व बैंक को ‘बाजार का मूड बहलाने वाला’ नहीं माना जाना चाहिए.
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