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नोएडा अथॉरिटी ने जेपी इन्फ्राटेक के निवेशकों को दिया भरोसा, कहा-नहीं डूबने देंगे खून-पसीने की कमाई

Updated at : 12 Aug 2017 10:37 AM (IST)
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नोएडा अथॉरिटी ने जेपी इन्फ्राटेक के निवेशकों को दिया भरोसा, कहा-नहीं डूबने देंगे खून-पसीने की कमाई

नयी दिल्ली: नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीटीएल) की ओर से रियल एस्टेट कंपनी जेपी इन्फ्राटेक को दिवालिया घोषित किये जाने की मंजूरी देने के बाद नोएडा अथॉरिटी ने निवेशकों को भरोसा देते हुए कहा कि उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है. एनसीटीएल की ओर से जेपी इन्फ्राटेक के खिलाफ मंजूरी दिये जाने के बाद उसकी […]

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नयी दिल्ली: नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीटीएल) की ओर से रियल एस्टेट कंपनी जेपी इन्फ्राटेक को दिवालिया घोषित किये जाने की मंजूरी देने के बाद नोएडा अथॉरिटी ने निवेशकों को भरोसा देते हुए कहा कि उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है. एनसीटीएल की ओर से जेपी इन्फ्राटेक के खिलाफ मंजूरी दिये जाने के बाद उसकी आवासीय परियोजना में निवेश करने वाले काफी परेशान नजर आ रहे थे. उनकी परेशानियों को दूर करने के लिए नोएडा अथॉरिटी की ओर से यह भरोसा दिया है.

इस खबर को भी पढ़ें: दिवालिया होने के कगार पर जेपी इंफ्रा, एनसीएलटी ने आर्इडीबीआर्इ की याचिका को दी मंजूरी

नोएडा अथॉरिटी के सीईओ अमित मोहन प्रसाद ने कहा कि वह जल्द ही एक प्लान लायंगे, जिससे जेपी के करीब 32,000 निवेशकों के हितों की रक्षा हो सके. उन्होंने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि हम निवेशकों के खून-पसीने की कमाई को डूबने नहीं देंगे. यह नियमों का उल्लंघन किया गया, तो हम डिवेलपर के खिलाफ कठोर कार्रवाई करेंगे.
जेपी ने इस साल अप्रैल में मेगा हाउजिंग प्रॉजेक्ट के सभी निवेशकों को 2020 तक फ्लैट देने का वादा किया था, लेकिन अभी तक केवल 6,500 लोगों को फ्लैट मिल पाया है. कंपनी की ओर से विश टाउन में 32,000 फ्लैट का निर्माण कराया गया है. शुक्रवार को कंपनी के नोएडा 128 सेक्टर स्थित कॉर्पोरेट ऑफिस के बाहर बड़ी संख्या में जेपी के निवेशक पहुंचे और अपनी उसके खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की थी. लोगों ने अधिकारियों से बात की और अपने प्रॉजेक्ट के बारे में सवाल किया. अधिकारियों ने उन्हें समय पर घर देने का भरोसा भी दिया.
हालांकि, निवेशकों ने शनिवार को जेपी ऑफिस से नोएडा पुलिस चीफ ऑफिस तक प्रोटेस्ट मार्च निकालने की घोषणा भी की. विश टाउन फ्लैट बायर प्रमोद कुमार ने कहा कि चिंता की बात यह है कि यदि कंपनी दिवालिया घोषित हो जाती है, तो बिल्डर के खिलाफ हमारे सभी केस निष्प्रभावी हो जायेंगे. हम पुलिस से यह भी पूछेंगे कि उस एफआईआर का क्या हुआ, जो हमने अप्रैल में बिल्डर के खिलाफ दायर किया था. क्या कोई जांच की गई?
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