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Online Shoping : जारी है ठगी का कारोबार

Updated at : 09 Jan 2015 3:00 PM (IST)
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Online Shoping : जारी है ठगी का कारोबार

नयी दिल्‍ली : हाल फिलहाल की बात है, जब एक बड़ी ई-कामर्स कंपनी फ्लिपकार्ट की ओर से एक विशेष अवसर पर दी गयी बड़ी सेल में काफी गड़बडि़या देखी गयी. जिसकी शिकायत मंत्रालय तक भी पहुंची और उसपर ई-कामर्स कंपनियों को फटकार भी लगी. इतना ही नहीं ऑफ लाइन कारोबारियों ने भी ई-कामर्स के खिलाफ […]

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नयी दिल्‍ली : हाल फिलहाल की बात है, जब एक बड़ी ई-कामर्स कंपनी फ्लिपकार्ट की ओर से एक विशेष अवसर पर दी गयी बड़ी सेल में काफी गड़बडि़या देखी गयी. जिसकी शिकायत मंत्रालय तक भी पहुंची और उसपर ई-कामर्स कंपनियों को फटकार भी लगी. इतना ही नहीं ऑफ लाइन कारोबारियों ने भी ई-कामर्स के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. कई बड़ी कंपनियों के अलावे इस कारोबार से कई छोटी और मंझोली कंपनियां भी जुड़ गयी है.

बड़ी कंपनियों की बात छोड़ दें तो छोटी और मंझोली कंपनियां भरी छूट के नाम पर ग्राहकों को लूटने का काम घड़ल्‍ले से कर रही हैं. इन कंपनियों के विज्ञापन में कई महंगे उत्‍पादों में भारी छूट दिखाकर ग्राहकों को लुभाया जाता है, और जब ग्राहक इसके झांसे में आ जाते हैं तो उन्‍हें पूरी तरह बेवकूफ बनाया जाता है. ऐसी कंपनियों के वेबसाइट पर कैश ऑन डिलिवरी ऑप्‍सन भी नहीं होता है. ये कंपनियां पूरे पैसे का भुगतान सामान की डिलिवरी से पहले ही करवा चुकी होती हैं और बाद में गलत या टूटे-फूटे सामान ग्राहकों को भेज देती हैं.

क्‍या होती है आम शिकायतें?

सैकड़ों छोटी और मंझोली ई-कामर्स कंपनियों का मकड़जाल इंटरनेट पर फैला हुआ है. इतना ही नहीं इनके विज्ञापन टीवी के प्रमुख चैनलों पर भी प्रमुखता से दिखाये जाते हैं. अब अगर उनके विज्ञापन को देखा जाये तो उसमें दिखाये जाने वाले उत्‍पाद और उन कंपनियों द्वारा डिलिवर किये उत्‍पाद में काफी अंतर होता है. कंपनियों की ओर से डिलिवर किये गये उत्‍पादों में सबसे ज्‍यादा शिकायतें टूट-फूट की आती है. कंपनी की ओर से शिपिंग चार्ज के तौर पर कुछ राशि अलग से वसूली जाती है. इसके बावजूद भेजे गये उत्‍पाद की पैकिंग अच्‍छे ढंग से नहीं होने के कारण वे उत्‍पाद रास्‍ते में ही टूट जाते हैं और कुरियर वाले उसी उत्‍पाद को ग्राहकों को थमा देते हैं. एक बड़े सेल के बाद कुछ बड़ी कंपनियों पर सामानों में हेराफेरी की शिकायतें आम हो गयी थी. ये शिकायतें इतनी आगे बढ़ गयी थीं कि मंत्रालय को इसमें हस्‍तक्षेप करना पड़ा था. एक और आम शिकायत में सामान की जगह कूड़ा-कचरा डिलिवर करना भी शामिल है. ग्राहकों को कई बार कंपनियों की ओर से समानों की जगह कूड़ा और कचरा भर कर भेज दिया जाता है. कुछ शिकायतें मीडिया में भी आयी थी जिनतें ऑनलाइन कारोबार के बाद ग्राहक को ईंट भर कर भेजे गये थे.

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विवश होते हैं ठगे जाने के बाद

ऑनलाइल शॉपिंग में ठगे जाने के बाद ग्राहकों के सामने कोई विकल्‍प नहीं बचता. आमतौर पर ई-कामर्स बिजनेश का उपयोग करने वाले लोग ग्रामीण और मध्‍यम तबके से आते हैं. ये ठगे जाने के बाद उपभेक्‍ता फोरम जाने से भी परहेज करते हैं. इतना ही नहीं कंपनी की ओर से उपलब्‍ध कराये गये कस्‍टमर केयर का नंबर भी अच्‍छी तरह काम नहीं करता है. अगर कोई ग्राहक इन नंबरों पर संपर्क करने में कामयाब भी हो जाता है तो उसे उल्‍टा-सीधा समझा दिया जाता है. कई सामानों में इतना ज्‍यादा डिस्‍काउंट दे दिया जाता है कि ग्राहक खराब या टूटे सामान मिलने के बाद भी मन मसोस कर रह जाता है. कई मामलों में ग्राहकों को इस बात की जानकारी ही नहीं होती कि वे ऐसे समय में क्‍या करें. कुछ बड़ी कंपनियों के अलावे छोटी और मंझोली कंपनियां ग्राहकों को सालों से चूना लगा रही है.

