Hajipur Vidhan Sabha: बदलते समीकरणों में फंसी भाजपा की पारंपरिक सीट, क्या इस बार हो पाएगा कमाल

Published by : Paritosh Shahi Updated At : 11 Jul 2025 5:28 PM

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BJP

Hajipur Vidhan Sabha: बिहार के वैशाली जिले की हाजीपुर विधानसभा सीट राज्य की राजनीति में खास महत्व रखती है. गंगा नदी के उस पार बसा यह इलाका पटना से निकटता और ऐतिहासिक पहचान के कारण लगातार चर्चा में रहता है.

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Hajipur Vidhan Sabha: हाजीपुर का नाम अक्सर राम विलास पासवान से जोड़ा जाता है, जिन्होंने हाजीपुर लोकसभा सीट से रिकॉर्ड मतों से जीत दर्ज की थी. हालांकि विधानसभा चुनावों में पासवान परिवार का सीधा प्रभाव सीमित रहा है, क्योंकि यह सीट सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित है.

बीजेपी के रहा है वर्चस्व

1951 में स्थापित हाजीपुर विधानसभा सीट पर बीते दो दशकों से भाजपा का वर्चस्व रहा है. नित्यानंद राय ने 2000 से 2010 तक चार बार इस सीट पर जीत दर्ज की. उनके लोकसभा में जाने के बाद अवधेश सिंह ने 2014 उपचुनाव से कमान संभाली और 2015 व 2020 में भी विधायक बने.

हालांकि 2020 में भाजपा की जीत का अंतर मात्र 3000 वोटों का रह गया, जो राजद की बढ़ती पकड़ का संकेत है. इस सीट पर SC (21%) और मुस्लिम (8%) मतदाता चुनावी नतीजों को निर्णायक रूप से प्रभावित करते हैं.

ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले लोग ज्यादा

हाजीपुर विधानसभा मुख्यतः ग्रामीण क्षेत्र है, जहां 67% से अधिक मतदाता गांवों में रहते हैं. शहरी मतदाता अपेक्षाकृत कम हैं. 2025 के चुनाव में यहां भाजपा और राजद के बीच कड़ा मुकाबला तय माना जा रहा है. NDA की सबसे बड़ी चुनौती एससी वोटबैंक को साधना है, वहीं चिराग पासवान की भूमिका भाजपा के लिए सहायक साबित हो सकती है.

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कितने वोटर हैं

1 जनवरी 2024 तक हाजीपुर में 352082 पंजीकृत मतदाता थे. नई मतदाता सूची के साथ यह संख्या और बढ़ सकती है. कभी भाजपा की अजेय मानी जाने वाली हाजीपुर सीट अब सियासी असमंजस की स्थिति में है. 2025 में परिणाम काफी कुछ स्थानीय समीकरणों, जातीय ध्रुवीकरण और गठबंधन की रणनीति पर निर्भर करेगा.

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Paritosh Shahi

लेखक के बारे में

By Paritosh Shahi

परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.

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