SEBI चीफ अजय त्यागी ने कहा, बाजार नियामक को और शक्तियों की जरूरत है...

नयी दिल्ली : सेबी प्रमुख अजय त्यागी ने बुधवार को कहा कि नियामक सभी मामलों में सोच-समझकर और चर्चा के आधार पर रुख अपनाता है, लेकिन उसे गड़बड़ी का खुलासा करने वालों (व्हिसल ब्लोअर) के बीच भरोसा पैदा करने के लिए संभवत: अधिक शक्तियों की जरूरत है. त्यागी ने सूचना प्रौद्योगिकी कंपनी इन्फोसिस के खिलाफ […]
नयी दिल्ली : सेबी प्रमुख अजय त्यागी ने बुधवार को कहा कि नियामक सभी मामलों में सोच-समझकर और चर्चा के आधार पर रुख अपनाता है, लेकिन उसे गड़बड़ी का खुलासा करने वालों (व्हिसल ब्लोअर) के बीच भरोसा पैदा करने के लिए संभवत: अधिक शक्तियों की जरूरत है. त्यागी ने सूचना प्रौद्योगिकी कंपनी इन्फोसिस के खिलाफ गड़बड़ी उजागर करने वाले के सेबी के बजाय अमेरिकी नियामकी एसईसी के पास जाने की पृष्ठभूमि में यह बात कही. इन्फोसिस अमेरिका में भी सूचीबद्ध है.
सेबी प्रमुख ने शिकायतों का खुलासा नहीं करने को लेकर कड़ा संदेश भी दिया. उन्होंने कहा कि जो कंपनियां गड़बड़ी उजागर करने वालों की शिकायतों के ‘ठोस’ नहीं होने के आधार पर उनका खुलासा नहीं करती हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई की जायेगी. उन्होंने कहा कि विभिन्न मुद्दों पर हमारा रुख युक्तिसंगत रहता है. हर मसले पर बाजार प्रतिभागियों के साथ चर्चा की जाती है. हम इस मामले में मध्यस्थों, बाजार प्रतिभागियों के साथ परामर्श करेंगे और इस संदर्भ में जो भी कुछ करने की जरूरत है, हम प्रक्रिया का अनुपालन करेंगे.
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के निदेशक मंडल की बैठक के बाद संवाददाताओं से बातचीत में त्यागी ने यह बात कही. उनसे पूछा गया था कि क्या सेबी के पास पर्याप्त शक्ति है. गड़बड़ी उजागर करने वाले के किसी अन्य देश के नियामक के पास जाने के बारे में पूछे जाने पर सेबी प्रमुख ने कहा कि इसका कोई जवाब नहीं है, लेकिन यह इस विचार के उलट है कि सेबी के पास काफी शक्तियां हैं.
उन्होंने कहा कि आखिर कोई क्यों शिकायत को लेकर अन्य देश के नियामक के पास जाएगा? मेरे पास इसका जवाब नहीं है, लेकिन यह आपके विचार के उलट है कि सेबी के पास काफी शक्तियां हैं. वास्तव में नियामक को गड़बड़ी का खुलासा करने वालों के बीच भरोसा पैदा करने के लिये संभवत: और शक्तियों की जरूरत है. सेबी इन्फोसिस में कथित चूक के मामले को देख रहा है.
त्यागी ने शिकायतों का खुलासा नहीं करने को लेकर कड़ा संदेश भी दिया. उन्होंने कहा कि जो कंपनियां गड़बड़ी उजागर करने वालों की शिकायतों को ‘ठोस’ नहीं होने के आधार पर खुलासा नहीं करती हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई की जायेगी. उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि अगर कंपनियां धारणा मजबूत बनाने के लिए खुलासा की गयी सूचना में बेवकूफ बनाती है, उनके खिलाफ कार्रवाई की जायेगी.
चेयरमैन और प्रबंध निदेशक पदों को अलग किये जाने को लेकर कुछ तबकों में चिंता के बीच सेबी चेयरमैन ने यह भी कहा कि शीर्ष 500 कंपनियों में से दो तिहाई कंपनियां पहले ही इसका अनुपालन कर रही हैं. कंपनी संचालन रूपरेखा को मजबूत करने के प्रयास के तहत नियामक ने सूचीबद्ध कंपनियों से चेयरमैन और प्रबंध निदेशक का पद अलग करने को कहा है. यह नियम अगले साल एक अप्रैल से प्रभावी होगा. इस संबंध में नियमन को मई 2018 में अधिसूचित किया गया और इसके पीछे विचार यह था कि लोग इसे समझ सकें और समय रहते इस संदर्भ में योजना बना सकें.
त्यागी ने कहा कि कंपनियों को पर्याप्त समय दिया गया है तथा इसे और बढ़ाने का मतलब होगा कि वे (कंपनियां) इसे लागू नहीं करना चाहती हैं. यदि बोर्ड (चेयरमैन) और उसका प्रबंधन (सीईओ) अलग-अलग हो, तब संभवत: शक्तियों तथा जवाबदेही के साथ निर्णय लेने के मामले में संतुलन हो सकता है.
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