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अमेरिका से आयात बढ़ायेगा भारत, द्विपक्षीय व्यापार के मतभेदों को दूर करने पर बनी सहमति

Updated at : 26 Aug 2019 10:04 PM (IST)
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अमेरिका से आयात बढ़ायेगा भारत, द्विपक्षीय व्यापार के मतभेदों को दूर करने पर बनी सहमति

बिआरित्ज/लंदन : भारत की योजना अमेरिका से तेल और अन्य आयात बढ़ाने की है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ बैठक में उन्हें यह जानकारी दी. प्रधानमंत्री ने कहा कि अमेरिका से चार अरब डॉलर मूल्य के आयात की योजना तैयार है. मोदी का यह बयान ऐसे समय […]

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बिआरित्ज/लंदन : भारत की योजना अमेरिका से तेल और अन्य आयात बढ़ाने की है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ बैठक में उन्हें यह जानकारी दी. प्रधानमंत्री ने कहा कि अमेरिका से चार अरब डॉलर मूल्य के आयात की योजना तैयार है.

मोदी का यह बयान ऐसे समय आया है जबकि दोनों व्यापार मुद्दों को लेकर आपसी मतभेदों को सुलझाने का प्रयास कर रहे हैं. दोनों देशों के बीच विभिन्न व्यापारिक और आर्थिक मुद्दों पर मतभेदों के मद्देनजर मोदी और ट्रंप की इस बैठक को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. फ्रांस के बिआरित्ज शहर में मोदी-ट्रंप की यह बैठक जी-7 शिखर सम्मेलन के मौके पर अलग से हुई. भारत इसमें विशेष आमंत्रित सदस्य है. दोनों नेताओं में इस बात पर भी सहमति बनी कि प्रधानमंत्री की अगले महीने की अमेरिका यात्रा से पहले दोनों देशों के वाणिज्य मंत्री व्यापार से जुड़े सभी मुद्दों पर विचार-विमर्श करें. मोदी-ट्रंप की 40 मिनट की बैठक का ब्योरा देते हुए विदेश सचिव विजय गोखले ने संवाददाताओं से कहा कि वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल को पहले ही वाशिंगटन जाना था, लेकिन यह कार्यक्रम बन नहीं पाया.

वाशिंगटन में मोदी-ट्रंप बैठक के बारे में जारी वक्तव्य में कहा गया है कि दोनों नेताओं ने रणनीतिक भागीदारी का विस्तार करने पर चर्चा की. साथ ही बैठक में द्विपक्षीय व्यापार बड़े स्तर पर बढ़ाने के बारे में भी बातचीत हुई. हालांकि, दोनों देशों के लगातार बढ़ रहे द्विपक्षीय रणनीतिक संबंधों में व्यापारिक संबंध एक महत्वपूर्ण पहलू है, लेकिन हाल के महीनों में बाजार खोलने और शुल्कों को लेकर उत्पन्न विवाद के बढ़ने से लंबा विवाद पैदा होने की आशंका बन गयी है. राष्ट्रपति ट्रंप इससे पहले भारत को ‘शुल्कों का राजा’ भी बता चुके हैं. जापान के ओसाका में जी-20 शिखर बैठक के मौके पर अलग से हुई बैठक में ट्रंप ने भारत द्वारा अमेरिका के उत्पादों पर से ‘ऊंचा शुल्क’ वापस लेने की मांग की थी.

गोखले ने कहा, प्रधानमंत्री ने अमेरिका से ऊर्जा के आयात के महत्व पर बात की. उन्होंने यह भी बताया कि चार अरब डॉलर का आयात पहले से पाइपलाइन में है तथा इसे और बढ़ाया जायेगा. वित्त वर्ष 2017-18 में अमेरिका को भारत का निर्यात 47.9 अरब डॉलर और आयात 26.7 अरब डॉलर रहा था. व्यापार संतुलन भारत के पक्ष में झुका हुआ है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री सितंबर में संयुक्तराष्ट्र महासभा में भाग लेने अमेरिका जायेंगे. वह अमेरिका की ईंधन की राजधानी माने जाने वाले ह्यूस्टन शहर भी जायेंगे. प्रधानमंत्री 22 सितंबर को वहां भारतीय समुदाय को संबोधित करेंगे. उन्होंने बताया कि ह्यूस्टन में मोदी अमेरिका की ऊर्जा कंपनियों के शीर्ष मुख्य कार्यकारियों के साथ गोलमेज में भाग लेंगे.

गोखले ने कहा कि इसके दो उद्देश्य हैं. कैसे भारत अमेरिका से तेल का आयात बढ़ा सकता है और दूसरा यह कि कैसे हम अमेरिका के ऊर्जा क्षेत्र में निवेश कर सकते हैं. गोखले ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने इस बात का गर्मजोशी से जिक्र किया कि भारत दुनिया का प्रमुख ऊर्जा आयातक बन चुका है. ट्रंप ने इस बात का भी संकेत दिया कि वह प्रशासन के शीर्ष अधिकारियों को ह्यूस्टन भेज सकते हैं जिससे द्विपक्षीय ऊर्जा संबंधों को आगे बढ़ाया जा सके. विदेश सचिव ने कहा कि दोनों नेताओं की द्विपक्षीय बैठक काफी सकारात्मक रही. गोखले ने बताया कि मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के करीब 100 दिन में दोनों नेताओं के बीच यह तीसरी बैठक या बातचीत हुई है. जून में राष्ट्रपति ट्रंप ने प्राथमिकता की सामान्य प्रणाली (जीएसपी) के तहत भारत का लाभार्थी विकासशील राष्ट्र का दर्जा वापस ले लिया था. अमेरिका ने कहा था कि भारत ने उसे यह आश्वासन नहीं दिया है कि वह उसे समानता के आधार पर समुचित बाजार उपलब्ध करायेगा.

जीएसपी अमेरिका का व्यापार में तरजीह देने का सबसे पुराना कार्यक्रम है. इसमें लाभार्थी देशों से हजारों उत्पादों को शुल्क मुक्त प्रवेश देकर आर्थिक विकास को प्रोत्साहन दिया जाता है. इससे पहले ट्रंप ने प्रसिद्ध हर्ले डेविडसन मोटरसाइकिलों पर भारत द्वारा लिये जाने वाले ऊंचे शुल्क को भी ‘अस्वीकार्य’ बताया था. कई अमेरिकी कंपनियां मसलन गूगल, मास्टरकार्ड, वीजा और अमेजन डेटा के स्थनीयकरण के मुद्दे पर चिंता जता चुकी हैं. पिछले साल अप्रैल रिजर्व बैंक ने भुगतान प्रणाली के आंकड़ों के स्टोरेज पर निर्देश जारी किया था. भारत ने भुगतान प्रणाली चलाने वाली कंपनियों को छह माह के भीतर यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था कि उनकी सभी भुगतान प्रणालियों के भारत संबंधी डेटा भारत में ही स्टोर किये जायें. इस्पात एवं एल्युमीनियम पर आयात शुल्क के मुद्दे पर भारत ने अमेरिका को विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) की विवाद निपटान व्यवस्था में भी घसीटा है.

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