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दावोस में हर साल क्यों जुटते हैं दुनिया के दिग्गज ?

Updated at : 22 Jan 2018 7:00 PM (IST)
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दावोस में हर साल क्यों जुटते हैं दुनिया के दिग्गज ?

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की 48 वीं बैठक दुनिया भर में चर्चा का विषय है. आज से आयोजित हो रहे इस सम्मेलन में दुनिया के कई दिग्गज जुटेंगे. पांच दिन तक चलने वाली इस बैठक में व्यापार, राजनीति, कला, शिक्षा और नागरिक समाज से जुड़ी 3,000 से अधिक शख्सियतें शिरकत करेंगी. भारत की ओर से 130 […]

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वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की 48 वीं बैठक दुनिया भर में चर्चा का विषय है. आज से आयोजित हो रहे इस सम्मेलन में दुनिया के कई दिग्गज जुटेंगे. पांच दिन तक चलने वाली इस बैठक में व्यापार, राजनीति, कला, शिक्षा और नागरिक समाज से जुड़ी 3,000 से अधिक शख्सियतें शिरकत करेंगी. भारत की ओर से 130 से ज्यादा प्रतिभागी सम्मिलित होंगे. वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम दुनिया भर में आर्थिक चर्चा का प्रसिद्ध प्लेटफार्म बन चुका है.

क्या है वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम
यह एक स्विस गैरलाभकारी संस्था है. इस संगठन का मुख्य उद्देश्य दुनिया में व्यापार, राजनीति, अकादमिक और अन्य नेताओं को एक मंच में लाना, ताकि क्षेत्रीय, वैश्विक और औद्योगिक एजेंडा तय हो सके. जनवरी महीने में दावोस शहर में होने वाले इस सम्मेलन पर दुनिया भर की निगाह होती है. यह संगठन छह क्षेत्रीय सम्मेलनों का भी आयोजन करता है. यह सम्मेलन दुनिया के अलग – अलग हिस्सों में आयोजित होती है. इनमें अफ्रीका, पूर्वी एशिया, लैटिन अमेरिका, चीन और संयुक्त अरब अमीरात शामिल है.
स्थापना
वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की स्थापना 1971 में हुई. इसकी स्थापना क्लूस श्वाब ने किया था. श्वाब बिजनेस स्टडी के प्रोफेसर थे. उन्होंने पहले इसका नाम यूरोपियन मैनेजमेंट फोरम रखा लेकिन जब इस संस्थान ने रफ्तार पकड़ी तो 1981 में इसका नाम बदलकर वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम रख दिया गया. वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम को यूरोपियन कमीशन और यूरोपियन इंडस्ट्रियल एसोसिएशन से काफी मदद मिली. 1971में जब इस फोरम की शुरुआत हुई तो संस्थापक ने सम्मेलन में 444 एक्जक्यूटिव को आमंत्रित किया.
धीरे – धीरे इस संगठन की प्रतिष्ठा इतनी बढ़ी कि यहां दो देशों के बीच संधियां तक होने लगे. 1988 में ग्रीस और तुर्की के बीच इसी तरह के कुछ समझौते हुए. इस सम्मेलन में हिस्सा लेने कभी नेल्सन मंडेला भी पहुंचे थे. 1994 में कट्टर दुश्मन समझे जाने वाले इजरायल के विदेश मंत्री और फिलस्तीन के नेता यासार अराफात की भी मुलाकात इसी मंच पर हुई. वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की पहचान निष्पक्ष संस्थान की कायम रही. इस संगठन ने उत्तर कोरिया को भी आमंत्रण पत्र भेजा. वर्ल्ड इकोनॉ़मिक फोरम इसके अतिरिक्त वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम उत्कृष्ट योगदान करने वालों को सम्मानित भी करता है.
वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम को अभिजात्य समाज को बढ़ावा देने का आरोप लगता रहा है. तमाम तरह के आलोचना के बीच इस संस्था की लोकप्रियता अब भी कायम है.
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