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ट्राई 3जी स्पेक्ट्रम पर अपनी सिफारिशों पर कायम

Updated at : 15 Jan 2015 8:23 PM (IST)
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ट्राई 3जी स्पेक्ट्रम पर अपनी सिफारिशों पर कायम

नयी दिल्ली : भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) 3जी स्पेक्ट्रम के मूल्य पर अपनी सिफारिशों पर कायम है. नियामक ने 2010 में नीलामी से निकले मूल्य से 19 प्रतिशत कम मूल्य की सिफारिश की है. ट्राई का कहना है कि अगले महीने की नीलामी के लिए और स्पेक्ट्रम उपलब्ध कराए जाने की जरुरत है. ट्राई […]

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नयी दिल्ली : भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) 3जी स्पेक्ट्रम के मूल्य पर अपनी सिफारिशों पर कायम है. नियामक ने 2010 में नीलामी से निकले मूल्य से 19 प्रतिशत कम मूल्य की सिफारिश की है. ट्राई का कहना है कि अगले महीने की नीलामी के लिए और स्पेक्ट्रम उपलब्ध कराए जाने की जरुरत है.
ट्राई ने कहा, यदि आपूर्ति कम होने की वजह से ऊंचा नीलामी मूल्य हासिल भी हो जाता है, तो यह लाभ अदूरदर्शी होगा. वित्तीय अंतर भले ही भर लिया जाएगा, लेकिन इसके लिए भारी कीमत लगेगी. उपभोक्ताओं का हित प्रभावित होगा, उद्योग को आगे निवेश के लिए संसाधन नहीं मिलेंगे. साथ ही बैंकों की गैर निष्पादित आस्तियां (एनपीए) बढेंगी. ट्राई ने 31 दिसंबर को अपनी सिफारिश में 2100 मेगाहर्ट्ज बैंड के लिये 2,720 करोड रुपये प्रति मेगाहर्ट्ज के आरक्षित मूल्य की सिफारिश की थी.
हालांकि दूरसंचार आयोग ने इन रेडियो तरंगों के लिये 2,720 करोड रुपये प्रति मेगाहर्ट्ज के आरक्षित मूल्य तय करने के तौर-तरीकों पर सवाल उठाये थे. यह मूल्य 2010 की नीलामी में सेवा प्रदाताओं द्वारा भुगतान किये गये मूल्य से करीब 19 प्रतिशत कम है.
वर्ष 2010 में दूरसंचार आपरेटरों ने 3जी स्पेक्ट्रम के लिए 3,349.87 करोड रुपये के अंतिम प्रति मेगाहर्ट्ज मूल्य का भुगतान किया था. ट्राई ने 2100 मेगाहर्ट्ज बैंड के संदर्भ में दूरसंचार विभाग को अपने स्पष्टीकरण में कहा, फरवरी 2015 में नीलामी के लिये अन्य बैड के स्पेक्ट्रम के साथ 2100 मेगाहर्ट्ज बैंड स्पेक्ट्रम को जोड़ने का मकसद तबतक पूरा नहीं होगा जबतक इस बैंड में पर्याप्त स्पेक्ट्रम उपलब्ध नहीं होता है. दूरसंचार नियामक ने कहा कि रक्षा मंत्रालय के साथ सैद्धांतिक समझौते के तहत मंत्रालय द्वारा खाली किये जा रहे 15 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम की नीलामी फरवरी में ही की जानी चाहिए क्योंकि स्पेक्ट्रम का अंतिम आवंटन काफी बाद में यानी 2015 के अंत में किया जाएगा.
उसने कहा कि इस अवधि में रक्षा मंत्रालय व दूरसंचार मंत्रालय के बीच बचे मुद्दों को सुलझाया जा सकता है. दूरसंचार विभाग की योजना फरवरी में 2100 मेगाहर्ट्ज में 5 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम की नीलामी करने की है. शेष 15 मेगाहर्ट्ज की नीलामी बाद में की जाएगी. नियामक ने कहा कि 2100 मेगाहर्ट्ज में अलग-अलग नीलामी से फरवरी की नीलामी में 2100 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम का मूल्य आपूर्ति की कमी की वजह से कृत्रिम रुप से बढ जाएगा.
ट्राई ने कहा, 2100 मेगाहर्ट्ज बैंड में स्पेक्ट्रम के आरक्षित मूल्य के बारे में जो पूर्व में सिफारिश की गयी थी, उसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है. अंतर-मंत्रालयी समूह दूरंसचार आयोग ट्राई की संशोधित सिफारिशों पर 19 जनवरी को प्रस्तावित बैठक में विचार कर सकता है. उसके बाद मंत्रिमंडल 3जी कीमत मुद्दे पर अंतिम निर्णय करेगा.
समझा जाता है कि दूरसंचार विभाग की एक आंतरिक समिति ने 3जी स्पेक्ट्रम का आधार मूल्य 3,899 करोड रुपये प्रति मेगाहर्ट्ज रखने का सुझाव दिया है, जो ट्राई द्वारा सुझाए गए मूल्य से 43 प्रतिशत अधिक है.
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