बिहार में 1500 से अधिक आंगनबाड़ी सेविका- सहायिका चयन मुक्त, विभाग ने लिया फैसला, जानिए कारण

Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 22 Nov 2023 10:19 AM

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‍Bihar News: बिहार में 1500 से अधिक आंगनबाड़ी सेविका व सहायिका चयन मुक्त कर दी गई है. इसे लेकर विभाग ने फैसला लिया है. आंगनबाड़ी सेविका व सहायिका के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का फैसला लिया गया है.

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‍Bihar News: बिहार में 1500 से अधिक आंगनबाड़ी सेविका व सहायिका को चयन मुक्त कर दिया गया है. इसे लेकर विभाग ने फैसला लिया है. विधान मंडल सत्र के दौरान हड़ताल में शामिल सेविका व सहायिका को प्रदर्शन करना महंगा पड़ गया है. समाज कल्याण विभाग ने अबतक 15,900 सेविका- सहायिका को चयनमुक्त कर दिया है. वहीं, जिलों में हड़ताल के कारण जिन आंगनबाड़ी केंद्रों का काम प्रभावित हो रहा है, वहां की सेविका- सहायिका पर कार्रवाई करते हुए उन्हें तुरंत चयन मुक्त करने का निर्देश दिया गया है. विभाग की इस सख्ती के बाद मंगलवार की देर शाम तक 40 हजार 600 केंद्रों पर सेविका- सहायिका काम पर लौट आयी हैं.


राज्य भर में एक लाख 10 हजार के करीब आंगनबाड़ी केंद्र

बता दें कि राज्य भर में एक लाख 10 हजार के करीब आंगनबाड़ी केंद्र हैं. यहां का काम पिछले एक माह से सेविका- सहायिका की हड़ताल के कारण प्रभावित हो रहा है. इस बीच समाज कल्याण मंत्री से संघ के लोगों ने दो बार मुलाकात की, लेकिन बीच का रास्ता नहीं निकल पाया. इसके बाद आंगनबाड़ी केंद्रों के कामकाज को पूर्ण रूप से ठप करके सेविका और सहायिका पटना में धरना- प्रदर्शन करने लगीं. इसके बाद से ही विभाग ने संघ के लोगों से वार्ता नहीं की.

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‘नियमानुसार कार्रवाई करेगा विभाग’

समाज कल्याण विभाग के मंत्री मदन सहनी ने कहा है कि पांच हजार से अधिक सेविका-सहायिकाओं को चयन मुक्त किया गया है. वहीं, 40 हजार से अधिक ने कामकाज संभाल लिया है. जब तक सभी सेविका- सहायिका काम पर नहीं लौटेंगी, इनसे कोई वार्ता नहीं होगी और विभाग नियमानुसार कार्रवाई करेगा. ऑल इंडिया स्कीम वर्कर फेडरेशन के महासचिव शशि यादव ने जानकारी दी है कि सेविका- सहायिकाओं को चयन मुक्त किया जा रहा है. इस डर से वह कामकाज से लौट रहे थे. संघ का आंदोलन कमजोर हुआ है. इस कारण हड़ताल में शामिल लोगों में टूट हुई. विधानमंडल सत्र के दौरान हुई घटना के बाद सरकार ने आंदोलन को खत्म करने के लिए दंडात्मक कार्रवाई शुरू कर दी है.

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