धुंधली वैश्विक अर्थव्यवस्था के बीच भारत रोशनी का केंद्र : आइएमएफ

Updated at : 16 Mar 2015 3:29 PM (IST)
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धुंधली वैश्विक अर्थव्यवस्था के बीच भारत रोशनी का केंद्र : आइएमएफ

नयी दिल्ली : अंतराष्ट्रीय मुद्राकोष (आइएमएफ) की प्रबंध निदेशक क्रिस्टीन लैगार्ड ने धुंधली वैश्विक अर्थव्यवस्था के बीच भारत को रोशनी का एक केंद्र बताते देते हुए कहा कि यह देश चालू वित्त वर्ष में 7.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज करेगा और 2019 तक इसका सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) जापान और जर्मनी की संयुक्त अर्थव्यवस्था से […]

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नयी दिल्ली : अंतराष्ट्रीय मुद्राकोष (आइएमएफ) की प्रबंध निदेशक क्रिस्टीन लैगार्ड ने धुंधली वैश्विक अर्थव्यवस्था के बीच भारत को रोशनी का एक केंद्र बताते देते हुए कहा कि यह देश चालू वित्त वर्ष में 7.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज करेगा और 2019 तक इसका सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) जापान और जर्मनी की संयुक्त अर्थव्यवस्था से भी अधिक हो जाएगा.
श्रीराम कालेज के एक समारोह में हिस्‍सा लेने आए आइएमएफ प्रबंध निदेशक ने कहा ‘इस धुंधले वैश्विक माहौल में भारत एक रोशनी है. हाल के नीतिगत सुधारों और बेहतर कारोबारी भरोसे ने अर्थव्यवस्था की गतिविधि प्रोत्साहित की है.’ आधार वर्ष 2011-12 के आधार पर जीडीपी के नये आंकडे पेश किए जाने के संबंध में उन्होंने कहा ‘भारत की नयी जीडीपी श्रृंखला के मुताबिक चालू वित्त वर्ष के लिए वृद्धि दर 7.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है और अगले वित्त वर्ष के दौरान यह बढकर 7.5 प्रतिशत हो जाएगी. जिससे भारत विश्व की सबसे अधिक तेज वृद्धि दर्ज करती अर्थव्यवस्था हो जाएगा.’
मुद्राकोष प्रमुख ने कहा ‘निश्चित तौर पर आपकी आंखों के सामने उज्ज्वल भविष्य तैयार हो रहा है. 2019 तक अर्थव्यवस्था का आकार 2009 के मुकाबले दोगुनी हो जाएगी.’ उन्होंने कहा कि विभिन्न अर्थव्यवस्थाओं के बीच क्रय-शक्ति समतुल्यता समायोजन करने से भारतीय अर्थव्यवस्था का आकार जापान और जर्मनी के संयुक्त सकल घरेलू उत्पाद के मुकाबले अधिक हो जाएगा.
यह अन्य तीन सबसे बड़ी उभरती बाजार अर्थव्यवस्थाओं- रुस, ब्राजील और इंडोनेशिया के संयुक्त आकार को भी पार कर जाएगा. क्रिस्टीन ने कहा ‘आज जबकि विश्व के कई देश निम्न वृद्धि से जूझ रहे हैं, भारत उच्च गति से आगे बढ रहा है.’
उन्होंने कहा कि भारत की वृद्धि दर इस साल चीन को पार कर जाने की उम्मीद है. यह देश 2030 तक विश्व का सबसे अधिक आबादी वाला देश भी बन जाएगा. मुद्राकोष प्रमुख का मानना है कि भारत के लिए अपनी युवा आबादी का फायदा उठाने और वैश्विक वृद्धि का प्रमुख शक्ति बनने की परिस्थितियां अनुकूल हैं क्योंकि यह देश बड़ी संभावनाओं से लैस नया अध्याय शुरू करने की कगार पर है. विश्व अर्थव्यवस्था के संबंध में उन्होंने कहा 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के बाद छह साल से अधिक समय से सुधार बहुत धीमा, बहुत नाजुक और बहुत असंतुलित रहा है.
हमने सस्ते कच्चे तेल से प्रोत्साहन मिलने और अमेरिकी की मजबूत वृद्धि के बावजूद पिछले अक्तूबर से वैश्विक वृद्धि का अनुमान घटाया है.’ उन्होंने कहा वैश्विक अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर इस साल 3.5 प्रतिशत और अगले साल 3.7 प्रतिशत रहने का अनुमान है.
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