संतुलित मनोस्थिति के साथ करें निवेश, बेहतर होगा परिणाम
Author Prabhat khabar digital desk
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शशांक भारद्वाज, वाइस प्रेसिडेंट, चॉइस ब्रोकिंग शेयर बाजार या इक्विटी आधारित म्यूचुअल फंड में निवेश पर रिटर्न के संबंध में अधिसंख्य निवेशकों का रवैया अतिवादी सा रहता है. वे या तो अत्यधिक अवास्तविक सकारात्मक हो जाते हैं या निराशावादी और नकारात्मक हो जाते हैं. जबकि होना यह चाहिए कि वे संतुलित सोच और व्यवहार रखें. […]
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शशांक भारद्वाज, वाइस प्रेसिडेंट, चॉइस ब्रोकिंग
शेयर बाजार या इक्विटी आधारित म्यूचुअल फंड में निवेश पर रिटर्न के संबंध में अधिसंख्य निवेशकों का रवैया अतिवादी सा रहता है. वे या तो अत्यधिक अवास्तविक सकारात्मक हो जाते हैं या निराशावादी और नकारात्मक हो जाते हैं.
जबकि होना यह चाहिए कि वे संतुलित सोच और व्यवहार रखें. सफल निवेशक और अपने निवेश पर अच्छे रिटर्न के लिए यह बहुत आवश्यक है. शेयर बाजार की तो प्रकृति ही है ऊपर-नीचे होना. इससे विचलित और आश्चर्यचकित नहीं होना चाहिए. परिहास में यह भी कहा जाता है कि शेयर बाजार में उतार चढ़ाव न हो, तो चिंतित हो जाइए कि कहीं कुछ बड़ा होने वाला है. थोड़ा सावधान हो जाइए.
मुद्दा यह है कि शेयर मार्केट में रिटर्न बहुत अधिक भी हो सकता है, पर अपेक्षा तो संतुलित और रिजनेबल ही रखनी चाहिए. इससे निवेश के लिए उपयुक्त मानसिकता कायम रहती है और अच्छे प्रतिफल की संभावनाएं बलवती होती हैं.
शेयर बाजार में दुनिया के सबसे सफल निवेशक माने जाने वाले वारेन बफेट का औसत वार्षिक रिटर्न क्या है. लगभग 18 प्रतिशत चक्रवृद्धि वार्षिक. इस रिटर्न ने उन्हें विश्व के सबसे सफल निवेशकों की श्रेणी में ला खड़ा किया है. यह रिटर्न उन्हें लगातार और लंबे समय के लिए मिला. इसलिए एक थ्योरी यह भी कहती है कि सिर्फ एक मुश्त ही बहुत ज्यादा रिटर्न से अच्छा लंबे समय तक लगातार औसत रिटर्न प्राप्त करना होता है.
लब्बो लुआब यह है कि औसत रिटर्न से भी एक बड़ी धनराशि खड़ी की जा सकती है. इसलिए बहुत एब्नार्मल रिटर्न की अपेक्षा में दुबला नहीं होना चाहिए. यह सही है कि यहां रिस्क ज्यादा है, पर रिटर्न भी उसी अनुपात में अधिक होने की संभावना रहती है. रिस्क सभी जगह होता है, कम या अधिक. रिस्क विलुप्त नहीं किया जा सकता, उसे बांटा जा सकता है.
ऐसे में अगर लगभग 20 शेयरों का पोर्टफोलियो बनाया जाये, तो एक शेयर पर रिस्क पांच प्रतिशत का हो जाता है और इस तरह रिस्क बहुत हद तक बंट जाता है. इसलिए बाजार के उतार-चढ़ाव से ज्यादा विचलित हुए बिना स्थितप्रज्ञ भाव से निवेश का निर्णय लेना चाहिए, रिस्क को बांट कर रखना चाहिए और अच्छे समय की प्रतीक्षा करनी चाहिए.
विश्व में जो भी सर्वोच्च धनी व्यक्ति हैं, वे आने शेयरों के मूल्यों के बल पर ही धनी हैं. और जब अब फिक्स्ड डिपाॅजिट आदि से रिटर्न काफी कम हो गये हैं, ऐसे में शेयरों में निवेश से ही अच्छा रिटर्न प्राप्त किया जा सकता है और यह एक औसत वार्षिक रिटर्न से भी संभव है, बशर्ते यह लंबी अवधि में लगातार मिलता रहे.
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