इसी माह वियतनाम के साथ भारत कर सकता है तेल उत्‍खनन समझौता

Updated at : 25 Oct 2014 8:28 PM (IST)
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इसी माह वियतनाम के साथ भारत कर सकता है तेल उत्‍खनन समझौता

नयी दिल्ली : वियतनाम के प्रधानमंत्री गुयेन तान दुंग 27 अक्‍टूबर को दो दिन की भारत यात्रा पर आ रहे हैं. इस दौरान तेल व गैस उत्खनन व उत्पादन के क्षेत्र में समझौता किए जाने की संभावना है. वियतनाम के साथ अपने आर्थिक संबंधों को प्रगाढ करने की संभावना तलाश रहा भारत तेल व गैस […]

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नयी दिल्ली : वियतनाम के प्रधानमंत्री गुयेन तान दुंग 27 अक्‍टूबर को दो दिन की भारत यात्रा पर आ रहे हैं. इस दौरान तेल व गैस उत्खनन व उत्पादन के क्षेत्र में समझौता किए जाने की संभावना है. वियतनाम के साथ अपने आर्थिक संबंधों को प्रगाढ करने की संभावना तलाश रहा भारत तेल व गैस की खोज व उत्पादन के लिए इस दक्षिण पूर्व एशियाई देश के साथ समझौता कर सकता है. तान दुंग की भारत यात्रा से पहले वियतनाम ने रक्षा, सुरक्षा और तेल उत्खनन जैसे प्रमुख क्षेत्रों में अधिक सहयोग की इच्छा जताई है और उसे उम्मीद है कि इस यात्रा के दौरान कुछ संधियों पर हस्ताक्षर किए जाएंगे.

पेट्रोलियम मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने बताया कि हम हाइड्रोकार्बन एवं तेल उत्खनन क्षेत्र में भारत का सहयोग बढाने की संभावना तलाश रहे हैं. उन्होंने कहा कि भारत वियतनाम के रिफाइनरी एवं पाइपलाइन क्षेत्र में भी गठबंधन की संभावना तलाश रहा है. प्रधान ने कहा कि सितंबर में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की वियतनाम यात्रा के दौरान उन्होंने तेल क्षेत्र में सहयोग बढाने को लेकर वियतनाम के अधिकारियों के साथ बातचीत की थी और इस सहयोग को आगे बढाने की इच्छा जतायी थी.

पेट्रोलियम मंत्री ने वियतनाम के प्रधानमंत्री की भारत यात्रा के दौरान कुछ गठबंधन किए जाने की संभावनाओं का संकेत देते हुये कहा, हम तेल क्षेत्र में वियतनाम के साथ सहयोग बढाने के और विकल्पों पर विचार कर रहे हैं. प्रधान ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र की इंडियन ऑयल के अधिकारियों की एक टीम वियतनाम गयी थी और कुछ कारोबारी उद्यम लगाने की संभावनाएं तलाशी थीं और वियतनाम के प्रधानमंत्री की भारत यात्रा के दौरान ये मूर्त रुप ले सकते हैं.

सितंबर में मुखर्जी की वियतनाम यात्रा के दौरान ओएनजीसी विदेश लिमिटेड ने वियतनाम के अपतटीय क्षेत्र में अपनी तेल व गैस उत्खनन गतिविधियों का विस्तार करने के लिए एक समझौता किया था. ओवीएल ने दक्षिण चीन सागर में पांच में से दो-तीन ब्लाकों में उत्खनन पर विचार करने पर सहमति जतायी थी. वियतनाम ने पिछले साल नवंबर में दक्षिण चीन सागर में नामांकन आधार पर इन ब्लाकों की पेशकश की थी.

वियतनाम ने जिन पांच क्षेत्रों पिछले साल नवंबर में पेशकश की थी वह सभी दक्षिण चीन सागर में चीन जिस क्षेत्र पर दावा करता है उससे बाहर हैं. ओवीएल वियतनाम के साथ 1988 से काम कर रही है. कंपनी को वर्ष 2006 में ब्लॉक 127 और 128 मिले थे. इसमें से 128 ब्लॉक में उत्खनन कार्य जारी है. इसके अलावा ओएनजीसी विदेश और पेट्रोवियतनाम हाइड्रोकार्बन क्षेत्र में सहयोग के विस्तार की संभावनाओं पर आगे बातचीत कर रही हैं. वियतनाम के प्रधानमंत्री तान दुंग के साथ उद्योगपतियों का एक प्रतिनिधिमंडल भी भारत आ रहा है जो सुरक्षा एवं उर्जा के द्विपक्षीय मुद्दों और क्षेत्रीय मामलों पर भारत के शीर्ष नेताओं के साथ बातचीत करेगा.

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