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बैंक ऑफ इंडिया भी कर रहा बचत खातों की दर में कटौती पर विचार, जानें और किस बैंक ने की कटौती

Updated at : 21 Aug 2017 6:00 PM (IST)
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बैंक ऑफ इंडिया भी कर रहा बचत खातों की दर में कटौती पर विचार, जानें और किस बैंक ने की कटौती

कोयंबटूर :सार्वजनिक क्षेत्र का बैंक ऑफ इंडिया भी स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की तर्ज पर बचत खातों के ब्याज दर में कटौती करने पर विचार कर रहा है. बैंक के कार्यकारी निदेशक आरएस शंकरनारायणन ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘ ‘बचत खातों की दर तथा जमा राशि की ब्याज दर में कटौती पर विचार किया […]

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कोयंबटूर :सार्वजनिक क्षेत्र का बैंक ऑफ इंडिया भी स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की तर्ज पर बचत खातों के ब्याज दर में कटौती करने पर विचार कर रहा है. बैंक के कार्यकारी निदेशक आरएस शंकरनारायणन ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘ ‘बचत खातों की दर तथा जमा राशि की ब्याज दर में कटौती पर विचार किया जा रहा है. बचत खाते की दर हो सकता है तुरंत कम न की जाए पर इसपर विचार किया जा रहा है. ‘ ‘ उन्होंने कहा कि बैंक इस साल आगे भी अच्छे कारोबार की उम्मीद करता है. इस वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही में इसने 88 करोड रुपये का मुनाफा कमाया था.

25लाख रपये तक की जमा राशि वाले बचत खातों पर ब्याज दर में0.50फीसदी की कटौती

सार्वजनिक क्षेत्र के देना बैंक ने 25 लाख रपये तक की जमा राशि वाले बचत खातों पर ब्याज दर में 0.50 फीसदी की कटौती की है. इन बचत खातों पर अब 3.5 फीसदी ब्याज मिलेगा. बैंक ने एक बयान जारी कर बताया कि 25 लाख रपये से अधिक की जमा राशि वाले बचत खातों पर हालांकि, चार प्रतिशत की दर से ब्याज मिलता रहेगा.

देश के सबसे बडे बैंक भारतीय स्टेट बैंक द्वारा बचत खातों पर ब्याज दर में कटौती करने के बाद कई बैंक इस तरह का कदम उठा चुके हैं और अब देना बैंक भी उनमें शामिल हो गया है. बचत खातों पर ब्याज दर कम करने वाले बैंकों में एचडीएफसी बैंक, बैंक ऑफ बडौदा, पंजाब नेशनल बैंक, एक्सिस बैंक, यस बैंक और कर्नाटका बैंक शामिल हो चुके हैं.

बैंक हडताल के लिए सरकारी उदासीनता जिम्मेदार: एनओबीडब्ल्यू

भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) से जुडे बैंक कर्मियों के एक संगठन ने सरकारी बैंकों में कल होने वाली हडताल के लिए कर्मचारियों की मांगों के प्रति सरकार की उदासीनता को जिम्मेदार ठहराया है. गैर तलब है कि सार्वजनिक बैंकों के निजीकरण और विलय के खिलाफ बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों के संयुक्त संगठन ‘यूनाइटेड फोरम आफ बैंक यूनियंस ‘ ने मंगलवार 22 अगस्त को राष्ट्रव्यापी हडताल का आह्वान किया है. यूनियनों का दावा है कि इस हडताल को बैंकों की पांच कर्मचारी और चार अधिकारी यूनियनों के करीब 10 लाख बैंक कर्मियों का समर्थन प्राप्त है.

बीएमएस से सम्बद्ध नेशनल ऑर्गनाइजेशन ऑफ बैंक वर्कर्स (एनओबीडब्ल्यू) की आज यहां जारी विज्ञप्ति के अनुसार सरकार ने हडताल को टालने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए हैं. इसलिए हडताल के कारण बैंक ग्राहकों को होने वाली किसी भी दिक्कत के लिए सीधे सरकार ही जिम्मेदार होगी. यूनियनों ने हडताल के लिए 3 अगस्त को ही नोटिस दे दिया था. एनओबीडब्ल्यू के उपाध्यक्ष अश्विनी राणा ने कहा है कि सरकार बैंक कर्मियों की मांग को लेकर ‘उदासीन ‘ बनी हुई है.

राणा ने कहा कि यदि सरकार ने इन मांगों पर गौर नहीं किया तो आने वाले दिनों में और भी हडताल हो सकती हैं. बैंक कर्मचारियों की यह हडताल बैंकों के निजीकरण और विलय के खिलाफ है. बैंक यूनियनों की मांग है कि बैंकों में सभी पदों पर भर्ती की जाये और बैंकों में अनुकंपा के आधार पर नियुक्तियां भी की जायें. यूनियनों का कहना है कि नोटबंदी के दौरान बैंक कर्मचारियों ने कई घंटे अतिरिक्त बैठक काम किया है. उन्हें अतिरिक्त काम का ओवरटाइम दिया जाना चाहिये.

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