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Whatsapp के जरिए दर्ज होगा सनहा और FIR, एसपी ऑफिस से मॉनीटरिंग, बिहार के इन चार जिलों में सुविधा शुरू

Updated at : 27 Jan 2021 2:02 PM (IST)
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Whatsapp के जरिए दर्ज होगा सनहा और FIR, एसपी ऑफिस से मॉनीटरिंग, बिहार के इन चार जिलों में सुविधा शुरू

Bihar News: बाइक चोरी, मोबाइल और पर्स गुम होने की प्राथमिकी या सनहा दर्ज कराने के लिए अब फरियादियों को थाने का चक्कर नहीं काटना होगा. वह व्हाट्सएप (Whatsapp ) कर शिकायत कर सकते हैं. तिरहुत रेंज के आइजी ने पब्लिक फ्रेंडली पुलिसिंग के तहत व्हाट्सएप नंबर 7070201201 जारी किया है.

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Bihar News: बाइक चोरी, मोबाइल और पर्स गुम होने की प्राथमिकी या सनहा दर्ज कराने के लिए अब फरियादियों को थाने का चक्कर नहीं काटना होगा. वह व्हाट्सएप (Whatsapp ) कर शिकायत कर सकते हैं. तिरहुत रेंज के आइजी ने पब्लिक फ्रेंडली पुलिसिंग के तहत व्हाट्सएप नंबर 7070201201 जारी किया है. इस पर मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, शिवहर और वैशाली जिलों के लोग अवेदन दे सकते हैं.

आवेदन पर नाम-पता के साथ- साथ अपना मोबाइल नंबर और पूरा घटनाक्रम लिखकर भेजना होगा. आइजी व संबंधित जिले के पुलिस अधीक्षक के कार्यालय से आवेदन की मॉनीटरिंग होगी. संबंधित थाने में आवेदन पर नियमानुसार कार्यवाही करने के बाद आइजी कार्यालय के मोबाइल नंबर पर आवेदन वापस भेज दिया जायेगा, जहां से उसको फरियादी के मोबाइल पर भेजा जायेगा.

यदि आवेदक को आवेदन की मूल प्रति या सनहा की कॉपी चाहिए तो वह थाने पर जाकर प्राप्त कर सकता है.आइजी ने बताया कि आवेदकों की सुविधा के लिए थाने के बाहर दीवार पर मोबाइल नंबर 7070201201 लिखा जायेगा. इसको लेकर सभी थानेदारों को निर्देश दिया गया है.

तिरहुत रेंज आइजी गणेश कुमार ने कहा कि प्राय: यह देखा जाता है कि बाइक चोरी या किसी वस्तु के गुम हो जाने का सनहा दर्ज कराने को लेकर थाने में फरियादियों को दौड़ाया जाता है. अब उनको थाने का चक्कर नहीं काटना होगा. वे सीधे मोबाइल नंबर पर अपने आवेदन को भेजकर सनहा या प्राथमिकी दर्ज करवा सकते हैं. आइजी व चारों जिलों के एसएसपी/ एसपी कार्यालय से आवेदन की मॉनीटरिंग होगी.

वाहन चोरी : प्राथमिकी के बाद मांगे कागजात

वाहन चोरी की प्राथमिकी करने से पूर्व पूरा कागजात मांगना अनूचित है. पहले प्राथमिकी दर्ज करले उसके बाद कागजात की मांग करें. पूरी प्रक्रिया एक दिन में करनी है. अगर किसी कारण प्राथमिकी नहीं दर्ज की जाती है, तो मैसेज कर थानेदार को कारण बताना होगा. अगर गलत मंशा से आवेदन की प्रमाणित कॉपी देने में थाना स्तर पर देरी की जाती है या आवेदक से पैसे की मांग की जाती है, तो वैसे पदाधिकारी पर सीधी कार्रवाई की जायेगी. साथ ही अगर कोई आवेदक फर्जी एफआइआर दर्ज कराता है, तो उसके खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज की जायेगी.

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Posted by; Utpal kant

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