Sahebpur Kamal Vidhan Sabha: बेगूसराय के साहेबपुर कमाल में जारी है राजद का वर्चस्व, क्या 2025 में NDA पलटेगी सत्ता?

Published by : Paritosh Shahi Updated At : 13 Jul 2025 2:26 PM

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Sahebpur Kamal Vidhan Sabha: बिहार के बेगूसराय जिले का साहेबपुर कमाल एक महत्वपूर्ण राजनीतिक क्षेत्र है. गंगा नदी के करीब स्थित यह यह एक कृषि आधारित क्षेत्र है. हाल के वर्षों में यहां राजद का वर्चस्व कायम है, क्या 2025 में NDA इस समीकरण को तोड़ पाएगा?

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Sahebpur Kamal Vidhan Sabha: बिहार के बेगूसराय जिले का साहेबपुर कमाल प्रखंड भले ही ऐतिहासिक महत्वता न हो, लेकिन राजनीतिक नक्शे पर इसकी अहमियत लगातार बढ़ रही है. गंगा नदी का समीप स्थित यह इलाका कृषि आधारित अर्थव्यवस्था का मजबूत केंद्र रहा है. चावल, गेंहू और मक्का की पैदावार यहां के लोगों की पीढ़ियों से चलती आ रही है.

भौगोलिक दृष्टि से साहेबपुर शहरों से आसानी से कनेक्ट होता है. यह बेगूसराय जिला मुख्यालय से 30 किलोमीटर, खगड़िया से 20 किलोमीटर और समस्तीपुर से 30 किलोमीटर दूर है, जबकि राज्य की राजधानी पटना से दूरी लगभग 120 किलोमीटर है.

कब बनी थी ये सीट

साहेबपुर कमाल विधानसभा क्षेत्र 2008 के परिसीमन के बाद अस्तित्व में आया और बलिया विधानसभा सीट को समाप्त कर इसकी रचना की गई. इसमें साहेबपुर कमाल और बलिया दोनों विकास खंड शामिल हैं.

मतदाताओं की सूचना

2020 के चुनाव में यहां 249426 मतदाता थें, जो 2024 के लोकसभा चुनाव तक बढ़कर 268879 हो गई है. इनमें अनुसूचित जाति के मतदाता 10% और मुस्लिम मतदाता 16.5% हैं. यह क्षेत्र मुख्य रूप ग्रामीण है, जिसमें शहरी मतदाता केवल 12.63% हैं. 2020 में मतदाता प्रतिशत 62.87 रहा जो इस क्षेत्र के राजनीतिक जागरूकता दर्शाता है.

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क्षेत्र का राजनीतिक समीकरण

राजनीतिक दृष्टि से यह सीट लगातार चर्चा में रही है. 2010 में जदयू ने यहां जीत दर्ज की थी, लेकिन 2015 और 2020 में यह सीट राजद के नाम रही. 2020 में लोजपा ने एनडीए से अलग होकर यहां से उम्मीदवार उतारा और 22,871 वोट प्राप्त किए. इसने जदयू की हार में बड़ी भूमिका निभाई और राजद ने 14,225 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की. अब जब जदयू और लोजपा (रामविलास) फिर से एनडीए में एकजुट हो गए हैं, तो 2025 के चुनाव में यहां कड़ा मुकाबला देखने को मिल सकता है.

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Paritosh Shahi

लेखक के बारे में

By Paritosh Shahi

परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.

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