रिल्‍पेसमेंट की कोई गारंटी नहीं

बड़ी-छोटी कंपनियां मिलाकर लगभग हजारों ऐसी कंपनियां है जो ई-कामर्स बाजार में बेहतरीन सेवा प्रदान करने का दम भरती है. कुछ कंपनियों को छोड़कर कई कंपनियों में एक बार सामान मंगा लेने के बाद रिप्‍लेसमेंट की कोई व्‍यवस्‍था नहीं होती है. टीवी पर देर रात आने वाले विज्ञापनों में घंटों एक ही उत्‍पाद का बखान बढा-चढा कर किया जाता है. उसमें ये भी दिखाया जाता है कि अगर उत्‍पाद पसंद नहीं हो तो इसे सात दिनों में वापस कर दें. लेकिन एक बार सामान डिलिवर हो जाने के बाद ना तो कंपनी सुनती है और ना ही उसके लोकल रिप्रेजेंटेटिव. उन्‍हें दूरभाष पर संपर्क करने के बाद ऐसे-ऐसे जवाब मिलते हैं कि ग्राहक थक हार कर उत्‍पाद को अपने पास रख लेता है. कुछ कंपनियां तो ऑर्डर के समय बताती हैं कि उत्‍पाद पसंद नहीं आने पर वापस कर लिया जायेगा. लेकिन उत्‍पाद डिलिवर हो जाने के बाद कंपनियां सीधा कन्‍नी काट लेती हैं.

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नहीं होता कैस ऑन डिलिवरी ऑप्‍सन

छोटी और मंझोली कंपनियों के पास कैस ऑन डिलिवरी ऑप्‍सन नहीं होती है. कैस ऑन डिलिवरी ऑप्‍सन का फायदा यह होता है कि कंपनियों द्वारा भेजे गये उत्‍पाद को हम रिसीव करने से पहले खेलकर चेक कर सकते हैं. उसके बाद अगर सामान पसंद नहीं आये तो उसी समय सामान को वापस किया जा सकता है. छोटी कंपनियां इस बात से बचने के लिए कैस ऑन डिलिवरी का ऑप्‍सन नहीं देती. ऐसी कंपनियां समान बुक कराते समय ही ग्राहकों से पूरा पैसा वसूल लेती हैं. अब अगर ग्राहकों को एक बार समान भेज दिया जाता है तो उनके पास कोई और विकल्‍प नहीं रह जाता है. ग्राहकों को ध्‍यान देना चाहिए कि वे जब भी ऑनलाइन कोई सामान खरीदें तो यह ध्‍यान रखें कि कंपनी का स्‍टैंडर्ड क्‍या है और वह डिलिवरी के समय ही कैस ले.

क्‍या ठगी से कमा रही हैं कंपनियां?

अब बड़ा सवाल यह है कि क्‍या ये कंपनियां ठगी का कारोबार कर रही हैं. ठगी से कमाना ही इनका धंधा तो नहीं बन गया है. एक ऐसी ही घटना रांची झारखंड के सुजीत कुमार के साथ घटी. सुजीत ने ई-कामर्स कंपनी SHOPCLUES.COM पर एक दिवाल घड़ी ऑर्डर किया. इस घड़ी का वास्‍तवित कीमत 796 रुपये दिखाया गया था. कंपनी ने इसपर भरी छूट के साथ 199 रुपये में देने की घोषणा की और शिपिंग चार्ज भी शून्‍य कर दिया. सुजीत ने दो अलग-अलग समय में दो घडि़यां ऑर्डर की. सुजीत को एक घड़ी कल कुरियर से मिली. जब पैकिंग खोला गया तो उसमें टूटी हुई दिवाल घड़ी निकली. अब जब सुजीत ने इस मामले की शिकायत कंपनी में करनी चाही तो कंपनी के कस्‍टमर केयर स्‍टॉफ टाल-मटोल करने लगे. उन्‍होंने कहा कि कंपनी ने बेहतर कंडिशन में सामान भेजा था. कुरियर वाले की कमी के कारण घड़ी रास्‍ते में टूट गयी होगी. एक ही समय में दो घडि़यों का ऑर्डर करने के बाद भी सुजीत को अभी तक एक ही घड़ी मिली है, दूसरी का कोई अता-पता नहीं है. इन्‍होंने 1 जनवरी 2015 को दोनों घडि़यां ऑर्डर की थीं.SHOPCLUES.COMका विज्ञापन विभिन्‍न समाचार पोर्टलों के अलावे टीवी पर भी आता है, जिसमें भारी छूट और कम समय में डिलिवरी का भरोसा दिलाया जाता है.

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