अर्थव्यवस्था में नरमी जारी : औद्योगिक उत्पादन 3.8 फीसदी गिरा, खुदरा मुद्रास्फीति 5.54 फीसदी पर पहुंची

By Prabhat Khabar Digital Desk
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नयी दिल्ली : देश की अर्थव्यवस्था में जारी सुस्ती में फिलहाल सुधार होता नहीं दिख रहा. बिजली, खनन और विनिर्माण क्षेत्रों के कमजोर प्रदर्शन के कारण औद्योगिक उत्पादन (आईआईपी) अक्टूबर महीने में 3.8 फीसदी घट गया. वहीं, प्याज सहित अन्य सब्जियों, दाल और मांस, मछली जैसी प्रोटीन वाली वस्तुओं के दाम चढ़ने से नवंबर माह में खुदरा मुद्रास्फीति की दर बढ़कर 5.54 फीसदी पर पहुंच गयी. एक तरफ जहां लगातार तीसरे महीने ओद्योगिक उत्पादन में गिरावट आयी, वहीं खुदरा मुद्रास्फीति का यह स्तर तीन साल के उच्च स्तर पर पहुंच गयी.

खुदरा मुद्रास्फीति नवंबर महीने में रिजर्व बैंक के मध्यम अवधि के 4 फीसदी के लक्ष्य को पार कर गयी. इससे केंद्रीय बैंक का पिछले सप्ताह मौद्रिक नीति समीक्षा में नीतिगत दर में कोई बदलाव नहीं करने का निर्णय उपयुक्त लगता है. केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, महीने के दौरान सब्जी, दाल और प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थों के महंगा होने से उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित खुदरा मुद्रास्फीति नवंबर महीने में 40 महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गयी. इससे पहले, जुलाई 2016 में खुदरा महंगाई दर 6.07 फीसदी थी. अक्टूबर में यह 4.62 फीसदी तथा नवंबर 2018 में 2.33 फीसदी थी.

इक्रा की प्रमुख अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा कि 2020 की शुरुआत में सब्जियों के दाम नीचे आने से खाद्य मुद्रास्फीति पर काफी हद तक अंकुश लगेगा. भूजल और जलाशयों के बेहतर स्तर से रबी उत्पादन और मोटे अनाजों का उत्पादन अच्छा रहेगा. हालांकि, इसके साथ ही उन्होंने कहा कि रबी दलहन और तिलहन के बुवाई क्षेत्र में सालाना आधार पर जो गिरावट आयी है, वह चिंता का विषय है.

नवंबर 2019 में सबसे ज्यादा सब्जियों के दाम में 35.99 फीसदी वृद्धि दर्ज की गयी. अक्टूबर में यह 26.10 फीसदी थी. इसी तरह, नवंबर में मोटे अनाज की मुद्रास्फीति बढ़कर 3.71 फीसदी पर पहुंच गयी. मीट और मछली की मुद्रास्फीति सालाना आधार पर 9.38 फीसदी बढ़ी. अंडे में भी नवंबर में 6.2 फीसदी वृद्धि दर्ज की गयी. दालों और उससे जुड़े उत्पादों की मुद्रास्फीति महीने के दौरान बढ़कर 13.94 फीसदी रही. ईंधन और प्रकाश श्रेणी में कीमतों में 1.93 फीसदी की गिरावट आयी.

वहीं, बिजली, खनन और विनिर्माण क्षेत्रों के कमजोर प्रदर्शन के कारण औद्योगिक उत्पादन (आईआईपी) अक्टूबर महीने में 3.8 फीसदी घट गया. आधिकारिक आंकड़े के अनुसार, औद्योगिक उत्पादन में सितंबर महीने में 4.3 फीसदी और अगस्त महीने में 1.4 फीसदी की गिरावट आयी थी. वहीं, जुलाई में इसमें 4.9 फीसदी की वृद्धि हुई थी. औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) के रूप में मापे जाने वाले औद्योगिक उत्पादन में एक साल पहले इसी माह में 8.4 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गयी थी.

उल्लेखनीय है कि देश की आर्थिक वृद्धि दर चालू वत्त वर्ष की दूसरी तिमाही में 4.5 फीसदी रही, जो छह साल का न्यूनतम स्तर है. पहली तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद वृद्धि दर 5 फीसदी रही थी. आंकड़े के अनुसार, अप्रैल-अक्टूबर के दौरान आईआईपी 0.5 फीसदी वृद्धि के साथ लगभग स्थिर रहा, जबकि पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में इसमें 5.7 फीसदी की वृद्धि हुई थी.

विनिर्माण क्षेत्र में अक्टूबर महीने में 2.1 फीसदी की गिरावट आयी, जबकि एक साल पहले इसी महीने में इसमें 8.2 फीसदी की वृद्धि हुई थी. बिजली उत्पादन में अक्टूबर 2019 में तीव्र 12.2 फीसदी की गिरावट आयी, जबकि पिछले साल इसी महीने इसमें 10.8 फीसदी की वृद्धि हुई थी. खनन उत्पादन भी आलोच्य महीने में 8 फीसदी गिरा, जबकि पिछले वित्त वर्ष के इसी महीने में इसमें 7.3 फीसदी की वृद्धि हुई थी.

निवेश का आईना माना जाने वाला पूंजीगत वस्तुओं का उत्पादन अक्टूबर में 21.9 फीसदी घटा, जबकि एक साल पहले इसी महीने में इसमें 16.9 फीसदी की वृद्धि हुई थी. आंकड़ों के अनुसार, उद्योगों के संदर्भ में विनिर्माण क्षेत्र से जुड़े 23 औद्योगिक समूह में से 18 की वृद्धि दर में इस साल अक्टूबर महीने में पछले वर्ष के इसी माह के मुकाबले गिरावट आयी है.

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