Teghra Vidhan Sabha: CPI का ऐतिहासिक गढ़ अब संकट में? 2025 में भाजपा दे सकती है चुनौती

Published by : Paritosh Shahi Updated At : 12 Jul 2025 8:40 PM

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Teghra Vidhan Sabha: बेगूसराय जिले का तेघरा विधानसभा क्षेत्र बिहार की राजनीति में वामपंथी विचारधारा का ऐतिहासिक गढ़ रहा है. 2020 में CPI ने जबरदस्त वापसी की, लेकिन 2024 लोकसभा चुनाव में भाजपा की बढ़त ने समीकरण बदल दिए हैं. 2025 का चुनाव यहां दिलचस्प होने की संभावना है.

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Teghra Vidhan Sabha: बेगूसराय जिले का तेघरा विधानसभा ना केवल अपने राजनीतिक उतार-चढ़ाव के लिए बल्कि कम्युनिस्ट विचारधारा के मजबूत प्रभाव के लिए भी चर्चित रहा है. इसका राजनीतिक सफर 1951 में शुरू हुआ. 1967 के बाद इसका नाम बदलकर बरौनी कर दिया गया, लेकिन 2008 के परिसीमन के बाद यह फिर तेघरा के नाम से जाना जाने लगा.

तेघरा का इतिहास

तेघरा विधानसभा में अब तक कुल 15 चुनाव इस क्षेत्र में हो चुके हैं. इसमें से 6 बार तेघरा के नाम से और 9 बार बरौनी के नाम से चुनाव हुआ है. तेघरा/बरौनी में CPI ने 1962 से 2005 तक लगातार 10 चुनावों में जीत हासिल की. हालांकि 2008 में परिसीमन के बाद बदलते भूगोल और सामाजिक समीकरणों ने CPI की स्थिति को कमजोर कर दिया.

2010 में BJP ने पहली बार इस सीट पर कब्जा किया और 2015 में RJD ने जीत हासिल की. फिर 2020 में CPI ने दमदार वापसी की. राजद के साथ गठबंधन में यह सीट CPI के खाते में गई और उनके उम्मीदवार ने 47979 वोटों के भारी अंतर से जदयू को शिकस्त दी.

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समीकरण

2020 में तेघरा में 285190 पंजीकृत मतदाता थे, जो 2024 तक बढ़कर 305595 हो गए. इनमें 10.78% अनुसूचित जाति और 13.3% मुस्लिम समुदाय के मतदाता हैं. यहां की जनसंख्या संरचना में ग्रामीण मतदाता 49.84% और शहरी मतदाता 50.16% हैं, जो इसे बिहार के अन्य विधानसभा क्षेत्रों से अलग बनाती है. यहां का औसत मतदान प्रतिशत 59% से 63% के बीच रहा है. 2020 में 60.21% लोगों ने वोट डाला था.

विधानसभा और लोकसभा चुनावों में यहां के रुझान थोड़े अलग होते हैं. उदाहरण के तौर पर देखें तो 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को इस क्षेत्र से 45818 वोटों की बढ़त मिली, जबकि CPI के विधायक यहां से चुनाव जीते हैं. इससे यह साफ है कि तेघरा के मतदाता स्थानीय और राष्ट्रीय चुनावों में अलग-अलग सोच अपनाते हैं.

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लेखक के बारे में

By Paritosh Shahi

परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.

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