Bihar News : भागलपुर में मरीज बन डाॅक्टर से की दोस्ती, फिर 15 लाख रुपये लेकर हो गया फरार
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 19 Jul 2022 9:54 AM
ठग के जिस मोबाइल नंबर का जिक्र एफआइआर आवेदन में किया गया है उसकी जांच में यह बात सामने आयी है कि उक्त मोबाइल से केवल केस कर्ता डाॅक्टर को ही फोन किया गया है.
भागलपुर में इन दिनाें एक ऐसा गिरोह सक्रिय है जो कि चर्चित और आर्थिक रूप से मजबूत लोगों से संपर्क बना कर उनके करीब आता है और फिर चोरी या ठगी कर उनके पैसे लेकर फरार हो जाता है. एक ऐसा ही मामला तिलकामांझी थाना में शहर के एक चिकित्सक द्वारा दर्ज कराया गया है. चौंकाने वाली बात तो यह है कि केस कर्ता डाॅक्टर द्वारा मुहैया कराये गये ठग के मोबाइल नंबर की जांच करायी गयी तो उस मोबाइल नंबर से सिर्फ और सिर्फ उक्त डाॅक्टर से ही बातचीत किये जाने के रिकॉर्ड्स मिले हैं.
आठ जुलाई की घटना को लेकर दो दिन पूर्व मिरजानहाट स्थित हसनगंज निवासी डॉ गौतम कुमार ने राजस्थान निवासी राजेश प्रजापत के विरुद्ध चोरी का केस दर्ज कराया है. तिलकामांझी थाना गली में ही अपनी क्लिनिक चलाने वाले डॉ गौतम कुमार ने थाना को दिये गये आवेदन में कहा है कि कुछ दिनों से एक व्यक्ति जिसने अपना नाम राजेश प्रजापत और घर राजस्थान बताया था और वर्तमान पता जीरोमाइल इलाके का दिया था उनके पास मरीज बन कर पहुंचा था. कुछ ही दिनों में कई बार क्लिनिक पहुंच और फोन पर बातचीत कर उक्त व्यक्ति ने उनसे अपनी जान पहचान बढ़ा ली.
आठ जुलाई को जब डॉ गौतम कुमार अपने क्लिनिक से घर की ओर जा रहे थे तब राजेश प्रजापत ने उन्हें कचहरी चौक पर छोड़ देने की बात कह कर लिफ्ट मांगी. इसके बाद उन्होंने उक्त व्यक्ति को अपनी कार में अपने साथ पिछली सीट पर बैठा लिया. जहां सीट पर उनका एक बैग रखा था जिसमें 15 लाख रुपये मौजूद थे. कचहरी चौक पर उतरने के बाद उक्त व्यक्ति चला गया. जब घर पहुंचकर कार में अपनी बैग ढूंढ़ने की कोशिश की, तो बैग नहीं मिला.
डॉ गौतम कुमार ने थानाध्यक्ष को बताया कि उन्हें पूर्ण विश्वास है कि राजेश प्रजापत ने ही कचहरी चौक पर उतरते वक्त उनके पैसों से भरे बैग को चोरी छिपे उतार लिया. बैग की जानकारी लेने के लिये जब उन्होंने उक्त व्यक्ति के मोबाइल पर कॉल करने की कोशिश की तो मोबाइल लगातार स्विच ऑफ आ रहा है. तिलकामांझी थानाध्यक्ष एसआइ राज रतन ने बताया कि मामले में जांच की जा रही है.
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ठग के जिस मोबाइल नंबर का जिक्र एफआइआर आवेदन में किया गया है उसकी जांच में यह बात सामने आयी है कि उक्त मोबाइल से केवल केस कर्ता डाॅक्टर को ही फोन किया गया है. थानाध्यक्ष ने आशंका जताते हुए कहा कि इस तरह के गिरोह लगातार ठगी के प्रयास में रहते हैं और लोगों से करीबी संपर्क बनाने के बाद उन्हें चोरी या ठगी का शिकार बनाते हैं. थानाध्यक्ष ने मामले में ठग की फोटो सीसीटीवी के माध्यम से प्राप्त होने की बात कही.
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