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अनिल अंबानी के रिलायंस समूह ने रक्षा क्षेत्र में रखा कदम

Updated at : 12 Feb 2015 2:18 PM (IST)
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अनिल अंबानी के रिलायंस समूह ने रक्षा क्षेत्र में रखा कदम

नयी दिल्ली : अनिल अंबानी के नेतृत्व वाले रिलायंस समूह ने आज उच्च वृद्धि वाले रक्षा और वैमानिकी विनिर्माण क्षेत्र में कदम रखने की घोषणा की. इन क्षेत्रों में बाजार का आकार अगले 10 साल में बढकर 100 अरब डालर का हो जाने का अनुमान है. कंपनी ने बंबई शेयर बाजार को बताया कि समूह […]

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नयी दिल्ली : अनिल अंबानी के नेतृत्व वाले रिलायंस समूह ने आज उच्च वृद्धि वाले रक्षा और वैमानिकी विनिर्माण क्षेत्र में कदम रखने की घोषणा की. इन क्षेत्रों में बाजार का आकार अगले 10 साल में बढकर 100 अरब डालर का हो जाने का अनुमान है. कंपनी ने बंबई शेयर बाजार को बताया कि समूह की कंपनी रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर के तहत तीन अनुषंगियों का गठन किया गया है.

समूह अध्यक्ष अनिल धीरुभाई अंबानी ने कहा कि सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ पहल देश में रक्षा क्षेत्र में व्यापक औद्योगिक आधार स्थापित करने के लिए अनुकूल माहौल प्रदान करेगी. रिलायंस समूह इस पहल में उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रतिबद्ध है. कंपनी ने कहा कि बिजली जैसे क्षेत्रों में पहले से मौजूद रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर ने तीन पूर्ण स्वामित्व वाली अनुषंगी – रिलायंस डिफेंस सिस्टम्स, रिलायंस डिफेंस टेक्नोलाजीज और रिलायंस डिफेंस एंड एयरोस्पेस (आरडीए) बनाई हैं.

आरडीए सशस्त्र बल के लिए यूटिलिटी हेलीकाप्टर कार्यक्रमों में भागीदारी करेगी. कंपनी नौसेना के प्लेटफार्म, वायु गतिशीलता (मोबिलिटी), एवियोनिक्स और नेटवर्क सेंट्रिक वारफेयर (एनसीडब्ल्यू) समेत अन्य मौके भी तलाशेगी. अंबानी ने कहा ‘हम भारत में विश्व स्तरीय प्रौद्योगिकी लाने की कोशिश करेंगे और देश के भीतर ही कौशल सेट तैयार करेंगे ताकि हमारे सशस्त्र बलों के लिए बेहतरीन उत्पाद मुहैया कराए जा सके, रक्षा उत्पादों का आयात घटाया जा सके और उच्च कौशल वाले रोजगार पैदा किए जा सकें.’

लॉकहीड मार्टिन इंडिया के पूर्व प्रबंध निदेशक राजेश धींगरा रिलायंस समूह की इस पहल का नेतृत्व करेंगे. रक्षा क्षेत्र में प्रवेश के साथ ही अनिल रिलायंस समूह अब टाटा, लार्सन एंड टूब्रो और महिंद्रा एंड महिंद्रा के साथ प्रतिस्पर्धा करेगी. भारत का रक्षा और वैमानिकी बाजार अगले 10 साल में 100 अरब डालर हो जाने का अनुमान है. फिलहाल इस क्षेत्र में ज्यादातर जरुरतें आयात के जरिए पूरी की जाती हैं. रक्षा मंत्रलय ने निजी क्षेत्र की विनिर्माण विशेषज्ञता प्राप्त करने के लिए विशिष्ट क्षेत्रों की पहचान की है.

इनमें नेवल यूटिलिटी हेलीकाप्टर, लाइट यूटिलिटी हेलीकाप्टर, पनडुब्बी और नेवल मल्टी रोल हेलीकाप्टर शामिल है. उद्योग सूत्रों ने कहा कि रिलायंस प्रौद्योगिकी गठजोड के लिए विभिन्न अंतरराष्ट्रीय कंपनियों से बात कर रही है जिनमें फ्रांस की यूरोकाप्टर, रुस की कामोव और अमेरिका की सिकोरुकी शामिल है. कंपनी रक्षा और वैमानिकी क्षेत्र में वृद्धि और क्षमता विस्तार के लिए स्वाभाविक वृद्धि और अधिग्रहण दोनों पर विचार करेगी.

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