ऊंची मुद्रास्फीति के खिलाफ जंग जीतने की जरूरत: राजन
Author Prabhat khabar digital desk
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मुंबई:रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन ने उद्योग मंडल फिक्की द्वारा आयोजित एक गोष्ठी में बैंकों से कहा सिर्फ खाद्य उत्पाद ही नहीं बल्कि गैर-खाद्य उत्पाद भी मंहगे हैं और देश के लिए सबसे अच्छा समाधान है कि इसे कम किया जाए. इसके बाद मैं ब्याज दरों में कटौती कर सकता हूं. उन्होंने कहा कि […]
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मुंबई:रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन ने उद्योग मंडल फिक्की द्वारा आयोजित एक गोष्ठी में बैंकों से कहा सिर्फ खाद्य उत्पाद ही नहीं बल्कि गैर-खाद्य उत्पाद भी मंहगे हैं और देश के लिए सबसे अच्छा समाधान है कि इसे कम किया जाए. इसके बाद मैं ब्याज दरों में कटौती कर सकता हूं.
उन्होंने कहा कि मेरी ऐसी कोई इच्छा नहीं है कि अब और एक सेकेंड के लिए भी ब्याज दर ऊंची रखी जाए. मैं चाहता हूं कि जब भी व्यावहारिक हो ब्याज दर कम की जाए और यह तभी होगा जबकि हम मुद्रास्फीति के खिलाफ अपनी जंग जीत लेंगे.
राजन ने कहा ऐसे में ब्याज दरों में कटौती का कोई मतलब नहीं है यदि मुद्रास्फीति फिर से बढ़ जाए. उनका मानना है कि फिलहाल केंद्रीय बैंक उसी दिशा में आगे बढ रहा है जिसका हाल में प्रस्ताव किया गया था.
उद्योग की मुख्य दरों में कटौती की लगातार मांग पर चुटकी लेते हुए गवर्नर ने कहा कि उद्योगों में कीमतें बढ रही है. रिजर्व बैंक गवर्नर ने उद्योगों से कहा कि वह कीमतें कम करें.
उन्होंने कहा जब आप ऐसा करेंगे तो हम भी करेंगे. हमें कोई दिक्कत नहीं है. स्पष्ट है कि इस पर आप सहमत नहीं होंगे. सब्जियों और अन्य खाद्य उत्पादों की कीमत में गिरावट के बीच अगस्त की थोकमूल्य आधारित मुद्रास्फीति घटकर पांच साल के न्यूनतम स्तर 3.74 प्रतिशत पर आ गई जो जुलाई में 5.19 प्रतिशत पर थी और अगस्त 2013 में 6.99 प्रतिशत थी.
हालांकि, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक जिसे आरबीआई ने मौद्रिक नीति का पैमाना माना है, वह अभी भी उच्च स्तर पर है. अगस्त में यह आंशिक रुप से घटकर 7.8 प्रतिशत पर आ गई जो महीने भर पहले 7.96 प्रतिशत थी.
रिजर्व बैंक ने खुदरा मुद्रास्फीति का अगले साल जनवरी के लिये 8 प्रतिशत और जनवरी 2016 तक 6 प्रतिशत का लक्ष्य रखा है.
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