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कॉलगेट के सीइओ इयान कुक ने बताया कैसे बाबा रामदेव की पतंजलि दंतकांति पड़ रहा है भारी

Updated at : 24 Jul 2017 11:47 AM (IST)
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कॉलगेट के सीइओ इयान कुक ने बताया कैसे बाबा रामदेव की पतंजलि दंतकांति पड़ रहा है भारी

नयी दिल्लीः पतंजलि के प्रवर्तक आैर योग गुरु बाबा रामदेव का देसी अंदाज में अपने उत्पादों को बाजार में पेश करने से विदेशी कंपनियों की पेशानी पर चिंता की लकीरें साफ दिखार्इ देने लगी हैं. बताया जा रहा है कि बाबा रामदेव की आेर से दांतों की सफार्इ के लिए बाजार में पेश किये गये […]

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नयी दिल्लीः पतंजलि के प्रवर्तक आैर योग गुरु बाबा रामदेव का देसी अंदाज में अपने उत्पादों को बाजार में पेश करने से विदेशी कंपनियों की पेशानी पर चिंता की लकीरें साफ दिखार्इ देने लगी हैं. बताया जा रहा है कि बाबा रामदेव की आेर से दांतों की सफार्इ के लिए बाजार में पेश किये गये दंतकांति दंत मंजन आैर पेस्ट से काॅलगेट की चमक फीकी पड़ गयी है. इसी का नतीजा है कि काॅलगेट पामोलिव के वैश्विक कार्यकारी अधिकारी (सीर्इआे) ने एक बैठक के दौरान बाबा रामदेव के पतंजलि उत्पादों को अपना प्रतिद्वंद्वी माना है. पिछले दिनों मीटिंग में कंपनी के सीइओ इयान कुक ने बताया कि आखिर कैसे बाबा रामदेव की पतंजलि उनके उत्पाद पर भारी पड़ रही है और इसका मुकाबला कैसे किया जा सकता है. याद रहे कि एक बार अपने उत्पाद की सफलता व कॉलगेट की गिरावट पर बाबा रामदेव ने कटाक्ष व व्यंग करते हुए कहा था कि कॉलगेट का गेट बंद हो जायेगा.

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कंपनी के वैश्विक सीर्इआे इयान कुक ने बीते हफ्ते शुक्रवार को कहा था कि भारत में पतंजलि अपने कारोबार को बेहद देसी अंदाज में पेश करती है.उसमें राष्ट्रीयता की भी पुट होती है. स्थानीय बाजारों की यही अवधारणा है. पतंजलि उत्पादों के आरंभिक कीमतों पर ध्यान केंद्रित करती है. इसका मतलब यह है कि बाजार में कंपनी को एेसी रणनीतियों का मुकाबला करना है, जिसे खास तौर पर प्रतिस्पर्द्धा के लिए तैयार किया गया है. इस प्रकार की रणनीतियां अक्सर अन्य कंपनियों की आमदनी आैर उसके मुनाफे पर हमला करती हैं. उत्पादों का आरंभिक दाम कम होने से उपभोक्ता का रुझान गुणवत्तापूर्ण सामग्री के बजाय कम कीमत वाले उत्पादों की आेर अधिक होता है.

काॅलगेट पामोलिव के वैश्विक सीर्इआे का यह बयान तब आया है, जब बाजार में उसके टूथपेस्ट की भारत में बाजार हिस्सेदारी में तेजी से गिरावट दर्ज की गयी है. पिछले साल के मुकाबले से इस साल इसकी बाजार हिस्सेदारी के साथ शेयर में करीब 180 बेसिस पॉइंट्स की गिरावट दर्ज की गयी है. यह एक दशक में सबसे तेज गिरावट मानी जा रही है, क्योंकि भारत के ज्यादातर उपभोक्ता किसी भी वस्तु में आयुर्वेदिक या हर्बल होने का दावा करने वाली कंपनियों के उत्पादों की आेर अधिक ध्यान दे रहे हैं. यही वजह है कि कंपनी की बिक्री में बीते एक वित्त वर्ष के दौरान करीब 4 फीसदी गिरावट दर्ज की गयी है. पिछले साल 2016 के दौरान टूथपेस्ट में 55.6 फीसदी और टूथब्रश में 47.3 फीसदी मार्केट शेयर के साथ कंपनी अब भी भारत में सबसे बड़ी ओरल केयर कंपनी है.

गौरतलब है कि पिछले साल काॅलगेट पामोलिव ने भारत के उपभोक्ताआें के रुझान पर केंद्रित करते हुए पहला आयुर्वेदिक ब्रांड सिबाका वेदशक्ति लॉन्च किया था. साफ तौर पर इसे पतंजलि के दंत कांति टूथपेस्ट के जवाब में उतारा गया. 2016 में नये ब्रैंड का भारत में 0.5 फीसदी मार्केट शेयर रहा. वहीं, उत्तरी और पूर्वी इलाकों में इसकी बाजार हिस्सेदारी एक फीसदी थी. योग गुरु रामदेव के पतंजलि ब्रैंड ने इस सेगमेंट में बहुराष्ट्रीय कंपनियों के दबदबे को चुनौती दी है. हालांकि, उसकी मौजूदगी केवल लगभग दो लाख परंपरागत रिटेल स्टोर्स में है जबकि कोलगेट की मौजूदगी 50 लाख से ज्यादा स्टोर्स में है.

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