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दिसंबर में भी मुद्रास्फीति शून्य के करीब, रिजर्व बैंक पर ब्याज दरों में कटौती का दबाव

Updated at : 14 Jan 2015 7:24 PM (IST)
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दिसंबर में भी मुद्रास्फीति शून्य के करीब, रिजर्व बैंक पर ब्याज दरों में कटौती का दबाव

नयी दिल्ली : वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बीच देश में थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित मुद्रास्फीति दिसंबर 2014 में भी लगभग शून्य के स्तर पर बनी रही. इससे घरेलू विनिर्माण क्षेत्र व आर्थिक वृद्धि को गति देने के लिए रिजर्व बैंक पर नीतिगत ब्याज दरों में कटौती का दबाव […]

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नयी दिल्ली : वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बीच देश में थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित मुद्रास्फीति दिसंबर 2014 में भी लगभग शून्य के स्तर पर बनी रही. इससे घरेलू विनिर्माण क्षेत्र व आर्थिक वृद्धि को गति देने के लिए रिजर्व बैंक पर नीतिगत ब्याज दरों में कटौती का दबाव बढ गया है.
देश में थोक मुद्रास्फीति की दर पिछले छह महीने से लगातार गिर रही थी और नवंबर 2014 में में यह ठीक शून्य पर आ गयी थी. दिसंबर में थोक मुद्रास्फीति नाममात्र को बढकर 0.11 प्रतिशत पर पहुंच गयी.
मुद्रास्फीति में यह वृद्धि मुख्य रुप से खाद्य उत्पादों की कीमतें बढने के कारण हुआ. सरकार द्वारा आज जारी आंकडों के मुताबिक दिसंबर में खाद्य मुद्रास्फीति बढकर 5.2 प्रतिशत रही जो पांच महीने का उच्चतम स्तर है. दालों और फल-सब्जी की मुद्रास्फीति दिसंबर में इससे पिछले महीने के मुकाबले ऊंची रही. इसके विपरीत समीक्षाधीन माह में गेहूं, दूध और अंडा, मांस एवं मछली जैसे प्रोटीनयुक्त उत्पादों मूल्य वृद्धि की दर हल्की हुई.
उद्योग मंडल फिक्की की अध्यक्ष ज्योत्सना सूरी ने कहा, निवेश चक्र को प्रोत्साहन के लिए कर्ज को तत्काल सस्ता किए जाने की जरुरत है. चूंकि मुद्रास्फीति अब बहुत हद तक नियंत्रण में है, ऐसे में हम केंद्रीय बैंक से अपने मौद्रिक नीति के रुख को नरम करने की मांग करते हैं. आंकड़ों के अनुसार ईंधन व बिजली खंड की मुद्रास्फीति दिसंबर में 7.82 प्रतिशत घटी. नवंबर में इसमें 4.91 प्रतिशत की गिरावट आई थी.
रिजर्व बैंक अपनी अगली मौद्रिक समीक्षा तीन फरवरी को पेश करेगा. केंद्रीय बैंक ने मुख्य नीतिगत दर रेपो दर को काफी समय से आठ प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखा है.
वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल के दाम घटकर लगभग छह साल के निचले स्तर 46 डालर प्रति बैरल पर आ गए हैं. इससे भारत जैसे तेल आयातक देशों को काफी मदद मिली है. इससे न केवल डॉलर भुगतान के मोर्चे पर स्थिति आसान हुई है, बल्कि खुदरा कीमतों में भी गिरावट आई है, जिससे मुद्रास्फीति नीचे आई है. उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित खुदरा मुद्रास्फीति भी दिसंबर में बढकर पांच प्रतिशत हो गई है, जो नवंबर में 4.38 प्रतिशत पर थी.
प्राथमिक उत्पाद खंड में मुद्रास्फीति दिसंबर में बढकर 2.17 प्रतिशत रही जो नवंबर में 0.98 प्रतिशत थी. सीआइआइ के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा कि मुद्रास्फीति के मोर्चे पर अनुकूल स्थिति से केंद्रीय बैंक को अपने मुद्रास्फीतिक केंद्रित रख से हटकर अर्थव्यवस्था में वृद्धि को प्रोत्साहन देने वाले रख को अपनाने में मदद मिलेगी.
थोकमूल्य आधारित मुद्रास्फीति में जून से लगतार गिरावट दर्ज हो रही थी. दिसंबर में इसमें मामूली बढोतरी हुई. इस बीच सरकार ने अक्तूबर 14 का थोकमूल्य मुद्रास्फीति का आंकड़ा संशोधित कर 1.66 प्रतिशत कर दिया जबकि इससे पहले प्राथमिक आंकड़ों के आधार पर इसके 1.77 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया था.
इक्रा की वरिष्ठ अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा कि दिसंबर का थोक व खुदरा मुद्रास्फीति का आंकड़ा अनुमान से कम है. कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से निचली मुद्रास्फीति, ईंधन सब्सिडी व चालू खाते के संतुलन को लेकर परिदृश्य और बेहतर हुआ है. उन्होंने कहा, हम अपनी इस उम्मीद पर कायम हैं कि फरवरी, 2015 में बजट पेश होने के बाद रिजर्व बैंक दरों में कटौती के चक्र को शुरु करेगा.
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