ePaper

RBI गवर्नर दास ने कहा - राजकोषीय घाटे के लक्ष्य पर खरी उतरेगी सरकार

Updated at : 18 Feb 2020 9:32 PM (IST)
विज्ञापन
RBI गवर्नर दास ने कहा - राजकोषीय घाटे के लक्ष्य पर खरी उतरेगी सरकार

नयी दिल्ली : रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि सरकार अगले वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटा कम कर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 3.5 फीसदी पर लाने में कामयाब होगी और इसको लेकर कोई संदेह नहीं है. दास ने कहा कि सरकार घाटे को लेकर राजकोषीय जवाबदेही और बजट प्रबंधन (एफआरबीएम) समिति […]

विज्ञापन

नयी दिल्ली : रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि सरकार अगले वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटा कम कर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 3.5 फीसदी पर लाने में कामयाब होगी और इसको लेकर कोई संदेह नहीं है. दास ने कहा कि सरकार घाटे को लेकर राजकोषीय जवाबदेही और बजट प्रबंधन (एफआरबीएम) समिति द्वारा तय सीमा के भीतर है. मोदी सरकार लगातार तीसरे साल राजकोषीय घाटे का लक्ष्य हासिल नहीं कर सकी.

चालू वित्त वर्ष में इसके बढ़कर सकल घरेलू उत्पाद का 3.8 फीसदी रहने का अनुमान है, जबकि पूर्व में इसके 3.3 फीसदी रहने की संभावना जतायी गयी थी. अगले वित्त वर्ष के लिए राजकोषीय घाटा 3.5 फीसदी रहने का अनुमान है. राजकोषीय घाटा सरकार के आय और व्यय के अंतर को बताता है. इसका मतलब है कि सरकार के पास जो साधन है, वह उससे अधिक खर्च कर रही है.

दास ने कहा कि सरकार एफआरबीएम समिति की सिफारिशों के दायरे में है. इसीलिए राजकोषीय घाटा लक्ष्य से केवल 0.5 फीसदी ही अधिक हुआ. सरकार इस पर कायम है और अगले साल राजकोषीय घाटे का बड़ा हिस्सा लघु बचत से आयेगा. एनके सिंह की अध्यक्षता वाली एफआरबीएम समिति ने 2020-21 तक राजकोषीय घाटे को कम कर 2.8 फीसदी और 2022-23 तक 2.5 फीसदी पर लाने की सिफारिश की है.

समिति ने छूट उपबंध का भी सुझाव दिया था. इसके तहत, राष्ट्रीय सुरक्षा, युद्ध की स्थिति, राष्ट्रीय आपदा और कृषि के गंभीर रूप से प्रभावित होने के कारण उत्पादन और आय पर असर पड़ने की स्थिति में इस प्रावधान का उपयोग किया जा सकता है. इसके तहत, राजकोषीय घाटा लक्ष्य से 0.5 फीसदी तक अधिक रह सकता है.

दास ने कहा कि अगले साल का राजकोषीय घाटे का लक्ष्य हासिल किया जायेगा और इसमें संदेह का कोई कारण नहीं है. एक सवाल के जवाब में आरबीआई गवर्नर ने कहा कि 2020-21 के बजट में कुछ बांड को बिना किसी सीमा के प्रवासी भारतीयों के निवेश के लिए खोला जायेगा. उन्होंने कहा कि इसके अलावा, कंपनी बांड की सीमा 9 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी की गयी. इसलिए विदेशों से धन भारत आने जा रहा है. भारतीय कंपनियां भी विदेशी बाजारों (ईसीबी) के जरिये विदेशी स्रोत से काफी धन जुटा रही हैं. दास ने कहा कि कर्ज प्रबंधक के रूप में आरबीआई सुनिश्चित करेगा कि जो उधारी कार्यक्रम है, उसमें कोई बाधा उत्पन्न नहीं हो.

विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola